- योगी सरकार में दोबार बनाये गये राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार
- लगातार तीसरे बार सदर विधानसभा सीट से जीतकर रचा था इतिहास
जनवाणी संवाददाता |
मुजफ्फरनगर: सदर विधानसभा सीट पर लगतार तीसरी बार विधायक बनकर इतिहास रचने वाले विधायक कपिल देव अग्रवाल को योगी सरकार के दूसरे मंत्रीमंडल में प्रमोशन नहीं दिया गया है और उन्हें राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाकर उनके पिछले पद को बरकरार रखा गया है। मुजफ्फरनगर के लोगों को उम्मीद थी कि जिस तरह से कपिल देव अग्रवाल ने योगी आदित्यनाथ के विश्वास पर खरे उतरते हुए तीसरी बार विधायक बनकर इतिहास रचा है, उन्हें इनाम के तौर पर परमोशन मिल सकता है और उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है।
2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने मुजफ्फरनगर में इतिहास रचा था और विपक्षी पार्टियों को धूल चटाते हुए जनपद की सभी छह सीटों पर अपना कब्जा कर लिया था। इस दौरान कपिल देव अग्रवाल भी सदर विधानसभा सीट से विधायक बने थे। योगी सरकार में बाद में जाकर जनपद के दो विधायकों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया था, जिनमें स्व. विजय कश्यप व कपिल देव अग्रवाल का नाम शामिल था। कपिल देव अग्रवाल का परमोशन करते हुए उन्हें राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बना दिया गया था।
2022 के विधानसभा चुनाव में जनपद के राजनीतिक समीकरण बदले और जाट-मुस्लिम गठजोड़ के चलते यहां पर भाजपा ने चार सीटों का नुकसान उठाया और छह सीटों में मात्र दो सीटें ही हासिल कर पायी, परन्तु कपिल देव अग्रवाल इस बार भी भाजपा की इज्जत बचाने में कामयाब हुए और पहले से भी ज्यादा अंतरों से सदर विधानसभा सीट पर अपनी जीत हासिल की। हालांकि खतौली विधानसभा सीट से विक्रम सैनी भी अपनी सीट बचाने में सफल रहे, परन्तु उनका अंतर 2017 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार कम हुआ था।
कपिल देव की बेहतर जीत को देखते हुए सभी अनुमान लगा रहे थे कि कपिल देव अग्रवाल योगी आदित्यानाथ की टीम में इस बार प्रमोशन पायेंगे और उन्हें राज्यमंत्री से प्रमोट कर कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। कपिल देव अग्रवाल को इस बार भी राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार ही बनाया गया है। हालांकि जनपद के लोगों के लिए यह हर्ष का विषय है, परन्तु उनका प्रमोशन न होने के कारण मायूसी भी है।
सदर विधानसभा सीट पर हैट्रिक लगाने वाले पहले विधायक
1952 से 1962 तक कांग्रेस जरूर लगातार तीन बार जीती, लेकिन दो बार द्वारका प्रसाद मित्तल एवं 1962 में तीसरी बार केशव गुप्ता कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव जीते थे। कपिल देव अग्रवाल ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लगातार तीन बार जीत कर सदर विधानसभा सीट पर इतिहास रच दिया है। मुजफ्फरनगर विधानसभा सीट वर्ष 1952 में पहली बार पहली बार वजूद में आई तो इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर द्वारका प्रसाद मित्तल एडवोकेट ने चुनाव जीतकर पहले विधायक बनने का खिताब हासिल किया।
1962 के चुनाव में कांग्रेस ने प्रत्याशी बदलते हुए केशव गुप्ता को चुनाव लड़ाया और उन्होंने जीत हासिल की। चैथी विधानसभा के चुनाव में 1967 में विष्णु स्वरूप ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत गए। इसके बाद पांचवीं विधानसभा के लिए भारतीय क्रांति दल के टिकट पर सईद मुर्तजा चुनाव लड़े और 1969 में उन्हें जीत हासिल हुई। 1974 में कांग्रेस के टिकट पर चितरंजन स्वरूप इलेक्शन में आए तो उन्हें भी जनता ने जीता कर विधानसभा में भेज दिया था। अगली बार फिर मुजफ्फरनगर सदर की जनता ने अपना विधायक 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर आई श्रीमती मालती शर्मा को चुना था।
इसके बाद 1980 में हुए विधानसभा चुनाव में विद्याभूषण ने कांग्रेस के टिकट पर सदर सीट से चुनाव जीता और सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने थे। अगली बार फिर कांग्रेस ही सदर सीट पर चुनाव जीती मगर इस बार प्रत्याशी चारुशीला अग्रवाल थी। 1989 में फिर सदर विधानसभा की जनता ने पार्टी और विधायक दोनों बदल दिए। इस बार जनता दल के टिकट पर लड़े सोमांश प्रकाश को मुजफ्फरनगर की जनता ने विधानसभा में चुनकर भेजा था। इसके बाद राम मंदिर की लहर में 1991 में भाजपा के टिकट पर सुरेश संगल चुनाव जीते और दूसरी बार उन्होंने फिर से 1993 में भाजपा के टिकट पर जीत हासिल कर की थी। 1996 में भाजपा ने सुरेश संगल पर दांव ना लगाकर इस बार श्रीमती सुशीला अग्रवाल को टिकट दिया और वह भी चुनाव जीत गई।
वर्ष 2002 में हुए विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने चितरंजन स्वरूप को टिकट दिया तो उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को हराकर विजयश्री हासिल की। 2007 में भाजपा ने अशोक कुमार कंसल ने फिर भाजपा के खाते में जीत दर्ज कराई। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में फिर सदर की जनता ने चितरंजन स्वरूप को चुनाव जीता कर भेजा था । इस बीच पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप के निधन से खाली हुई सदर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी की सरकार में उपचुनाव हुआ। इसमें भाजपा ने कपिल देव अग्रवाल पर दांव लगाया।
भारतीय जनता पार्टी के सिंबल पर कपिल देव ने जीत हासिल की। 2017 के विधानसभा चुनाव में कपिल देव अग्रवाल ने समाजवादी पार्टी के गौरव स्वरूप को हराकर लगातार दूसरी बार जीत हासिल कर कांग्रेस के द्वारका प्रसाद मित्तल और भाजपा के सुरेश संगल के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली थी, लेकिन अब 2022 विधानसभा चुनाव में कपिल देव अग्रवाल ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में सौरव स्वरूप को हराकर सदर विधानसभा सीट पर विधानसभा सीट के 70 साल के इतिहास में लगातार हैट्रिक लगाकर एक नया इतिहास रच दिया था।
जनता के बीच रहकर करते हैं राजनीति
कपिल देव अग्रवाल आरएसएस से जुड़े रहे हैं और वह हमेशा जनता के बीच रहकर राजनीति करते रहे हैं। भाजपा से वह नगरपालिका चेयरमैन बने थे, तो उस समय भी वह जनता के बीच रहे। 2016 में जब उन्हें भाजपा से विधायक प्रत्याशी बनाया गया, तो उस समय लोगों को लग रहा था कि वह यह चुनाव नहीं जीत पायेंगे, इसके पीछे कारण माना जा रहा था कि 2016 में चुनाव स्व. चितरंजन स्वरूप के निधन से खाली हुई सीट पर हो रहा था और इस सीट पर सपा प्रत्याशी चितरंजन स्वरूप के पुत्र गौरव स्वरूप थे।
गौरव स्वरूप को एक ओर ओर तो सिपेंथी मिल रही थी, दूसरी ओर प्रदेश में सपा की सरकार थी, ऐसे में कपिल देव अग्रवाल के लिए यह चुनाव जीतना आसान नहीं था, परन्तु उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए अच्छी जीत हासिल की। कपिल देव की इस जीत के बाद बने उनका कद भाजपा में उंचा हो गया था और 2017 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने कपिल देव अग्रवाल को ही अपना प्रत्याशी बनाया था और कपिल देव अग्रवाल हाईकमान के विश्वास पर खरे उतरे थे और जीत हासिल की थी।
2022 के चुनाव में भी हाईकमान का विश्वास कायम रहा और तमाम विरोधों के बावजूद उन्हें प्रत्याशी बनाया गया और वह इस बार भी बड़ी जीत हासिल करने में कामयाब रहे। कपिल देव अग्रवाल को दूसरी बार स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री बनने से उनका राजनीतिक कद मुजफ्फरनगर की राजनीति में बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जिसको लेकर जहां उनके समर्थकों में खुशी की लहर है, वहीं उनके विरोधियों में बैचेनी भी है।

