- जिम्मेदारों पर क्या होगी सख्त कार्रवाई?
- गुजरान गेट से अशोक की लाट तक अतिक्रमण की हालत खराब, जनहित याचिका दायर की
जनवाणी संवाददाता |
सरधना: नगर के मुख्य बाजार अशोक की लाट से लेकर गुजरान गेट तक अतिक्रमण गंभीर समस्या बना हुआ है। सड़कों पर ही बांसों की स्थाई दुकानें बना ली गई हैं। इसके अलावा नाज सिनेमा के सामने भी फड़ के नाम पर स्थाई दुकानें बड़ी समस्या जनता के लिए बनी हैं, लेकिन नगर पालिका परिषद के अधिकारी हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी आंखें मूंदे हुए हैं। सड़कों पर अतिक्रमण बड़ी चुनौती हैं।
क्या इस समस्या से पालिका परिषद के अधिकारी मुक्ति दिला पायेंगे या फिर अतिक्रमण की समस्या को दूध-घी पिलाकर बड़ा सिरदर्द करते रहेंगे। आम नागरिक द्वारा कोर्ट में जनहित याचिका डाली गई तो पालिका ने इस अतिक्रमण की बात को सीरे से ही नकार दिया है, जबकि धरातल पर हालात बेहद खराब हैं। कुल मिलाकर यह स्थाई अतिक्रमण आमजन के लिए भारी परेशानी का सबब बना हुआ हैं।
अशोक की लाट नगर का मुख्य बाजार माना जाता है। यहां नाज सिनेमा के सामने नगर पालिका द्वार दशकों पहले फड़ों की आवंटन किया गया था, मगर वर्तमान में यह फड़ दुकानों में तबदील क्या हुई कि रोड पर चलने की जगह तक नहीं रही। अस्थाई कब्जा इन दुकानदारों का सड़कों पर हो गया, लेकिन इसे पालिका परिषद के अधिकारी हटाने के लिए तैयार नहीं हैं?
आखिर इस व्यवस्था के लिए जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की जाएगी? हाईकोर्ट की फटकार के बाद पालिका परिषद ने अंगडाई तक नहीं ली हैं। जो शपथ पत्र हाईकोर्ट में लगाये गए हैं, उनको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मौके पर सड़क क्लीन नहीं हैं, फिर शपथ पर कैसे लगा दिया? पहले सड़क की जमीन पर फड़ लगे हैं, फिर उसके आगे दुकान फैला दी जाती हैं।
उसके बाद कस्टमर आकर खड़ी कर देता हैं, जिसके बाद पूरी सड़क जाम हो जाती हैं, मगर पालिका परिषद के अधिकारी इसे कोई समस्या मानने को तैयार नहीं हैं, जिसके चलते बाजार में भीषण जाम की समस्या हर समय बनी रहती है। विकट हालात अशोक की लाट से लेकर गुजरान गेट तक है। पूरे बाजार में अतिक्रमण की हालत यह है कि सड़क पर बांसों की स्थाई दुकानें बना ली गई हैं।
इसमें पालिका परिषद के अधिकारी अतिक्रमण के लिए लोगों को संरक्षण दे रहे हैं। सड़क के नाम पर संक्रा रास्ता रह गया है, जो कभी खुला-खुला था, वर्तमान में यहां पर पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया हैं, जिसके चलते यहां रोजाना जाम की समस्या बनी रहती है। ऐसे में राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मामले को लेकर हाल ही में श्यामबोल तोमर ने इस समस्या को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट ने 15 दिन के भीतर पालिका परिषद से सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कर रिपोर्ट मांगी थी। अतिक्रमण तो नहीं हटा, लेकिन पालिका परिषद ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र देकर यह दावा कर दिया कि सड़कों को अतिक्रमण से मुक्त कर दिया गया हैं। पालिका परिषद के इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं। हाईकोर्ट में झूठा शपथ पत्र देकर पालिका परिषद के अधिकारियों की खुद गर्दन फंस गई हैं, मगर पालिका ने अतिक्रमण और कब्जों की बात को शपथ पत्र में नकार दिया है, जबकि मौके पर हालात विकट हैं।

