- आसिफाबाद चौकी से मात्र एक किमी की दूरी पर बने डेरों में बिकती है मौत
जनवाणी संवाददाता |
परीक्षितगढ़: खादर क्षेत्र को अवैध कच्ची शराब का गढ़ कहा जाने लगा है। यहां पर प्रतिदिन हजारों लीटर शराब बनाई जाती है और आसपास के गांवों में गंगा के रास्ते सप्लाई होती है। पुलिस और आबकारी टीम की कार्रवाई केवल रस्म अदायगी तक ही सीमित है। जिस कारण ये गोरखधंधा कुटीर उद्योगों की तरह फैल रहा है।
लेकिन पुलिस व आबकारी टीम मौन धारण किए हुए है। जिला पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही खादर में अवैध कच्ची शराब का गोरखधंधा रफ्तार पकड़ने लगा है। जिस कारण शराब माफिया गंगा किनारे भट्ठिया लगाकर हजारों लीटर कच्ची शराब बना रहे हैं तथा डेरों पर खुलेआम कच्ची जहरीली शराब की बिक्री हो रही है।
स्थानीय पुलिस बेखबर नजर आ रही है। ऐसा नहीं है कि पुलिस व आबकारी टीम द्वारा कार्रवाई नहीं होती है, लेकिन मात्र भट्ठिया व लाहन नष्ट कर रस्म अदायगी कर वापस लौट आती है, लेकिन छापेमारी में पुलिस और आबकारी टीम के हत्थे शराब तस्कर और शराब माफिया नहीं चढ़ते हैं।
गांवों में हो रही शराब की डिमांड
खादर क्षेत्र में बनाई जा रही अवैध कच्ची शराब की डिमांड इतनी बढ़ रही है कि माफियों को अब दिन-रात कच्ची शराब बना रहे हैं तथा गांव अगवानपुर, नीमका, झब्बापुरी, कुंड़ा, वीर नगर, डब्ल सुल्तानपुर, खरखाली, वीरनगर, परीक्षितगढ़ नहर झाल पर कच्ची शराब की खुलेआम बिक्री हो रही है।
छापेमारी की सूचना लीक
वर्षों से यहां पर अवैध कच्ची शराब बनाई जाती है, लेकिन स्थानीय पुलिस की सांठगांठ के चलते छापेमारी से पहले सूचना लीक हो जाती है। शराब माफिया पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ते हैं। पुलिस कार्रवाई के नाम पर कुछ भट्ठियों व लाहन को नष्ट कर वाहवाही बटोर लेने का काम करती है।
चौकी के एक किमी के दायरे में बिक्र रही शराब
लोगों ने बताया कि आसिफाबाद पुलिस चौकी के मात्र एक किमी के दायरे में कच्ची शराब की बिक्री हो रही है। आसपास के गांवों के लोगों ने कई बार पुलिस से शिकायत कर कच्ची शराब की बिक्री बंद कराने की मांग कर चुके हैं, लेकिन पुलिसकर्मी की सरपस्ती में अवैध जहरीली शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
एसडीएम पर हमला कर चुके शराब मफिया
खादर क्षेत्र में गंगा किनारे व गन्ने के खेत में कच्ची शराब तैयार की जाती है। पुलिस और आबकारी टीम के पहुंचने पर शराब माफिया नाव में बैठकर गंगा से उस पार पहुंच जाते हैं, लेकिन पुलिस पकड़ने के प्रयास के बजाय उन्हें जाते हुए देखती रहती है। कुछ माह पूर्व एसडीएम ने शराब माफियाओं को पकड़ने के लिए नाव का सहारा लिया था तो शराब माफियाओं ने उन पर हमला कर नाव तोड़ दी थी।

