
आजकल देश में लाउडस्पीकर की आवाज को लेकर बहस छिड़ी हुई है। वैसे तो धार्मिक स्थलों व धार्मिक आयोजनों में लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल किया जाता है। कई बार देखा गया है कि लाउडस्पीकर की आवाज बहुत अधिक होती है। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने भी लाउडस्पीकर की आवाज को सीमित रखने के लिए कहा है। लेकिन फिर भी लोग इन हिदायतों का पालन नहीं करते। सभी लोग एक-दूसरे के ऊपर दोष लगा रहे हैं। इस मामले में जमकर राजनीति भी हो रही है। जबकि निर्धारित मानकों से ज्यादा आवाज ध्वनि प्रदूषण की बड़ी वजह है। ये एक सामाजिक समस्या भी है।
साल 2017 में मशहूर सिंगर सोनू निगम ने लाउडस्पीकर का विरोध करते हुए एक ट्वीट किया था कि मस्जिदों में सुबह-सुबह लाउडस्पीकर से होने वाली अजान से नींद खराब हो जाती है। साल 2021… इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर संगीता श्रीवास्तव ने शिकायत की थी कि सुबह सुबह लाउडस्पीकर से बजने वाली अजान के चलते उनकी नींद खराब होती है।
नवंबर 2021… साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि अजान की वजह से साधु-संतों को ब्रह्म मुहूर्त में पूजा-आरती करने में समस्या होती है। उनके इस बयान के बाद ये मामला एक बार फिर से सुर्खियां में छाया था। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने धमकी दी कि मस्जिदों में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल बंद हो, नहीं तो मस्जिदों के बाहर तेज आवाज में हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा। बात यहीं तक नहीं रुकी, अब राज ठाकरे ने धमकी दे दी है कि अगर 3 मई तक सभी मस्जिदों से लाउडस्पीकर नहीं हटाए गए तो उनके कार्यकर्ता मस्जिदों के बाहर लाउडस्पीकर से हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। इसी बीच केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि महाराष्ट्र में लाउडस्पीकर की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
सवाल ये है कि क्या मंदिर या मस्जिद में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया जा सकता है? इस पर कानून क्या कहता है? लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की मनाही नहीं है, लेकिन इसके इस्तेमाल को लेकर कुछ शर्तें भी हैं? लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर संविधान में नॉयज पॉल्यूशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स, 2000 में प्रावधान है। लाउडस्पीकर या कोई भी यंत्र का अगर सार्वजनिक स्थान पर इस्तेमाल किया जा रहा है, तो उसके लिए पहले प्रशासन से लिखित में अनुमति लेनी जरूरी है। रात के 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर या कोई भी यंत्र बजाने पर रोक है. हालांकि, आॅडिटोरियम, कॉन्फ्रेंस हॉल, कम्युनिटी और बैंक्वेट हॉल जैसे बंद स्थानों पर इसे बजा सकते हैं। राज्य सरकार चाहे तो कुछ मौकों पर रियायतें दे सकती है।
राज्य सरकार किसी संगठन या धार्मिक कार्यक्रम के लिए लाउडस्पीकर या दूसरे यंत्रों को बजाने की अनुमति रात 10 बजे से बढ़ाकर 12 बजे तक दे सकती है. हालांकि, एक साल में सिर्फ 15 दिन ही ऐसी अनुमति दी जा सकती है। इसके अलावा नियम में कई अन्य प्रावधान हैं। इन नियमों का उल्लंघन करने पर कैद और जुमार्ने दोनों सजा का प्रावधान है. इसके लिए एन्वार्यमेंट (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1986 में प्रावधान है. इसके तहत इन नियमों का उल्लंघन करने पर 5 साल कैद और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
जमीनी स्तर पर देखा जाए तो इस नियम को धड़ल्ले से दुरुपयोग होता है और अक्सर ही तमाम तरह के आयोजनों मे ध्वनि नियंत्रण की निर्धारित सीमा से कहीं तेज कान फोड़ू गानों के लिए लाउडस्पीकर, उच्च कोटि के संगीत उपकरण और हाईफाई एंपलीफायर का इस्तेमाल हो रहा है। धार्मिक मामलों में तो मारपीट तक की स्थिति पैदा हो जाती है। धार्मिक स्थलों में तेज आवाज में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल का विरोध होने पर अदालतों में तर्क दिये गए हैं कि इससे उनके मौलिक अधिकारों का हनन होता है लेकिन न्यायालय ने इनकी इस दलील को ठुकरा दिया।
यही नहीं, पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद सरीखे जैसे नेताओं ने तो अजान के लिए मस्जिदों में लाउडस्पीकर की अनुमति को संविधान के अनुच्छेद 25 में प्रदत्त धार्मिक आजादी से भी जोड़ने का असफल प्रयास किया था। लेकिन, इलाहाबाद उच्च न्यायालय उनके इस तर्क से भी सहमत नहीं था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक लाउडस्पीकर्स का इस्तेमाल इस्लाम के लिए आवश्यक नहीं है।
अजान और हनुमान चालीसा एक पाठ किये जाने को लेकर चल रहे लाउडस्पीकर विवाद पर बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी का अयोध्या से बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि हम हैं मुसलमान लेकिन हिंदुओं के सभी देवी देवता का सम्मान करते हैं। लेकिन आज तक अजान और हनुमान चालीसा को लेकर कोई विवाद नही रहा लेकिन कुछ लोग राजनीति कर लोगो को उलझा रहे हैं।
भले ही राज्य सरकारों ने ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं, लेकिन अभी भी यह बड़ा सवाल है कि इन निर्देशों पर अमल कैसे होगा। धार्मिक समागमों और ऐसे ही दूसरे आयोजनों में अत्यधिक तेज ध्वनि से बज रहे डीजे पर कौन रोक लगाएगा? क्या स्थानीय पुलिस प्रभावी तरीके से ऐसा कर सकेगी? फिलहाल तो यह देखना है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के लिए छेड़ी गई|
इस मुहिम का सद्भावपूर्ण समाधान कब और कैसे होगा और क्या राजनीतिक दल ध्वनि प्रदूषण को प्राथमिकता देने की बजाए अजान बनाम हनुमान चालीसा के नाम पर अपनी अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते रहेंगे। इस मुद्दे के उचित समाधान के लिए सभी पक्षों को खुले मन से बैठकर बातचीत करनी चाहिए।


