Wednesday, April 22, 2026
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तंग हाल एमडीए खरीदेगा 36 लाख का ड्रोन

  • अवैध निर्माण रोकने के लिए अब आकाश से की जाएगी निगरानी, अवैध निर्माणों पर लगेगी लगाम

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) की आर्थिक स्थिति कुल मिलाकर अच्छी नहीं है। वर्तमान में प्राधिकरण अपनी संपत्ति को बेच कर प्राधिकरण का खर्च चला रहा है, जो आमदनी कंपाउंडिंग और मानचित्र स्वीकृति से होनी चाहिए वह नहीं हो पा रही है, लेकिन ऐसी अवस्था में भी मेरठ विकास प्राधिकरण 36 लाख का ड्रोन खरीदने जा रहा है। कहा जा रहा है कि मेरठ विकास प्राधिकरण अवैध निर्माणों पर निगरानी करने के लिए अब ड्रोन का सहारा लेंगे।

आरंभिक दौर में अवैध निर्माण कितना था? 15 दिन बाद कितना? फिर एक माह बाद अवैध निर्माण कहा पहुंचा? इसकी पूरी रिपोर्ट ड्रोन के जरिए तैयार की जाएगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि मेरठ विकास प्राधिकरण के पास मेट की लंबी फौज है, जिनको अवैध निर्माण रोकने के लिए ही लगाया गया है। बाकायदा वाट्सऐप ग्रुप भी बनाया गया है, जिसमें मेट अपने मोबाइल से फोटो खींचकर डालता है, लेकिन उस पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? यह बड़ा सवाल है।

मैट और इंजीनियरों की पूरी टीम होने के बावजूद मेरठ विकास प्राधिकरण को अवैध निर्माणों की वास्तविकता जानने के लिए ड्रोन पर भरोसा करना होगा, जो अपने कर्मचारी हैं लगता है प्राधिकरण के अधिकारियों का उनसे भरोसा खत्म हो गया है। यही वजह है कि मेरठ विकास प्राधिकरण ने पूरे शहर को चार जोन बाटा है। प्रत्येक जोन में एक-एक ड्रोन लगाया जाएगा, जो किराये पर लिये जाएंगे।

एक ड्रोन खरीदा जाएगा। एमडीए की तंग हाल स्थिति हैं, इसके बावजूद फिर ड्रोन पर लाखों रुपये खर्च करने जा रहा है। अब महत्वपूर्ण बात यह भी है कि मेरठ विकास प्राधिकरण इससे पहले भी शताब्दीनगर में वीसी के आवास के निर्माण को लेकर दुविधा में है। वीसी के आवास पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। अब आर्थिक तंगी के चलते वीसी का आवास भी नीलाम किया जा रहा है, मगर उसकी नीलामी छुड़ाने के लिए कोई तैयार नहीं है।

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ड्रोन का उपयोग सिर्फ अवैध निर्माण रोकने के लिए खरीदना कहा तक सार्थक होगा? यह तो अभी भविष्य के गर्भ में है, लेकिन मेरठ विकास प्राधिकरण के इंजीनियर और मेट की लंबी फौज होने के बावजूद ड्रोन खरीदने का क्या औचित्य हैं? मेट से ही काम लिया जा सकता हैं। यदि मेट काम नहीं कर रहे हैं तो बर्खास्त करने की चेतावनी के साथ उनसे काम लिया जा सकता हैं, ताकि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई हो सके।

फिर मेट की लंबी फौज को वेतन देने का क्या औचित्य बनता है। जब इंजीनियरों और मेट के कंधों पर अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी है और वह कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं तो उन पर गाज क्यों नहीं गिराई जा रही है। तत्कालीन वीसी मृदुल चौधरी ने जब एमडीए वीसी का चार्ज संभाला था तो एक माह तक ताबड़तोड़ कार्रवाई की। नौ मेट निलंबित भी कर दिये थे। तब अवैध निर्माणों पर रोक लग गई थी, लेकिन उनके ही कार्यकाल में फिर इतना अवैध निर्माण हुआ कि तमाम रिकॉर्ड ही टूट गए।

वीसी की भूमिका पर सवाल भी खूब उठे थे। अब कमिश्नर सेल्वा कुमारी जे दो दिन पहले अवैध निर्माण रोकने के लिए इंजीनियरों की क्लास लेकर गई हैं। कमिश्नर ने इंजीनियरों को दो टूक कह दिया कि अवैध निर्माण आगे बढ़ा तो सीधे कार्रवाई की जाएगी। कॉलोनियां दर कॉलोनियां अवैध विकसित की जा रही हैं, इन पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है? इन पर शिकंजा कसने के लिए अब ड्रोन भी चलेगा और एमडीए इंजीनियर और मेट भी तैनात रहेंगे। जो भी झूठ बोलेगा, उसके झूठ को भी ड्रोन पकड़ेगा।

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