Monday, May 4, 2026
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मेरठ में माफिया चलाते हैं बुलडोजर

देश की राजनीति में माफिया पर चलता सरकारी बुलडोजर चर्चा में हैं, परन्तु मेरठ में मामला उलटा हैं। यहां बुलडोजर तो चल रहा हैं, लेकिन माफिया का। अवैध खनन से जमीन का सीना चिरा जा रहा है। अवैध खनन पर मिट्टी माफिया काबिज हो गए हैं। एक-दो वर्ष से नहीं, बल्कि यह माफिया गिर्दी पांच से छह वर्षों से चल रही हैं। दिन के उजाले में तो माफिया मिट्टी का खनन कर ही रहा हैं, साथ ही रात के अंधेरे में यह गोरखधंधा ज्यादा चल रहा हैं। सरकारी सिस्टम के पांव तले भावनपुर के मेदपुर, राली चौहान, सयाल और भावपुर के जंगल में व्यापक स्तर पर अवैध खनन चल रहा हैं। तीस से ज्यादा डंपर अवैध खनन में लगे हैं तथा छह बुलडोजर लगे हैं। अर्थमूवर्स के नाम से बुलडोजर हैं, जो अवैध खनन में चल रहे हैं। इन खनन माफिया के नाम भी ‘जनवाणी’ के पास मौजूद हैं, लेकिन अभी सार्वजनिक नहीं किया जा रहा हैं। 20 हेक्टियर भूमि में आठ से 10 फीट गहराई तक खनन कर दिया। सरधना में अवैध खनन चलता हैं। पीले रेत का अवैध खनन यहीं पर मिट्टी माफिया कर रहे हैं। रोहटा रोड पर भी व्यापक स्तर पर रात के अंधेरे में मिट्टी माफिया अवैध खनन कर रहे हैं। सरकारी सिस्टम सब जानकर भी चुप हैं। पुलिस का भी संरक्षण प्राप्त हैं, जिसके चलते खनन माफिया अवैध खनन में रात-दिन जुटे हैं।

  • अवैध खनन: दिन ढलते ही बुलडोजर चीरने लगते हैं धरती का सीना
  • रात 10 बजे से शुरू होता है खनन, सुबह सात बजे तक रहता है जारी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: क्षेत्र में अवैध रूप से मिट्टी का खनन जोरों पर चल रहा है। सब कुछ पुलिस व प्रशासन के नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन प्रशासनिक अमला शांत बैठा हुआ है। पूरे तहसील क्षेत्र में जेसीबी और ट्रैक्टर लगा कर खनन माफिया शासन के दिशा निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे है। शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होने से खनन माफियाओं के हौसले बुलंदी पर है। शासन ने पूरे प्रदेश में अवैध रूप से हो रहे खनन पर रोक लगाई हुई है।

खनन के लिए शासन से आवश्यक दिशा निर्देश भी प्रशासनिक अमले को दी गई है। इसके बाद भी देहात क्षेत्र में पुलिस व तहसील प्रशासन की अनदेखी व मिलीभगत के चलते मिट्टी खनन का कार्य बे रोक-टोक चल रहा है। खनन माफिया खुलेआम जेसीबी से ट्रैक्टर-ट्रॉली पर मिट्टी लाद कर क्रय विक्रय कर रहे है। क्षेत्र के कई लोगों ने इस बाबत तहसील व पुलिस प्रशासन से शिकायत भी किया, लेकिन खनन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई न होने से उनके हौसले बुलंद है। अवैध रूप से खनन के बाद लदी मिट्टियां लेकर रोड पर चलने वाले ट्रैक्टर चालकों की रफ्तार इतनी तेज होती है कि अक्सर हादसे भी होते है। इसके बाद भी इन अवैध खनन करने वालों के खलिाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

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जिले के देहात क्षेत्रों में शाम ढलते ही अवैध रूप से खनन शुरू हो जाता है। बड़ी संख्या में डंपरों के द्वारा मिट्टी को उन कॉलोनियों तक पहुंचाया जाता है जिनमे फिलहाल प्लाटिंग की जा रही है। इसको लेकर पुलिस-प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। जिले में अवैध खनन ने फिर पैर पसार लिए है, इसका सबसे अधिक असर देहात के इलाकों में देखा जा रहा है। अंदरूनी गांवों के कई इलाकों में खेते से मिट्टी खोदकर उसे उन कॉलोनियों में डाला जा रहा है जिनमें प्लॉटिंग हो रही है। स्थानीय लोगों ने पहचान छिपाने की शर्त पर बताया कि पूरी रात यह सिलसिला जारी रहता है। यहां तक की डंपरों की आवाज की वजह से लोग रात को ठीक से सो भी नहीं पाते हैं।

प्रत्येक सड़क का अलग ठेकेदार

प्रत्येक सड़क का अलग ठेकेदार हैं। जब एसएसपी का प्रभाकर चौधरी ने कार्यभार ग्रहण किया था तो मिट्टी खनन बंद हो गया था। पुलिस ने सख्ती कर दी थी, लेकिन अब कैसे मिट्टी खनन चालू हो गया है, यह बड़ा सवाल हैं। कप्तान भी वहीं हैं, मगर मिट्टी खनन के ट्रक हर रोज प्रत्येक सड़क से शहर में एंट्री कर रहे हैं, कोई रोक-टोक नहीं हैं। प्रत्येक सड़क के अलग-अलग ठेकेदार हैं। वसूली ठेकेदार करते हैं। रात के अंधेरे में मिट्टी खनन का गोरखधंधा गुलजार हो जाता हैं। इसे कोई रोकने-टोकने वाला नहीं होता हैं। ऐसा लगता है कि खनन करने वालों को किसी का डर नहीं रहा, तभी तो अवैध मिट्टी खनन व्यापक स्तर पर हो रहा हैं।

नई कॉलोनियों में डाली जाती है मिट्टी

सिर्फ किला रोड पर ही इस समय आधा दर्जन नई कॉलोनिया बन रही है जिनमें प्लॉटिंग की जा रही है। इन कॉलोनियों में भराव के लिए मिट्टी की जरूरत पड़ती है जिसे अंदरूनी गांवों के जंगलों से खोदकर पूरा किया जाता है। इसके साथ ही गंगानगर क्षेत्र में अब्दुल्लापुर से एल ब्लॉक तक भी कई कॉलोनियां बन रही है। जिसने खनन द्वारा मिट्टी की सप्लाई की जा रही है।

खनन करने वालों को पूरी तरह से पुलिस-प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है इसी वजह से इनको रोेकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जाते है। सूत्रों के मुताबिक भावनपुर क्षेत्र के राली चौहान, मेदपुर, भावनपुर, स्याल आदि गांवों में पूरे साल खनन चलता है। क्योंकि यह गांव काफी अंदरूनी इलाके में आते है तो आसानी से इनपर किसी की नजर नहीं पड़ती। मेदपुर गांव के जंगल में तो जिस जमीन को बुलडोजर द्वारा नोंचा गया है उस जगह आठ से 10फीट गहरे गड्ढे हो गए हैं, लेकिन इसपर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन द्वारा कोई कदम नहीं उठाए जा रहे है।

अकेले भावनपुर क्षेत्र में ही करीब 30 डंपरों से खनन की मिट्टी ढोई जाती है। इसके साथ ही आधा दर्जन जेसीबी मशीने भी रात 10 बजे से अपने काम पर लग जाती है। इन मशीनों व डंपरों के मालिक एक डंपर मिट्टी की कीमत चार हजार रुपये वसूलते हैं। यह कीमत कम या ज्यादा भी हो सकती है। यह निर्भर करता है खनन वाली जगह से मिट्टी डालने वाली जगह की दूरी कितनी है।

शाम ढलते ही गरजने लगती है जेसीबी

ग्रामीण बताते हैं कि शाम ढलते ही जेसीबी और डंपर गरजने लगते हैं। सुबह होते ही गड़गड़ाहट की आवाज ठप हो जाती है। मिट्टी कहां जा रही है और कौन खोदवा रहा है, इसके बारे में कोई नहीं बता रहा है। ग्रामीण भी बताते हैं कि यह खनन सिर्फ प्रशासन के इशारे पर की जा रही है। इसमें जिम्मेदार अधिकारियों से एक बार नहीं बल्कि कई बार पत्र देकर खनन होने की बात बताई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

भावनपुर क्षेत्र में अवैध खनन के काम में सक्रिय माफियाओं की संख्या चार है जिनका पूरे इलाके में सिक्का चलता है। यह माफिया अपनी दुकान अर्थ मूवर्स के नाम से चलाते है, जबकि इनके पास प्रशासन से कोई भी अनुमति नहीं होती। गोकुलपुर गांव का खनन माफिया तो पिछले 12 सालों से इस काम को अंजाम दे रहा है लेकिन उसके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। खनन का गोरखधंधा खूब फलफूल रहा है। जिस पर अंकुश खनन विभाग भी नहीं लगा पा रहा है। रात के अंधेरे में सड़कों पर डंपर मिट्टी लादकर दौड़ते रहते हैं। जिनको नहीं तो खनन विभाग रोक पा रहा है और पुलिस प्रशासन।

हापुड़, गढ़ रोड भी चल रहा अवैध खनन

खनन माफिया देहात क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से खनन कर रहे हैं, लेकिन क्षेत्रीय पुलिस की मिलीभगत से यह कार्य रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। गढ़ रोड और हापुड़ रोड पर खुलेआम मिट्टी का खनन किया जा रहा है, लेकिन कोई इसे रोकने वाला नहीं है। रात के समय डंपर चालक तेजी से डंपरों को दौड़ाते हैं जिस कारण कई बार हादसे भी हो जाते हैं, लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती।

हापुड़ रोड की बात की जाये तो अलीपुर, नरहाड़ा के पास अवैध रूप से मिट्टी का खनन किया जा रहा है, लेकिन यहां जिला प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। रात को हाइवे पर तेजी से डंपर दौड़ते हैं, लेकिन पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। यही हाल गढ़ रोड के पास काली नदी के पास किना नगर, हसनपुर व अन्य गांवों का है यहां भी पूरी रात मिट्टी का अवैध कारोबार चलता है, लेकिन इसे रोका नहीं जाता।

काली नदी के पुल के पास चलता है अवैध कारोबार

अगर किसी को अवैध रूप से मिट्टी मंगवानी हो तो उसे दिन में मिट्टी नहीं मिलती। रात के समय चोरी छिपे अवैध खनन करने वाले मिट्टी डाल कर चले जाते हैं। यह ऐसा कारोबा है जो रात के समय खुलेआम चल रहा है और कोई इसे रोकने वाला नहीं है। गढ़ रोड पर गोकलपुर के पास ही अवैध खनन करने वालों ने अपना अड्डा बनाया है।

यहां डंपर सड़क पर ही खड़े रहते हैं और अगर आपको मिट्टी मंगवानी हो तो आपको आॅर्डर देना है रात को आपके ठिकाने पर मिट्टी पहुंच जायेगी। अब मिट्टी कहां से आई है और कब आई है। इसका पता आपको नहीं चलेगा। आपको बस इतना बताना होगा कि मिट्टी कहां डलवानी है। रातभर हाइवे पर मिट्टी से भरे डंपर दौड़ते हैं, लेकिन इन्हें रोका नहीं जाता।

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