Thursday, March 26, 2026
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सीईओ ने सदस्यों से पहली ही मुलाकात में छेड़ दी दुखती रग

  • बंगलों का जिक्र छेड़कर सदस्यों की चाय की प्याली में खड़ा कर दिया तूफान

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पहली ही मुलाकात में सीईओ कैंट नावेन्द्र नाथ ने बोर्ड के कुछ सदस्यों की दुखती हुई रंग पर हाथ रख दिया। हाथ ही नहीं रखा उसको थोड़ा दबा भी दिया। हालांकि मुलाकात अनौपचारिक थी, लेकिन कुछ ऐसी बातों का जिक्र छिड़ गया जिससे बोर्ड सदस्यों की चाय की प्याली में तूफान नजर आने लगा।

कैंट बोर्ड के तमाम सदस्य जिस घड़ी इंतजार कर रहे थे गुरुवार की शाम को वो घड़ी आ गयी। नावेन्द्र नाथ के बतौर सीईओ कैंट का चार्ज लेने के बाद बोर्ड के तमाम सदस्य मुलाकात के लिए उताबले थे। जानकारों की मानें तो कुछ ने तो पहली मुलाकात के लिए संदेश भी भिजवाया था।

यह बात अलग है कि मुलाकात मुककिन नहीं हो सकी, लेकिन गुरुवार को वो घड़ी आ गयी जिसका सभी को बेताबी से इंतजार था। सीईओ की ओर से बोर्ड के सभी आठों सदस्यों को मुलाकात का न्योता भेजा गया। सदस्यों की तो हालत ऐसी थी कि मानों उन्हें मुंह मांगी मुराद मिल गयी हो।

तय शुदा कार्यक्रम के मुताबिक कैंट बोर्ड पहुंच गए। इनमें रिनी जैन, बुशरा कमाल, वीना वाधवा, नीरज राठौर, अनिल जैन, मंजू गोयल, धर्मेंद्र सोनकर व उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी भी शामिल रहे। सीईओ नावेन्द्र नाथ ने भी सभी सदस्यों का गर्मजोशी से स्वागत किया। सदस्यों का स्वागत सत्कार किया।

कैंट बोर्ड की समस्याओं पर अनौपचारिक बातचीत की। कुछ सदस्यों ने समस्याओं को गिनवाया और सभी ने मिलकर काम करने की बात कही। बताया जाता है कि सीईआ कैंट भी सदस्यों से मुलाकात को लेकर खासे उत्साहित दिखाई दिए। इसी बातचीत में अचानक सीईओ ने छावनी स्थित बंगलों के रिज्मशन का जिक्र छेड़ दिया।

बताते हैं कि शायद ऐसे जिक्र की पहली मुलाकात में कुछ सदस्यों ने उम्मीद नहीं की थी। बंगलों का जिक्र छिड़ते ही मुंह का स्वाद ही कसैला हो गया। बताया जाता है कि यहां तक संकेत दिया गया कि बंगले तो रिज्यूम होने हैं। कैंट बोर्ड के कुछ सदस्य इन दिनों बंगलों को लेकर खासे चर्चा में हैं।

विपिन सोढ़ी के बंगले की फाइल भी कतार में

कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी का बंगले के रिज्मशन की फाइल तो काफी आगे बढ़ चुकी भी बतायी जाती है। जानकारों की मानें तो नावेन्द्र नाथ का मेरठ छावनी को लेकर खासतौर से छावनी क्षेत्र में पड़ने वाले भारत सरकार की संपत्ति तमाम ओल्ड ग्रांट के बंगलों पर उनका खासा होमवर्क व विशेष जानकारी भी है।

बंगलों पर है फुल एंड फाइनल होम वर्क

इसकी वजह पूर्व में साल 2014 के दौरान बतौर रक्षा संपदा अधिकारी उनका कार्यकाल है। जहां तक बंगलों की बात है या उनके रिज्मशन की कार्रवाई की बात है अथवा छावनी क्षेत्र के बंगलों में इन दिनों जो कुछ लूटपाट मची है माना जा रहा है कि कम से कम नावेन्द्र नाथ उसको लेकर तनिक भी अनभिज्ञ नहीं होंगे।

ये बात अलग है कि इसकी जानकारी को वो जाहिर न होने दें, लेकिन यह तय है कि बंगलों को लेकर बोर्ड के सदस्यों के खेल की जानकारी जरूर उन तक पहुंच रही है। पहली ही मुलाकात में बोर्ड सदस्यों के बीच बंगलों और रिज्यूम का जिक्र करने की बात का अब निहितार्थ भी तलाशे जा रहे हैं।

सदस्यों की चाय की प्याली में तूफान

बंगलों का जिक्र बातों बातों में गया हो या फिर टी पार्टी में चाय की प्याली तूफान खड़ा करने के लिए किया गया हो, लेकिन जो भी सदस्य बंगलों को लेकर इन दिनों चर्चा में हैं उनकी नींद जरूर उड़ गयी है। बंगलों के अलावा बातचीत में जनवरी में कैंट बोर्ड के चुनाव के भी संकेत दिए। हालांकि बोर्ड के कुछ सदस्यों ने साल 2022 में चुनाव की बात कही। सीईओ से मुलाकात के बाद तमाम बोर्ड सदस्य खासे उत्साहित नजर आए।

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