Tuesday, April 21, 2026
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होलिका दहन पर नहीं भद्रा का साया

  • उदया तिथि के मुताबिक होलिका दहन सात को
  • होली पर 30 साल बाद शनि और गुरु स्वराशि में, बन रहा त्रिग्रही योग

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: इस बार होलिका दहन को लेकर भ्रम की स्थिति बन रही है। क्योंकि कुछ पंचागों में होलिका दहन 6 मार्च को बताया जा रहा है तो कुछ पंचागों में होलिका दहन 7 मार्च को बताया जा रहा है। हालांकि इस बार होलिका दहन पर भद्रा काल का साया नहीं है। बेशक होलिका का दहन 6 मार्च को हो या फिर 7 मार्च को। यदि होलिका का दहन फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 6 मार्च को करते हैं तो होलिका दहन का मुहूर्त शाम 4 बजकर 18 मिनट के बाद शुरू होगा।

इसके साथ ही यदि 7 मार्च को होलिका को करते हैं तो समय शाम 6 बजकर 10 मिनट के बाद रहेगा। हालांकि उदयातिथि के मुताबिक होलिका दहन का त्योहार 7 मार्च को ही मनाया जाएगा। अक्सर त्योहारों पर भद्रा काल का साया रहता हैं, लेकिन इस बार होलिका दहन पर भद्राकाल का साया नहीं रहेगा। इसलिए इस बार होलिका दहन समय पर हो जाएगा।

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ज्योतिषाचार्यों अमित गुप्ता के अनुसार इस बार होलिका दहन 7 मार्च मंगलवार को है। वहीं भद्रा काल का मुहूर्त 6 मार्च 2023 को सायं 4:48 मिनट से लगेगा और 7 मार्च 2023 को प्रात: 5:14 मिनट पर समाप्त हो जाएगा तो इस हिसाब से पंचांग के अनुसार इस बार होलिका दहन पर भद्रा का साया नहीं है।

होलिका दहन मुहूर्त

होलिका दहन के लिए 7 मार्च को सायं 6 बजकर 31 मिनट से रात्रि 8 बजकर 58 मिनट तक शुभ मुहूर्त है। इस बार होलिका दहन के लिए 2 घंटे 7 मिनट तक का समय मिलेगा। इसलिए इस बार होलिका दहन समय पर हो जाएगा।

30 साल बाद शनि और गुरु स्वराशि में

होलिका दहन का पर्व हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस बार होली पर ग्रहों का अजब संयोग है। गुरु और शनि अपनी स्वराशि में हैं। ऐसा 30 साल बाद हो रहा है, जब शनि होली पर कुंभ और 12 साल बाद देव गुरु बृहस्पति स्वरा मीन में विराजमान हैं। इसके अलावा कुंभ राशि में त्रिग्रही योग बना रहेगा। इसका मतलब है कि कुंभ राशि में बुध, सूर्य और शनि बैठे हैं।

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