- इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ अब सीएनजी किट वाहनों में भी आएगा बूम
- अब पीएनजी और सीएनजी की पहुंच होगी व्यापक
- 18 हजार सीएनजी स्टेशनों की स्थापना का लक्ष्य
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: देश में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण से सरकार भी फिक्रमंद दिख रही है। र्इंधन वाले वाहनों की अपेक्षा गैर र्इंधन आधारित वाहनों पर सरकार के साथ साथ वाहन निर्माता कंपनियों का अधिक फोकस है। आने वाले 10 सालों में प्रदूषण का स्तर काफी हद तक कम करने के लिए सरकार आम जनता में भी वही सोच विकसित करने का प्रयास कर रही है।
इन्ही सब के मद्देनजर सरकार की अब यही कोशिश है कि भारतीय सड़कों पर जहां इलेक्ट्रिक वाहन सरपट दौड़ें वहीं डीजल व पेट्रोल के स्थान पर सीएनजी आधारित गाड़ियों की अधिकता हो। अब कई वाहन निर्माता कंपनियां अपने शेड्यूल में गैर र्इंधन आधारित वाहनों के नए नए मॉडल पेश कर रही हैं।
वाहन बाजार से जुड़े जानकारों के अनुसार बढ़ते प्रदूषण के कारण खराब हो रही लोगों की सेहत को सुधारने के लिए सरकार अभी से अगले 20 से 25 सालों का खाका खींचने में लगी है। सरकार की कोशिश यह है कि अब घरेलू पीएनजी और वाणिज्यिक सीएनजी का दायरा शहरी क्षेत्रों के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ाया जाए। इसी उद्देश्य से सरकार आगामी 10 सालों के दौरान देश में लगभग 18 हजार सीएनजी स्टेशनों की स्थापना का लक्ष्य मानकर चल रही है।

बताया जाता है कि इनमें से बड़ी संख्या में सीएनजी स्टेशन ग्रामीण इलाकों में भी स्थापित किए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) भी इस काम को तेजी से अंजाम देने में लगा हुआ है। गौरतलब है कि पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है जिससे वाहन चालकों का फोकस अब अपनी पुरानी कारों में भी सीएनजी किट लगवाने पर है
जबकि लगभग सभी कंपनियां अपनी नई गाड़ियों में सीएनजी किट लगाकर दे रही हैं। इन सबके चलते सीएनजी की खपत बढ़नी तय है और सरकार इसी को मद्देनजर रखते हुए सीएनजी स्टेशनों की स्थापना पर जोर दे रही है। आंकड़ों के अनुसार 2014 से पूर्व जहां देश में लगभग 900 सीएनजी स्टेशन हुआ करते थे वहीं मई 2022 तक देश में साढ़े चार हजार से अधिक सीएनजी स्टेशनों की स्थापना हो चुकी है।

