
पिछले दिनों ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन दो दिन की यात्रा पर भारत आए। यात्रा के दौरान जानसन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीच हैदराबाद हाउस में स्ट्रैटेजिक डिफेंस, डिप्लोमेसी और इकोनॉमिक पार्टनरशिप जैसे जरूरी मुददों पर चर्चा हुई। भारत-ब्रिटेन संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने मुक्त व्यापार समझौते के मसौदे पर चर्चा कर इसे साल के आखिर तक अंतिम रूप दिए जाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेता एक नए एवं विस्तारित द्विपक्षीय रक्षा व सुरक्षा गठजोड़ बनाने पर भी सहमत हुए। जानसन ने भारत के राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन में शामिल पर भी हामी भरी है।
सामरिक और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से जानसन की भारत यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है। यात्रा की अहमयित की कुछ बड़ी वजह भी हैं। इस साल के अंत तक मुक्त व्यापार समझौते के मसौदे को अंतिम रूप दिये जाने के निर्णय पर दोनों देशों का सहमत होना जानसन की यात्रा का प्रथम अहम बिन्दू कहा जा सकता है। भारत और ब्रिटेन के बीच पिछले लंबे समय से मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने पर विचार चल रहा था। इसी साल फरवरी में भारत ने यूएई और आॅस्ट्रेलिया के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्तारक्षर किए है। हिंद-प्रशांत पैसिफिक में चीन की चुनौती को देखते हुए ब्रिटेन का हिंद-प्रशांत महासागरीय पहल में शामिल होना और भारत के साथ सुरक्षा सहयोग पर आगे बढ़ना जानसन के भारत दौरे की दूसरी अहम वजह है।
तृतीय, दो दिवसीय यात्रा के अंतिम चरण में जिस तरह से जानसन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के प्रति गर्मजोशी दिखाई उससे जानसन की यात्रा और उसके उदेश्य को समझा जा सकता है। और चतुर्थ, द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने साफगोई और बेबाकी के साथ वार्ता में शामिल मुद्दों पर अपनी राय रखी उससे साफ है कि आने वाले समय में दोनों देश द्वि-पक्षीय सहयोग के जरिए काफी कुछ नया करने की इच्छा रखते हैं। भारत और ब्रिटेन ने साल 2030 तक का जो रोडमैप बनाया है, उसमें दोनों देशों के दीर्घकालिक पारस्परिक हितों की झलक साफ-साफ देखी जा सकती है।
लेकिन सवाल यह है कि इससे पहले दो बार भारत का दौरा स्थगित कर चुके जानसन रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत क्यों आए हैं और इस दौरे का मकसद क्या था। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान जिस तरह से पश्चिमी के नेताओं के भारत आने का तांता लगा हुआ है उसे देखते हुए यह सवाल वाजिब ही है कि जानसन की यात्रा के मायने क्या हैं। दरअसल, इस वक्त वैश्विक राजनीति जिस परिर्वतन के दौर से गुजर रही है, उसमें भारत जैसे देश को स्टेक होल्डर की भूमिका में देखा जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका-ब्रिटेन और नाटो देशों का प्रयास है कि भारत खुलकर रूस का विरोध करे और यूक्रेन का साथ दे।
लेकिन रूस से दोस्ती के चलते भारत ने खुद को इससे अलग रखा हुआ है। अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के दबाव के बावजूद भारत अपने रुख पर कायम है। भारत का बड़ा बाजार भी ब्रिटेन की रूचि का एक कारण है। यूरोपीय संघ से अलग हो जाने के बाद तेज गति से बढ़ती भारत की अर्थव्यवस्था और उसके बाजार ब्रिटेन को आकर्षित कर रहे हैं।
साल 2004 में भारत-ब्रिटेन रणनीतिक साझेदारी के बाद दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों की बेहतरी के दिशा में प्रयासरत रहे हैं। दोनों देशों के बीच सोलह अरब डॉलर से अधिक का व्यापार है। जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था बदल रही है इसकी सामरिक और सैन्य शक्ति भी बढ़ रही है। रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत ब्रिटेन सहित दुनिया के कई देशों से सामान खरीदता है।
रक्षा बजट के मामले में भारत टॉप 3 में शामिल है। वह अमेरिका और चीन के बाद सबसे ज्यादा बजट ( 5.87 लाख करोड़) रक्षा जरूरतों पर खर्च करता है। ब्रिटेन भारत को रक्षा सामान के एक बड़े बाजार के तौर पर भी देख रहा है। ऐसे में ब्रिटेन को लग रहा है भारत के साथ बेहतर संबंध उसके लिए लाभ का सौदा हो सकता है।
मोदी-जानसन द्विपक्षी वार्ता के दौरान यूक्रेन मामले पर भी चर्चा हुई। ब्रिटेन ने रूस के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। जानसन जानते हैं कि भारत और रूस के बीच संबंध ऐतिहासिक हैं, इसीलिए उन्होंने बड़ी चतुराई से इस मुद्दे को टालते हुए कहा कि हमारे रिश्ते आर्थिक और कारोबारी हितोें की बुनियाद पर टिके हुए हैं। रूस-यूक्रेन मामले में भारत के रूख को देखते हुए एक बारगी लग रहा था कि भारत-ब्रिटेन संबंध प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन जॉनसन के दौर के बाद यह साफ हो गया कि भारत-ब्रिटेन के संबंध इस दौर से कहीं आगे निकल चुके हैं।
भारत दौरे के दौरान जानसन ने गुजरात (वडोेदरा) में ब्रिटिश मूल की कंपनी जेसीबी की नई यूनिट का उद्घाटन किया। इस यूनियट में बुलडोजर समेत निर्माण के क्षेत्र में काम आने वाले दूसरे कई उपकरण बनाए जाते है। 650 करोड़ रुपए की लागत से निर्मत जेसीबी का भारत में यह छठा प्लांट है।
हालांकि, मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने से पहले अंतरिम व्यापार समझौते को अमली जामा पहनाने एवं हिंद प्रशात क्षेत्र को मुक्त और स्वतंत्र बनाए रखने के भारत के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच जो सहमति बनी है, उससे साफ है कि ब्रिटेन न केवल भारत के साथ आर्थिक मोर्चे पर आगे बढ़ना चाहता है, बल्कि सामरिक और रणनीतिक मोर्चे पर भी भारत का साथ चाहता है। अगर ऐसा होता है, तो यह कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की बड़ी जीत होगी।


