जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: संसदीय कार्यवाही के प्रति सांसदों की गंभीरता का नमूना लोकसभा में देखने को मिला। अपराध की जांच की प्रकृति और संस्कृति में अहम बदलाव लाने वाले दंड प्रक्रिया (पहचान) बिल पेश करने के दौरान सोमवार सदन से दो तिहाई सांसद गायब थे। बिल पर मतविभाजन के दौरान सरकार की प्रतिष्ठा इसलिए बच गई, क्योंकि विपक्ष के भी दो तिहाई सांसद सदन में मौजूद नहीं थे।
इस बिल पर विपक्ष के मतविभाजन की मांग के समय 543 सदस्यीय लोकसभा में एक तिहाई से भी कम (178) सदस्य ही मौजूद थे। इस दौरान दोनों पक्षों के सांसद ही नहीं, वरिष्ठ नेता तक सदन में मौजूद नहीं थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सत्ता पक्ष के कई नेता गोवा में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में गए थे। जबकि सदन में इस दौरान सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मुलायम सिंह यादव, एचडी देवगौड़ा, फारूक अब्दुल्ला जैसे वरिष्ठ नेता भी मौजूद नहीं थे।
पीएम मोदी की चेतावनी का भी सांसदों पर नहीं हुआ असर
पिछली लोकसभा से ही प्रधानमंत्री सांसदों को सत्र के दौरान सदन में उपस्थित रहने के प्रति लगातार आगाह करते रहे हैं। सांसदों के रवैये से नाराज पीएम ने बीते शीतकालीन सत्र में सांसदों से खुद में बदलाव लाने की चेतावनी तक दी थी। उन्होंने कहा था कि खुद को बदलिये नहीं तो बदलाव अपने आप हो जाएगा। लेकिन लगता है इसका सांसदों पर कोई असार नहीं है। लोकसभा में इस समय राजग के सदस्यों की संख्या 326 है, मगर मतविभाजन के दौरान इनमें से महज 120 सांसद ही सदन में मौजूद थे।
करोड़पतियों और दागियों की भरमार
नई लोकसभा में दागियों और करोड़पतियों की भरमार है। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में 43 फीसदी सांसद दागी हैं। इनमें 159 सांसदों के खिलाफ हत्या, दुष्कर्म और अपहरण के आरोप हैं। वर्तमान लोकसभा के 88 फीसदी सांसद करोड़पति हैं। कई दलों के तो शतप्रतिशत सांसद करोड़पति हैं।

