Sunday, March 29, 2026
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एफसी और एई के बीच जूतम-पैजार

  • दोनों की तरफ से देहली गेट थाने में दी गई तहरीर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शुक्रवार को नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया चल रही थी, तभी एफसी संतोष शर्मा और एई राजपाल यादव के बीच लात-घूसे चल गए। निगम अधिकारियों के बीच मारपीट की घटना से अफरातफरी मच गई। एफसी ने कुर्सी उठाकर एई पर हमला कर दिया। यही नहीं, एई को सीढ़ियों से भी धक्का दे दिया, जिससे उसे गंभीर चोटें आयी है।

एफसी के खिलाफ राजपाल यादव ने देहली गेट थाने में मारपीट करने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। साथ ही यह भी आरोप लगाया है कि उसका आठ माह का वेतन एफसी ने जानबूझकर रोक रखा है। वेतन जारी करने के बदले में कुल धनराशि पर 30 प्रतिशत की घूस मांगी जा रही है।

घूस नहीं दी तो मारपीट पर उतर आये। उधर, एफसी संतोष शर्मा का कहना है कि एई राजपाल यादव ने उसके कक्ष में आकर मारपीट की। उसका वेतन तकनीकी वजह से रुका हुआ है। भ्रष्टाचार की इसमें कोई बात नहीं है। इस मारपीट की घटना के बाद यह तो तय है कि निगम के अधिकारी बेलगाम हो गए हैं। खुद भी मारपीट कर रहे हैं। बाहर के लोगों के साथ पहले भी मारपीट हो चुकी है।

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बता दें, नगर निगम के दफ्तर में शुक्रवार को टेंडर समिति की बैठक चल रही थी। बैठक के दौरान एफसी व एई के बीच कहासुनी हुई, फिर बात मारपीट तक पहुंच गई। खूब हाथापाई भी हुई। लात-घूसे भी चले। वित्त नियंत्रक संतोष शर्मा का आरोप है कि जैसे वह बैठक में गए तो वहां पहले से मौजूद सहायक अभियंता राजपाल यादव ने सैलरी रोके जाने की बात कहकर गली-गलौज करनी शुरू कर दी।

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गाली देने से मना किया तो उसने मारपीट शुरू कर दी। इसमें गाली-गलौज एई की तरफ से की गई। एई राजपाल यादव का कहना है कि दिसंबर माह में उनकी बेटी की शादी है। उनकी आठ माह की सैलरी रुकी हुई है। वित्त नियंत्रक उसमें अड़ंगा लगा रहे हैं। उनसे बार-बार कहा जाता है तो नगरायुक्त ने आपत्ति लगाने की बात कहकर फाइल को रोक रखा है।

क्योंकि उसकी आठ माह की वेतन करीब साढ़े 10 लाख बैठती है, जिसमें 30 प्रतिशत की घूसखोरी की मांग की जा रही है। इसी वजह से उसका वेतन रुका पड़ा है। कहा जा रहा है कि मथुरा से एलपीजी नहीं आयी। वहां से सत्यापन प्रमाण पत्र आयेगा। एई का कहना है कि आठ माह के बाद उसे लगातार दो वर्ष से वेतन मिल रहा है, जब उसका एलपीजी प्रमाण पत्र नहीं आया तो फिर वेतन क्यों दिया जा रहा हैं?

आठ माह के दौरान मूल वेतन भी रोका गया, जबकि उसे रोकने का कोई नियम नहीं है। शुक्रवार को नगर निगम अधिकारियों के बीच हुई मारपीट की घटना की वजह कुछ भी हो, मगर इतना अवश्य है कि इसमें अफसरों की किरकिरी हुई है। दोनों तरफ से एक-दूसरे के खिलाफ क्रास रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए देहली गेट थाने में तहरीर दी गई है।

ये बोले-एफसी

नगर निगम के एफसी संतोष शर्मा का कहना है कि एई उनके कक्ष में पहुंचे तथा जाते ही वेतन के मुद्दे को लेकर गाली-गलौज देने लगे। इसके बाद मारपीट शुरू कर दी। वेतन नगरायुक्त के स्तर से रोका गया है, इसमें उनकी भूमिका नहीं है। इसकी तहरीर देहली गेट थाने में दे दी है।

ये बोले-एई

विवाद आठ माह की रोकी गई वेतन को जारी करने से पहले तीस प्रतिशत की घूसखोरी मांगी जा रही है, जिसे मैं देने को तैयार नहीं हूं। इसी वजह से दो वर्ष से उसका वेतन रोक रखा है। मूल वेतन भी नहीं दिया है। उनके साथ मारपीट टेंडर प्रक्रिया के दौरान की गई।

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