- दंगे से पूर्व दिया था भड़काऊ भाषण, कोर्ट ने सुनाई थी दो साल की सजा
जनवाणी संवाददाता |
मुजफ्फरनगर: दंगे में भड़काऊ भाषण मामले में खतौली विधानसभा सीट से भाजपा विधायक विक्रम सैनी को दो वर्ष की सजा के बाद अब उनकी विधानसभा की सदस्यता खत्म हो गई है। यह सीट विधानसभा स्तर से रिक्त घोषित करके यहां उपचुनाव किये जाने की तैयारियां है। यह उस समय सम्भव हो पाया जब रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने इस मामले को सोशल मीडिया के जरिये प्रमुखता से हटाया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को खुला पत्र लिखकर र्कावाई की मांग की। हालांकि पत्र जारी होने के बाद विधायक विक्रम सैनी ने जयंत चौधरी का मखौल उ़ाते हुए लिखा था कि इन्हें जानकारी कम है। पहले अपनी जानकारी दुरूस्त कर लें, लेकिन अब एक ही झटके में विधायक की सदस्यता जाने के बाद रालोद समर्थक अपने टवीर हैंडल से विधायक का मजाक बना रहे है।
गौरतलब है कि वर्ष 2013 के दंगे में जिला पंचायत के तत्कालीन सदस्य एवं वर्तमान में खतौली से विधायक विक्रम सैनी को नामजद किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने भड़काऊ भाषण दिये, जिसकी वजह से दंगा भड़क उठा था। दंगे की चिंगारी कवाल से उठी थी, उस समय विक्रम सैनी ग्राम कवाल के प्रधान भी थ्ो। उस समय पुलिस ने आरोपी विक्रम सैनी के खिलाफ चार्जशीट लगाई थी और उन्हें जेल भी जाना प़डा था। इस मामले में खतौली के भाजपा विधायक विक्रम सैनी समेत 11 अन्य लोगों को हेटस्पीच का दोषी मानते हुए दो साल की सजा सुनाई गई थी। इसके कुछ दिन बाद रामपुर के सपा विधायक आजम खान को इसी तरह के एक हेट स्पीच के मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समा कर दी गई और रामपुर सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया। हालांकि इससे पूर्व विक्रम सैनी को सजा हो चुकी थी, मगर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया, जिसको लेकर जयंत चौधरी ने सवाल ख़े किये। उन्होंने लिखा था कि विधानसभा अध्यक्ष ने 24 घंटे बीतने से पहले ही आजम खान को अयोग्य करार दे दिया।
विक्रम सैनी की सदस्यता पर निर्णय कब होगा। राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने विधानसभा अध्यक्ष को एक चिट्ठी लिखी थी। जिसमें उन्होंने सवाल किया था कि दो साल और उससे ज्यादा की सजा पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि विधायक और सांसद की सदस्यता स्वतः समा हो जाएगी और उसी आधार पर आजम खान की सदस्यता समा की गई है। तो विक्रम सैनी की सदस्यता क्यों नहीं समा की गई ? जिसके बाद यह मामला गर्मा गया था । शुक्रवार को लखनऊ से इस सम्बंध में जानकारी दी गई कि विक्रम सैनी को अयोग्य घोषित किया गया है। खतौली विधानसभा सीट अब रिक्त हो गयी है। जिस पर शीघ्र ही उपचुनाव कराया जाएगा।
मुझे नहीं है इसकी जानकारी: विक्रम सैनी
विधायक विक्रम सैनी ने कहा कि उन्हें इस तरह के किसी आदेश की कोई जानकारी नहीं है ,उन्हें ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है। इसी बीच विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना के शुक्रवार को लखनऊ से बाहर होने के कारण उनसे कोई पुष्टि नहीं की जा सकी है। उनके कार्यालय ने बताया कि उनके यहाँ से ऐसा लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है लेकिन कानूनविदों का मानना है कि दो साल या ज्यादा की सजा पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता स्वतः समा हो जाएगी , विधानसभा सचिवालय को केवल विधानसभा इलाके की रिक्ति की ही अधिसूचना जारी करनी होती है।
क्या कहते हैं कानून के जानकार
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील मदन शर्मा का कहना है कि हां, विक्रम सैनी की सदस्यता खत्म की जानी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि उच्चतम न्यायालय ने लिली थॉमस वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया के मामले में 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा प्रा करने पर यह प्रावधान लागू कर रखा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल जिंदल ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 के सेक्शन 8 के उप सेक्शन 3 में यह प्रावधान है कि यदि किसी सांसद या विधायक को 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से समा हो जाएगी, लेकिन इसी धारा के उप सेक्शन 4 में यह प्रावधान था कि यदि 3 महीने के तर कोई उच्च अदालत स्थगन आदेश जारी कर दे तो सदस्यता पर कोई प्रभाव नहीं प़ेगा, लेकिन लिली थॉमस अधिवक्ता एवं लोक प्रहरी के सचिव एसएन शुक्ला की जनहित याचिका पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 10 जुलाई 2013 को पारित अपने निर्णय में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 की उप धारा 4 को ही खत्म कर दिया है, जिसके कारण अब धारा 3 के तहत 2 वर्ष से अधिक की सजा पर तत्काल सदस्यता स्वतः समा हो जाएगी। कोर्ट ने इन दागी प्रत्याशियों को एक राहत जरूर दी थी कि सुप्रीम कोर्ट का कोई भी फैसला इनके पक्ष में आएगा तो इनकी सदस्यता स्वतः ही वापस भी हो जाएगी।
जयंत ने मामला उठाया तो हो गई र्कावाई
हेट स्पीच मामले में जैसे ही रामपुर विधायक आजम खान को सजा हुई, अगले दिन ही विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय से उन्हें अयोग्य घोषित करने का पत्र जारी हो गया। यहां तक कि कईं स्थानों पर लिपिकीय त्रुटि भी थी। विधानसभा का नाम भी गलत लिखा गया था, जिसको लेकर सोशल मीडिया पर सुर्खियां बनी। टवीटर हैंडल पर कुछ लोगों ने लिखा कि जल्दबाजी में विधानसभा भी गलत लिख दी गई। आजम मामले के बाद अगले दिन ही रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी भी एक्टिव हो गये और उन्होंने खुला पत्र लिखकर सरकार को राजधर्म का अहसास कराया। उन्होंने लिखा कि कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए। अगर आजम खान की सदस्यता गई है, तो विक्रम सैनी पर करम क्यों किया जा रहा है। तीन दिन तक यह मामला लखनऊ में गूंजता रहा। आखिरकार अब इस पर फैसला आया, जिसमें स्पष्ट हो गया कि विक्रम सैनी विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य है। इसी के साथ उनकी सीट रिक्त घोषित करके यहां उपचुनाव की प्रक्रिया शुरु हो जायेगी।
उपचुनाव में बसपा की गैरमौजूदगी खिलायेगी गुल
खतौली सीट पर विधानसभा का चुनाव होता है, तो यहां बसपा प्रत्याशी नहीं ख़ा कगी। इससे पहले लखीमपुर खीरी की गोला विधानसभा सीट पर भी बसपा ने अपना प्रत्याशी ख़ा नहीं किया था। बसपा की पॉलिसी के मुताबिक यहां किसी भी पार्टी को समर्थन नहीं होगा। हालांकि स्थानीय बसपा नेताओं का कहना है कि बहन जी के आदेश की प्रतिक्षा रहेगी। हाईकमान का जो भी आदेश होगा, उसका अनुपालन किया जायेगा।
पहले भी सपा व भाजपा की हुई थी सीधी भिंडत
2022 के विधानसभा चुनाव में विधायक विक्रम सैनी निर्वाचित हुए थ्ो। यहां उन्हें लगभग एक लाख सात हजार मत मिले थ्ो। दूस स्थान पर समाजवादी पार्टी के राजपाल सिंह सैनी रहे थ्ो। उन्हें लगग 85 हजार मत मिले थ्ो। बसपा के करतार सिंह भड़ाना को लगभग 30 हजार मतों पर ही संतोष करना प़डा था। हालांकि इससे पूर्व हुए विधानसभा चुनाव में यहां राष्ट्रीय लोकदल के सिम्बल पर करतार सिंह भड़ाना ही निर्वाचित हुए थ्ो। इस बार सपा व रालोद के गठबंधन से राजपाल सैनी ल़े तो वे अपने पाले में कईं जातियों के मत खींचने में नाकाम हुए, इसका नुकसान यह हुआ कि यहां विपक्ष बिखर गया। मुस्लिम समाज का एक ब़ा हिस्सा बसपा को मिल गया। इसके चलते भाजपा प्रत्याशी की जीत हुई।
वेस्ट में था भाजपा का विरोध, फिर भी खिला था कमल
खतौली विधानसभा सीट के कुछ गांव भाकियू प्रभावित माने जाते है, जिसके चलते माना जा रहा था कि खतौली सीट पर भी भाजपा को काफी नुकसान होगा। यहां 26 हजार से अधिक जाट मत भी है, लेकिन जपा प्रत्याशी को संजीव बालियान इफेक्ट के चलते जाट मतों का एक ब़ा हिस्सा मिल गया था। इसका लाभ यह हुआ कि वेस्ट में भाजपा के विरोध के बावजूद भी खतौली सीट पर कमल खिल गया था।

