जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: साल 2018 के राशन कार्ड घोटाले में फंसे अफसरों को बचाने तथा इसका ठीकरा डीलरों पर फोड़ने की तैयारी की जा रही है। सीएम के निर्देश पर लखनऊ से आयी एसआईटी की टीम ने राशन कार्ड घोटाले में आपूर्ति विभाग के तत्कालीन अफसरों को चिह्नित किया था।
साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर कराए जाने के निर्देश दिए थे। एसआईटी ने मेरठ में करीब 52 हजार ऐसे राशन कार्ड भी पकडे थे जो अवैध थे। बड़ी संख्या में ऐसे भी राशन कार्ड पकडेÞ गए थे जो अपात्र के बना दिए गए थे।
राशन कार्ड घोटाले की शिकायत पूर्व विधायक भाजपा नेता डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने की थी। उसके बाद ही यहां एसआईटी भेजी गयी थी। जिस वक्त का यह पूरा मामला है उस दौरान मेरठ में बतौर डीएसओ विकास गौतम व एआरओ नरेन्द्र, सप्लाई इंस्पेक्टर रविन्द्र व अशाराम भी तैनात थे।
इस मामले को लेकर इनकी भूमिका की खासी चर्चा भी रही है। सूत्रों की मानें तो एसआईटी के मेरठ आने के बाद भी सेटिंग के नाम पर जिला भर के राशन दुकान के डीलरों से एक अच्छी खासी रकम जमा की गयी थी। उस रकम का क्या किया गया, इस पर कोई बोलने को तैयार नहीं, लेकिन राशन डीलर रकम जमा किए जाने की बात को बार बार उठाते हैं।
एसआईटी के मेरठ से लखनऊ लौटने के बाद तथा बाद के अफसरों के कार्यकाल में भी यह मामला दबा रहा, लेकिन अब एक बार फिर राशन कार्ड घोटाले का जिन्न बोतल से बाहर आ गया है। शासन ने राशन कार्ड घोटोले के आरोपियों के खिलाफ एफआईआर के निर्देश दिए हैं।
पता चला है कि इस मामले में केवल डीलरों की बलि चढ़ाने की तैयारी है। जो स्क्रिप्ट तैयार की जा रही है उसमें आपूर्ति कार्यालय के किसी अधिकारी का नाम शामिल नहीं किया गया बताया जाता है।
इस संबंध में डीएसओ नीरज सिंह ने बताया कि राशन कार्ड घोटाले के संबंध में शासन के निर्देशानुसार कार्रवाई की तैयारी है। शीघ्र ही घोटाले के आरोपियों पर एफआईआर करायी जाएगी।

