- चार जुलाई 1857 को अंग्रेजी हुकूमत ने गांव में तोपे लगाकर 400 ग्रामीणों को उतार दिया था मौत के घाट
जनवाणी संवाददाता |
जानी खुर्द: मेरठ से उठी 1857 की क्रांति की गाथा मेरठ के पांचली गांव से जुड़ी है। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आजादी की पहली लड़ाई में पांचली निवासी धनसिंह कोतवाल से जुड़ी है। जनपद का पांचली गांव ऐसा गांव है। जहां से शुरू हुई 1857 की क्र ांति से ही देश को आजाद कराने की बुनियाद पड़ी है। पांचली के पूर्व प्रधान भोपाल सिंह बताते हैं कि उनके पिता व दाता देश की आजादी की गाथा बताते रो पड़ते थे।
भोपाल सिंह के अनुसार 1857 अप्रैल के माह में अंग्रेज सरकार के सिपाही व एक अंग्रेजी हुकूमत की एक अधिकारी मेम गांव पहुंची और किसी बात पर गांव के ही तीन ग्रामीण नरपत, मंगत व एक अन्य ओर से कुछ कहा सुनी हो गयी। कहासुनी इतनी बढ़ी कि गांव वालों ने मेम साहब व अंग्रेज सिपाही को पकड़ लिया, लेकिन कुछ अंग्रेज सिपाही वहां से भाग खडेÞ हुए और 20-25 सिपाही को लेकर गांव पहुंचे।
अंग्रेजी हुकूमत ने कुछ ग्रामीणों को पकड़ कर कोतवाल धन सिंह को सौंप दिया। धनसिंह कोतवाल ने अंग्रेजी हुकूमत द्वारा पकड़े गये लोगों को छोड़ दिया तो अंग्रेज सरकार ने घोषणा की कि अगर धन सिंह कोतवाल ने आरोपियों का सर्मपण नहीं किया तो पूरे गांव को सजा मिलेगी। अंग्रेजी हुकूमत की चेतावनी का कोतवाल धन सिंह पर कोई असर नहीं हुआ और इस घटना ने धनसिंह कोतवाल को बागी बनाकर 10 मई को जेल में बंद 836 कैदियों को जेल से मुक्त कर दिया गया।
इसी घटना से नाराज होकर चार जुलाई 1857 को सुबह करीब चार बजे अंग्रेजी सरकार ने सैन्य टुकड़ी लगाकर गांव पर तोपों से हमला कर करीब 400 ग्रामीणों को मौत के घाट उतार दिया गया। इतना ही नहीं 46 ग्रामीणों को कैद कर 40 ग्रामीणों को फांसी दे दी गयी।

