- स्पोर्ट्स कारोबारियों को मोदी सरकार के अंतिम बजट से थी काफी उम्मीदें
- आनलाइन दवा व्यापार से प्रभावित दवा कारोबारियों बजट से थी खासी उम्मीद
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार का अंतिम बजट पेश किया। जिसमें खेल कारोबार से जुड़े व्यापारियों को निराशा हाथ लगी। कोरोना काल के बाद बढ़े आॅनलाइन दवा व्यापार की वजह से मंदी की मार झेल रहे कारोबारियों को बजट से निराशा हुई है। व्यापारियों ने अंतिम बजट पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है।
अनुज सिंघल: स्पोर्ट्स कारोबारी का कहना है मेरठ के बने स्पोर्ट्स गुड्स की पूरी दुनिया में अलग पहचान है। लगभग 180 देशों में यहां बना सामान निर्यात होता है। वहां दूसरे देशों जैसे इंडोनेशिया, चाईना, पाकिस्तान व बांग्लादेश जैसे देशों से मुकाबला है।
रविंद्र सिंह: बजट में स्पोर्ट्स के लिए सरकार ने कोई पैकेज नहीं दिया है। स्पोर्ट्स एक आवश्यक चीज है, सभी को अपने शरीर का विकास करने के लिए इसकी जरूरत है।
दीपक तलवार: बजट में स्पोटर्स इक्यूपमेंट के लिए कुछ नहीं किया गया। सौ प्रतिशत चुनावों को फोकस करने वाला बजट है। सिर्फ किसानों को ही आगे रखकर बजट तैयार किया गया है। खेल कारोबारियों के लिए कुछ नहीं सोचा गया। हमारे यहां क्रिकेट का सबसे उम्दा सामान तैयार होता है।
इकबाल सिंह: हर बार की तरह इस बार भी बजट में निराशा ही हाथ लगी है। हमे काफी उम्मीद थी कि सरकार इस बार स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के लिए कुछ अच्छा करेगी लेकिन अंत में सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। मेरठ को स्पोटर्स सिटी कहा जाता है, लेकिन यहां के व्यापारियों को बजट में निराशा ही मिली है।
विष्णु: खैरनगर दवा मार्केट में दुकान करने वाले कारोबारी विष्णु का कहना है सरकार से काफी उम्मीद थी कि इस बार उन्हें कुछ राहत मिलेगी। कुछ समय पहले दवाइयों की कीमतें कम करने के लिए सरकार ने एडवाइजरी जारी की थी। जिसे उसकी समय लागू कर दिया गया, लेकिन इससे हमे और नुकसान हुआ।
अकरम गाजी: हापुड़ अड्डे पर दवा का कारोबार करने वाले अकरम का कहना है बजट से काफी उम्मीद थी लेकिन वह पूरी नहीं हो सकी। दवा कारोबारियों को उम्मीद थी कि दवाईयां तैयार करने के लिए जिस माल की जरूरत होती है वह सस्ता होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस बजट से दवा व्यापारियों को कोई लाभ नहीं हुआ, आॅनलाइन मार्केटिंग से सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है।
महेशचन्द्र गुप्ता: खैरनगर में दवा कारोबार करने वाले महेश का कहना है सरकार कुछ नए प्रोडक्ट्स लाई है जिससे हमारा मार्जिन कम हो गया है। पहले के मुकाबले अब दो प्रतिशत मार्जिन कम हो गया है जिसे पूरा करने के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। हालांकि सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब में बढ़ोत्तरी की है लेकिन इससे हमे कुछ ज्यादा लाभ होनें वाला नहीं है।
मनोज गुप्ता: बच्चापार्क पर दवा का कारोबार करने वाले मनोज का कहना है हमे इस बजट से काफी उम्मीदें थी लेकिन मिला कुछ नहीं। पिछले तीन सालों से कोरोना काल में हमारा काफी नुकसान हुआ, पहले ढाई लाख पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था। लेकिन अब तीन लाख पर टैक्स देना होगा। यानी सरकार ने पचास हजार का दायरा बढ़ाया है जो ऊंठ के मुंह में जीरे के समान है। पहले पांच लाख तक की सेविंग करने पर कोई टैक्स नहीं था जिसे अब बढ़ाकर छह लाख कर दिया है। अब छह लाख पर भी दवा व्यापारियों को 15 हजार तो देनें पड़ रहें है।

