Sunday, March 22, 2026
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भागवत से मिलती है भक्ति की भव्यता: स्वामी ओमानंद

जनवाणी संवाददाता |

मोरना: भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ के विट्ठल भवन तथा प्रत्यक्षानंद भागवत भवन में आयोजित श्रीमद भागवत कथाओं का पीठाधीस्वर स्वामी ओमानंद जी महाराज ने दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर आशीर्वचन में स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में भक्ति को उपासना का प्राण माना गया है और योग को उपासना का शरीर जिस तरह प्राण के बिना शरीर रह नहीं सकता उसी तरह भक्ति बिना उपासना हो नहीं सकती।

अनन्या भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ भक्ति है। अनन्या अर्थात आपने आराध्य परमात्मा का निरंतर ध्यान चिंतन और मनन यह अनन्या भक्ति के साधन हैं। कलियुग में परमात्मा को प्राप्त करने का सर्वोत्तम साधन भक्ति है। तीनों सत्यों में भक्ति ही श्रेष्ठ है। भक्ति की भव्यता को समझने की शक्ति भागवत से मिलती है।

भागवत भगवान कृष्ण का शब्द अवतार है। भागवत वेदव्यास जी के हृदय से निकली हुई अमृत वाणी है, जिसके श्रवण से अज्ञान का पर्दा हट जाता है। भागवत दिव्य ज्ञान की जननी है। विट्ठल भवन में अमरावती, अकोला, महाराष्ट्र के भक्तों द्वारा आयोजित भागवत कथा में कथाव्यास श्री कृष्ण सदाशिव मुरकर यजमान ज्ञानेश्वर एवं प्रत्यक्षानंद भागवत भवन में वृंदावन से पधारे हुए निर्मोही अखाड़ा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कथावाचक मदन मोहन दास यजमान ग्वालियर से पधारे प्रमोद श्रीवास्तव रहे।

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