जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस से चार दिन पहले जिले के एक सैन्य कैंप में गुरुवार को पाकिस्तानी फिदायीनों के हमले को सेना ने नाकाम कर दिया। इसमें एक जेसीओ समेत चार जवान शहीद हो गए। चार घंटे चली मुठभेड़ में दोनों हमलावर फिदायीनों को सेना ने मार गिराया। दो जवान घायल हैं।
जिनका उपचार चल रहा है। मुठभेड़ स्थल पर मारे गए आतंकियों से दो एके-47 राइफल, नौ मैगजीन, 300 कारतूस, पांच ग्रेनेड और गोलाबारूद बरामद हुआ है। घटना के बाद पूरे इलाके में अलर्ट जारी कर दिया गया है। दिनभर तलाशी अभियान भी चलाया गया। डीजीपी दिलबाग सिंह के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंप तक पहुंच गए थे, लेकिन उन्हें मार गिराया गया।
सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने बताया कि गुरुवार सुबह दरहाल तहसील के परगाल ढोक में सेना के कंपनी ऑपरेटिंग बेस कैंप के पास संतरी ने संदिग्ध हलचल देखी। इस पर उसने ललकारा तो आतंकियों ने ग्रेनेड दागा। इसके बाद दोनों कैंप में घुसने की कोशिश करने लगे, लेकिन जवानों ने उन्हें घेर लिया। इसके बाद शुरू हुई मुठभेड़ में दोनों हमलावरों को मार गिराया गया। छह जवान घायल हुए जिन्हें पास के अस्पताल में ले जाया गया, लेकिन चार जवानों ने दम तोड़ दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रात लगभग दो बजे पहली गोली की आवाज सुनी गई। अंतिम फायरिंग की आवाज सुबह 6.10 पर सुनी गई। एडीजीपी मुकेश सिंह ने बताया कि अतिरिक्त फोर्स मौके पर भेजी गई है। राजोरी में आतंकियों की मूवमेंट की खुफिया सूचना पर दरहाल तथा नौशेरा इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया है।
ये हुए शहीद
सूबेदार राजेंद्र प्रसाद (झूंझूनू, राजस्थान), राइफलमैन लक्ष्मन डी (तमिलनाडु), राइफलमैन (मनोज कुमार, शाहजहांपुर फरीदाबाद-हरियाणा) और राइफलमैन निशांत मलिक(आदर्श नगर, हिसार-हरियाणा)
अंतिम फिदायीन हमला 2019 में हुआ था
पुलवामा के लेथपोरा में 14 फरवरी 2019 को अंतिम फिदायीन हमला हुआ था जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। 22 अप्रैल को जम्मू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने सुंजवां सैन्य शिविर के पास फिदायीन हमले का प्रयास किया था जिसमें सीआईएसएफ के साथ मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए थे। आठ मई को राजोरी के लाम इलाके में एलओसी से घुसपैठ की कोशिश को नाकाम बनाते हुए एक आतंकी को मार गिराया गया था। राजोरी में अप्रैल व मई के महीने में कई विस्फोट हुए। इसमें शामिल लश्कर-ए-तैयाब के मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने पांच आतंकियों को गिरफ्तार किया था। यह इलाके में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के साथ ही पाकिस्तान से ड्रोन के जरिये गिराए जाने वाले हथियारों को कश्मीर घाटी तक पहुंचाते थे।
राजोरी में सैन्य कैंप पर हमले की कड़ी निंदा करता हूं। सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों को श्रद्धांजलि और उनके परिवार के प्रति पूरी सहानुभूति। हम आतंकियों और उनके नापाक इरादे को हर हाल में कुचल डालेंगे।
– मनोज सिन्हा, उप राज्यपाल

