- सालों से पुरानी मोहनपुरी में नहीं है सीवरों की सुविधा
- कॉलोनी के बीच स्थित नाला हर साल बरसात के मौसम में उफनता है
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: बरसात का मौसम सिर पर है, मगर नगर-निगम ने जल भराव को लेकर कोई तैयारी नहीं की है। शहर के भीतरी इलाकों में हर साल की तरह इस साल भी जनता को भारी जलभराव की समस्या से जूझना पड़ेगा। इस बार फिर से पुरानी मोहनपुरी का इलाका तालाब में तब्दील होने की कगार पर है। स्थानीय लोगो ने बताया कि जितने दिन बरसात का मौसम रहता है वह नारकीय जीवन जीने को मजबूर रहते है। मगर निगम के अधिकारियों के सिर पर जंू तक नहीं रेंगती।
क्षेत्र में ही सुनार की दुकान चलाने वाले सुमित का कहना है कि उनकी दुकान बिल्कुल नाले के किनारे है। जब भी बरसात का मौसम आता है तो उन्हें काफी समस्साओं का सामना करना पड़ता है। नाले की बाउंड्री टूट जाती है और सारा गंदा पानी इलाके में भर जाता है। सालों पुरानी कॉलोनी है लेकिन यहां पर आज तक भी सीवर सिस्टम नहीं है। दुकान पर ग्राहकों का भी आना बंद हो जाता है।
बरसात के मौसम में जलभराव के कारण व्यापार भी चौपट हो जाता है। स्थानीय निवासी अंजू का कहना है बरसात के मौसम में नाला पूरी तरह उफान पर आ जाता है। जिसका पानी उनके घरों में भरने लगता है। साथ ही गंदे पानी के साथ बहकर आने वाला कूड़ा भी घरों के सामने जमा हो जाता है। गंदगी के कारण बीमारियां फैलने का खतरा लगातार बना रहता है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है, बावजूद इसके निगम की तरफ से दवाईयों का छिड़काव तक नहीं कराया जाता है।
यहां तक की जलभराव के कारण चूहें उनके घरों में घुस जाते है। स्थानीय निवासी बबली का कहना है कि निगम के सफाई कर्मचारी नालियों से कूड़ा बाहर निकालकर उनके घरों के सामने जमा कर देते है। अब बरसात सिर पर है, यह कूड़ा फिर से बहकर नालियों के रास्ते नालें में जमा हो जाता है। इससे नाले का गंदा पानी भी सड़क पर भरजाता है, यह इलाका निगम के वार्ड-44 में आता है।
बरसात के मौसम में भारी जलभराव होने पर भी निगम पार्षद प्रसन्न जीत गौतम उनकी कोई सुध लेने नहीं आते है। बीमारियां फैलने का खतरा लगातार बना रहता है। स्थानीय निवासी मीना का कहना है कि निगम के सफाई कर्मचारी समय पर कूड़ा उठाने नहीं आते है। कई दिनों तक कूड़ा उनके घरों में ही जमा रहता है, मजबूर होकर कूड़े को नाले में फेंकना पड़ता है।
जिससे नाला भी गंदगी से भर जाता है, बरसात में तो हालात किसी नर्क से भी बदतर हो जाते है। बरसात के मौसम में पीने के पानी की भी भारी किल्लत हो जाती है। निगम की पानी की पाइप लाइनों में गंदा पानी आता है। हैंडपंप खराब है तो किसी तरह पीने के पानी की व्यवस्था करते है।

