Saturday, February 21, 2026
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बारिश से कम प्रदूषण, लेकिन ध्वनि प्रदूषण बढ़ा

  • कांवड़ यात्रा में डीजे के कारण बढ़ा प्रदूषण

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: लगातार बारिश होने के बाद महानगर में प्रदूषण में बेहद कमी आई है। हालांकि आस्था के मेले कांवड़ यात्रा में डीजे की आवाज के कारण ध्वनि प्रदूषण में जरूर इजाफा हुआ है। श्रावण माह के जुलाई माह में इस बार बारिश ने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। मानसून की बारिश ने इस बार एक दशक का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बारिश होने के कारण जहां महानगर की सड़कों पर बढ़ा प्रदूषण कम हुआ है।

वहीं, इस समय का प्रदूषण जो चल रहा है। वह स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद अच्छा और खास है। बारिश होने के कारण इस बार प्रदूषण में बेहद कमी आई है, लेकिन ध्वनि प्रदूषण जरूर बढ़ा है। उसका कारण है कांवड़ यात्रा में जगह-जगह लगे शिविर और डीजे की आवाज के कारण इजाफा हुआ है। विभागीय अधिकारियों की माने तो उनका कहना है कि ध्वनि प्रदूषण में 10 से 20 फीसदी इजाफा हुआ है।

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हालांकि शहर के प्रदूषण में बारिश होने के कारण इस बार बेहद कमी आई है। जो स्वास्थ्य के लिए इस समय बेहद लाभदायक है। इन शहरों में प्रदूषण का स्तर मेरठ में 57, मुजफ्फरनगर में 80, हापुड़ में 58, ग्रेटर नोएडा में 62, गाजियाबाद में 66, बागपत में 66 आदि दर्ज किया गया है। उधर, मेरठ के इन स्थानों पर प्रदूषण का स्तर गंगानगर में 50, पल्लवपुरम में 77, जयभीमनगर में 42 आदि रहा।

इन स्थानों पर भी आई प्रदूषण में कमी

शहर के गंगानगर, पल्लवपुरम और जयभीमनगर में अक्सर प्रदूषण काफी बढ़ा रहता है, लेकिन इस बार बारिश होने के कारण यहां बेहद अच्छा प्रदूषण है। प्रदूषण में कमी आने के कारण मानव जीवन पर भी अच्छा प्रभाव बढ़ेगा। हालांकि गर्मी बढ़ने के कारण प्रदूषण के फिर बढ़ने की संभावना है।

जुलाई माह में बारिश ने तोड़ा एक दशक का रिकॉर्ड

जुलाई के महीने में इस बार बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बारिश इस महीने में अब तक 330 मिमी हुई है। अगर मौसम विभाग के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो बारिश ने एक दशक का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। हालांकि बारिश के होने के बाद से मौसम में उमस का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। जिससे लोग पसीना-पसीना हो रहे हैं। उमस का प्रकोप बढ़ने के कारण मौसम में बदलाव के संकेत लगते हैं। दिन का तापमान फिलहाल 33 डिग्री पर पहुंच गया है।

बारिश ने इस बार जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। अत्यधिक बारिश होने के कारण बेल वाली फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में किसानों के चेहरे पर भी साफ सिकन देखी गई है। ज्वार, गन्ना की फसलों को हालांकि बारिश से लाभ पहुंचा है, लेकिन अत्यधिक बारिश होने से लोगों का जीना भी दुभर हुआ है। अधिक बारिश होने के कारण गर्मी बढ़ी है।

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राजकीय मौसम वैधशाला पर रविवार को दिन का अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री एवं न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अधिकतम आर्द्रता 82 एवं न्यूनतम आर्द्रता 66 प्रतिशत दर्ज की गई। मौसम विशेषज्ञ डा. यूपी शाही का कहना है कि उमस बढ़ने के कारण लोगों को परेशानी होगी। इसलिए मौसम में फिर से बदलाव होने की संभावना है।

अमूमन 80 से 100 मिमी होती थी बारिश

बारिश इस बार अत्यधिक जरूर हुई है, लेकिन इस बार बारिश ने कई रिकॉर्ड अपने नाम भी किए हैं। प्रत्येक वर्ष 80 से 100 मिमी बारिश होती थी, लेकिन इस बार 330 मिमी बारिश हो गई है। जिसके चलते लोगों को परेशानी हुई है। इसलिए इस बार बारिश ने लोगों को जनजीवन भी प्रभावित किया है।

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