
दुनिया के ग्लेशियर जिस तेजी से पिघल रहे हैं या यों कहें कि वे खत्म हो रहे हैं, वह भयावह आपदाओं का संकेत है। दुनिया के वैज्ञानिकों ने आशंका जतायी है कि जलवायु परिवर्तन की मौजूदा दर यदि इसी प्रकार बरकरार रही तो इसमें कोई दो राय नहीं कि इस सदी के अंत तक दुनिया के दो तिहाई ग्लेशियरों का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा। यह आशंका वैज्ञानिकों ने अपनी सोच से भी ज्यादा तेजी से पिघल रहे ग्लेशियरों के कारण उनके खत्म होने की स्थिति के अध्ययन के उपरांत व्यक्त की है। उनके अनुसार यह भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। असलियत में हम कहें कुछ भी, लेकिन यह कटु सत्य है कि हम दुनिया के बहुत सारे ग्लेशियरों को खोते चले जा रहे हैं। दुख तो इस बात का है कि इस खतरे के प्रति हमारा मौन समझ से परे है। जबकि हमारे पास ग्लेशियरों के पिघलने को सीमित करने की और उसमें अंतर पैदा करने की क्षमता है।