- पहुंचे चीफ के दरबार, पेश की सफाई, हस्तिनापुर के चेतावाला गंगा पुल प्रकरण में मुख्य अभियन्ता ने मांगे नाम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: हस्तिनापुर में गंगा पुल हादसे के बाद लोक निर्माण विभाग में उठा तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को जब पीडब्ल्यूडी के प्रान्तीय खंड से जुड़े अभियन्ताओं को यह भनक लगी कि चीफ इंजीनियर के कार्यालय से वो नाम मांगे गए हैं, जो इस पुल के निर्माण से जुड़े हैं तो संबधित अभियन्ताओं में खलबली मच गई। बड़ी संख्या में यह इंजीनियर (विभिन्न जेई व एई) बाबुओं संग गुरुवार को विक्टोरिया पार्क स्थित मुख्य अभियंता के कार्यालय पहुंचे और अपनी सफाई पेश की।
पता यह चला है कि मुख्य अभियन्ता के कार्यालय द्वारा अधिशासी अभियंता के कार्यालय से पुल निर्माण से जुड़े नाम मांगे गए हैं। हांलाकि मुख्य अभियन्ता राजीव कुमार ने बताया कि नाम किसी खास मकसद से नहीं मांगे गए हैं। उधर सूत्रों का कहना है कि जो नाम इस पुल के निर्माण कार्यों से जुड़े हैं और जो नाम चीफ के दरबार में पहुंच गए हैं उन नामों का एनालिसिल भी संभव है।

इसको लेकर इन अभियंताओं में हड़कम्प मचा हुआ है। जो अभियंता चीफ के दरबार में अपनी हाजिरी लगाने पहुंचे थे उन्होंने अपने पक्ष में चीफ के समक्ष कई दलीलें पेश की। इस गंगा पुल हादसे के बाद भले ही लोक निर्माण विभाग में तूफान से पूर्व की शांति नजर आ रही हो, लेकिन जब से चीफ ने नामों की लिस्ट मंगाई है तब से और हड़कम्प मचा हुआ है। पीडब्ल्यूडी से जुड़े सूत्रों ने यहां तक आशंका व्यक्त कर दी है कि आने वाले कुछ दिनों में विभाग में कार्रवाई का चाबुक भी चल सकता है।
मेरा पूरा फोकस गाइड बंध निर्माण पर: मुख्य अभियंता
लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियन्ता राजीव कुमार ने बताया कि यह एक दैवीय आपदा थी और अब उनका पूरा फोकस फिलहाल पुल को सही कराकर उस पर यातायात सुचारु कराने के साथ साथ यहां बनने वाले गाइड बंध पर है। उन्होंने बताया कि इसके लिए 129 करोड़ रुपए स्वीकृत हो चुके हैं और उनका पूरा प्रयास होगा कि शीघ्र ही बल्कि इसी वित्तीय वर्ष में उक्त पैसा शासन से रिलीज जो जाए।
इसके बाद जितना जल्द हो सकेगा वो यहां दोनों ओर लगभग डेढ़-डेढ़ किमी लंबे गाइड बंधों का निर्माण कराएंगे ताकि भविष्य में कोई हादसा पेश न आए। चीफ ने यह भी साफ किया कि जो क्षति हुई है। उसकी भरपाई संबधित ठेकेदार द्वारा ही कराई जा रही है।

