- रोडवेज, रेलवे, सीमेंट और पावर प्लांट से फर्क पड़ेगा लोगों पर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 40 प्रतिशत के उछाल के बाद जिस तरह से डीजल की खुदरा कीमतों पर 25 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की बात की जा रही है। उससे भले ही आम वाहन चालकों की सेहत पर फर्क न पड़े, लेकिन जिन उद्योगों के द्वारा बल्क में डीजल लिया जा रहा है। उनके दाम बढ़ने से मंहगाई का सामना तो करना ही पड़ेगा।
इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड आॅयल के रेट में इजाफे का असर अब तक रिटेल कस्टमर्स पर तो नहीं पड़ा है, लेकिन बल्क यूजर्स को बड़ा झटका लगा है। आॅयल मार्केटिंग कंपनियों ने बल्क यूजर्स के लिए डीजल के दाम में 25 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है। हालांकि, पेट्रोल पंप पर रिटेल यूजर्स के लिए रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। दिल्ली में बल्क यूजर्स के लिए डीजल का दाम 115 रुपये पर पहुंच गया है। वहीं, पेट्रोल पंपों पर डीजल 86.67 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।
बल्क कस्टमर कौन है?
डिफेंस, रेलवे एंड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन, पावर प्लांट, सीमेंट प्लांट और केमिकल प्लांट मुख्य रूप से बल्क कस्टमर्स में शामिल हैं। आॅयल मार्केटिंग कंपनियां इन कस्टमर्स के लिए आॅयल के स्टोरेज और हैंडलिंग के के लिए खास तौर पर व्यवस्था करती हैं। दुनियाभर में तेल और ईंधन के दाम में काफी तेजी देखने को मिली है। इसके बावजूद पीएसयू आॅयल कंपनियों ने रिटेल ग्राहकों के लिए चार नवंबर, 2021 के बाद से पेट्रोल और डीजल के दाम में इजाफा नहीं किया है।
मेरठ पेट्रोल डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश जैन ने बताया कि डीजल के दामों में 25 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि उन ग्राहकों के लिये की गई है जो सीधे तौर पर तेल आयल कंपनियों से खरीदती है। इस वृद्धि से पेट्रोल पंपों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा और आम ग्राहकों की जेब पर असर नहीं पड़ेगा। वहीं संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष अजय गुप्ता का कहना है कि रेलवे, रोडवेज, सीमेंट प्लांट, कैमिकल प्लांट और पावर प्लांट जब महंगी दरों पर डीजल लेंगे तो उनकी उत्पाद लागत भी बढ़ेगी। इसका सीधा असर बाजार पर पड़ेगा और इन उत्पादों की कीमतें भी बढ़ जाएंगी।
कारण क्या है?
थोक उपभोक्ताओं के लिए दरों और पेट्रोल पंप कीमतों में 25 रुपये के बड़े अंतर की वजह से थोक उपभोक्ता पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद रहे हैं। वे पेट्रोलियम कंपनियों से सीधे टैंकर बुक नहीं कर रहे हैं। इससे पेट्रोलियम कंपनियों का नुकसान और बढ़ा है।

