- पसारों में लगाई गई लाखों कच्ची र्इंटें हुर्इं बर्बाद, भराई में भी बड़े पैमाने पर र्इंटों की तबाही
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मार्च के मध्य हुई तेज बारिश ने गेहूं, सरसों के साथ कई फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ र्इंट भट्ठों को भी बड़े पैमाने पर क्षति पहुंचाई है। जनपद में मौजूद 170 भट्ठों पर करोड़ों रुपये की कच्ची और भराई में लगाई गई र्इंटें पानी में मिलकर मिट्टी बन गई हैं। जनपद र्इंट निर्माता समिति के अध्यक्ष केपी सिंह का कहना है कि एक भट्ठे पर कम से कम 10 लाख रुपये या इससे कहीं अधिक का नुकसान हुआ है। केपी सिंह का कहना है कि पसारों में कच्ची र्इंट 1500 रुपये प्रति हजार की दर से लेबर के साथ पड़ती हैं।
एक-एक भट्ठे पर पांच से 10 लाख तक कच्ची र्इंटें पसारों में मौजूद रहीं। जिनको एक दिन पहले हुई बारिश ने तबाह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उनका कहना है कि भट्ठे में एक बार रोशनी (आग प्रज्ज्वलित) करने में दो से तीन लाख रुपये खर्च हो जाते हैं। बरसात के कारण अधिकांश भट्ठे बैठ जाने से जहां लाखों की र्इंटें तबाह हुई हैं, वहीं रोशनी दोबारा करने और भराई करने में आर्थिक नुकसान के साथ-साथ 20-25 दिन का समय भी हाथ से निकल जाने वाला है।

समिति के महामंत्री पवन मित्तल का कहना है कि जनपद में र्इंट-भट्ठों की संख्या 170 के करीब है। जिनमें पसारों के साथ-साथ भराई करके र्इंटों को पकाने का काम मार्च माह में ही रोशनी करके शुरू किया गया है। अभी र्इंटों की पकाई हो भी नहीं सकी थी, कि भारी बरसात ने सारी मेहनत और उम्मीदों को मिट्टी में मिला दिया है। एक-एक र्इंट भट्ठे पर 10 लाख से अधिक की क्षति का अनुमान है। करनावल निवासी भट्ठा स्वामी और समिति के मंत्री मनीष चौधरी का कहना है कि इस बेमौसम की बारिश ने सैकड़ों भट्ठा मालिकों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति पैदा कर दी है।
लाखों की संख्या में पसारों में मौजूद र्इंटें बरबाद हुई हैं। इसके साथ-साथ मजदूर भी कम से कम एक महीने के लिए बेरोजगार हो गए हैं। उनके सामने भी रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। समिति के प्रेस प्रवक्ता अजय मित्तल का कहना है कि दो दिन की बारिश से 170 भट्ठे वालों को करीब 25 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। अभी एक मार्च से भट्ठे शुरू हुए थे। कच्ची र्इंटें खुले खेतों मे बनाकर सुखाई जाती हैं। कच्ची र्इंटें एक भट्ठे पर आठ से 10 लाख तक पसारों में सूखती हैं, लेकिन तेज बारिश हो जाने के कारण पसारों की र्इंटें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं।
इधर सरकार ने कोयले पर प्रतिबंध लगा रखा है। जिस कारण भट्ठों पर सरसों की तुड़ी व लकड़ी जलाई जाती है। बारिश से यह र्इंधन भी भीग जाने के कारण जलाने योग्य नहीं बचा है। एनजीटी ने 30 जून तक भट्ठे चलाने की अनुमति दे रखी है। जिसमें से मार्च का एक महीना बारिश के कारण खराब हो गया हो जाने के कारण भट्ठों पर र्इंट का उत्पादन बहुत कम होगा। जिस कारण भट्ठा व्यापारी बर्बादी की कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि भट्ठों का समय भी बढ़ाते हुए उन्हें आर्थिक मदद भी दी जाए।

