- इस सोलर पावर प्लांट से हर साल 25000 यूनिट बिजली पैदा होगी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: रैपिड ट्रेन जहां यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंच जाएगी वहीं बिजली का उत्पादन भी करेगी। इसके लिए रैपिड के पहले सोलर पावर प्लांट ने काम शुरू कर दिया है। इससे बिजली का उत्पादन शुरू हो गया है। अब इस पावर प्लांट से हर साल 25000 यूनिट बिजली पैदा की जा सकेगी। रैपिड अधिकारियों के अनुसार दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर के लिए पहले सोलर पावर प्लांट से बिजली उत्पादन शुरू हो गया है।
अधिकारियों के अनुसार यह सोलर पावर प्लांट गाजियाबाद रिसीविंग सब स्टेशन (आरएसएस) की छत पर लगाया गया है। इसकी छत पर कुल 54 सोलर पैनल लगाए गए हैं। गाजियाबाद आरएसएस की छत पर लगे इन सोलर पैनल से हर साल करीब 25000 यूनिट बिजली पैदा की जा सकती है। सौर ऊर्जा संयंत्रों से उत्पन्न ऊर्जा का उपयोग एनसीआरटीसी द्वारा रेस्को मॉडल के तहत किया जा रहा है।

इस एनसीआरटीसी अधिकारियों के अनुसार उत्पन्न बिजली का उपयोग स्टेशनों और भवनों की सहायक खपत को पूरा करने के लिए किया जाना है। गाजियाबाद आरएसएस से बिजली की आपूर्ति शुरू हो गई है और स्थानीय आवश्यकता को पूरा करने के लिए उपयोग भी की जा रही है। रैपिड अधिकारियों ने यह भी बताया कि एनसीआरटीसी दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर के स्टेशनों और इमारतों की छत पर लगभग 11 मेगावाट संभावित सौर ऊर्जा उत्पन्न करेगा।
अनुमान है कि इन संयंत्रों से लगभग 10 मिलियन यूनिट सौर ऊर्जा उत्पन्न होगी, जिसका उपयोग एनसीआरटीसी द्वारा स्टेशनों और भवनों की सहायक खपत को पूरा करने के लिए किया जाएगा। एनसीआरटीसी ने कुल ऊर्जा का लगभग 70% प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। अक्षय ऊर्जा स्रोतों से आरआरटीएस कॉरिडोर के स्टेशनों, डिपो और अन्य स्थानों पर सोलर पैनल लगाने का कार्य चल रहा है।

गौरतलब है कि आरआरटीएस ट्रेनें अत्याधुनिक रेजेनेरटिंग ब्रेकिंग सिस्टम से लैस हैं, जो ब्रेकिंग के दौरान ट्रेन की गतिज ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती हैं। इसके अलावा सभी आरआरटीएस स्टेशनों और उनके परिसरों, डिपो, कार्यालयों और ट्रेनों में ऊर्जा की बचत करने वाली एलईडी लाइटें लगाई जाएंगी। प्रत्येक आरआरटीएस स्टेशनों पर प्लेटफार्म स्क्रीन दरवाजे लगाए जाएंगे जो भूमिगत स्टेशनों में महत्वपूर्ण ऊर्जा खपत को बचाने में मदद करेंगे।

