मरीन इंजीनियरिंग में पब्लिक और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों में जॉब्स के अवसरों की कोई कमी नहीं है। आधुनिक होते डिफेंस सिस्टम और तेजी से विकसित होते जल मार्ग परिवहन के साधनों के फलस्वरूप मरीन इंजीनियरिंग के प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है।
मरीन इंजीनियरिंग विज्ञान, तकनीक और इंजीनियरिंग का मिलाजुला डोमेन होता है। कॅरियर का यह डोमेन समुद्री जलपोतों के टेक्निकल और मेकेनिकल मैनिज्मेन्ट से संबंध रखता है। बेसिकली मरीन इंजीनियरिंग का डोमेन समुद्र में चलनेवाले जलपोतों के मकैनिकल सिस्टम के निर्माण, आॅपरेशन, और मैन्ट्नन्स का होता है। जलपोतों अर्थात जहाज, सबमरीन और नावों के निर्माण, रखरखाव और उनके इन्स्टॉलैशन के कार्य भी मरीन इंजीनियरिंग के प्रोफेशनल्स की जिम्मेदारियों में शुमार होता है।
मरीन इंजीनियर का जॉब प्रोफाइल क्या होता है?
मरीन इंजीनियरिंग का डोमेन मुख्य रूप से समुद्री जलपोतों के मैन्ट्नन्स का होता है और यही कारण है कि एक मरीन इंजीनियर का मुख्य जॉब प्रोफाइल मरीन वेसेल्स के मैन्यूफैक्चरिंग और मेंटिनेंस का होता है ताकि ये सभी जलपोत बिना किसी टेक्निकल प्रॉब्लम के आॅपरेशन के लिए हमेशा तैयार रहे। इसके अतिरिक्त सामुद्रिक परिवहन के माध्यम से होने वाले नौ सेना की गतिविधियों, पर्यावरण अनुसंधान, संसाधनों के निष्कर्षण और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार इत्यादि को बढ़ावा देने की जिम्मेदारियां भी मरीन इंजीनियर की ही होती हैं।
शुरुआत कहां से करें
मरीन इंजीनियरिंग के डोमेन में प्रवेश के लिए न्यूनतम अर्हता इस स्ट्रीम में बैचलर डिग्री की होती है, जिसके लिए रास्ता फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथमैटिक्स विषयों के साथ बारहवीं परीक्षा पास करने के बाद से खुल जाता है। इस डोमेन में एंट्री के लिए न्यूनतम उम्र सीमा 17 वर्ष है। साथ ही 25 वर्ष से अधिक उम्र के अभ्यर्थियों का इस क्षेत्र में प्रवेश वर्जित है। विजुअल और हियरिंग इंपेरमेंट वाले अभ्यर्थियों के लिए इस डोमेन में एंट्री प्रतिबंधित होता है। वैसे इस डोमेन में एंट्री के लिए कोई भी जेन्डर रीस्ट्रिक्शन नहीं होता है लेकिन जॉब के जॉइन करने तक अभ्यर्थी का अविविाहित होना अनिवार्य होता है। मरीन इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद इसमें एमटेक भी किया जा सकता है।
मरीन इंजीनियर के प्रकार
मरीन इंजीनियरिंग में जॉब के नेचर के आधार पर कोई उम्मीदवार निम्नांकित प्रफेशन के रूप में अपने कॅरियर की शुरूआत कर सकता है-
नैवल आर्किटेक्ट : ये प्रोफेशनल इंजीनियर होते हैं जो सभी प्रकार के जलपोतों के डिजाइन, कन्स्ट्रक्शन, मरम्मती और उनके रखरखाव के लिए जिम्मेदार होते हैं।
मैकेनिकल इंजीनियर : ये इंजीनियर जलपोतों के प्रोपल्जन सिस्टम और पॉवर प्रोडक्शन इक्विप्मेंट्स के डिजाइन तैयार करने और उनके मशीनरी फंक्शनिंग को मैन्टैन करते हैं।
ओशनियोग्राफिक इंजीनियर : ये प्रोफेशनल्स सामुद्रिक व्यवस्था के इंजीनियरिंग से जुड़े होते हैं।
आॅफ्शोर इंजीनियर: ये इंजीनियर आॅइल और गैस सेक्टर में प्रयुक्त प्रोडक्टस के डिजाइन तैयार करते हैं और उनका निर्माण करते हैं।
मर्चेंट नैवी : मरीन इंजीनियरिंग के ये प्रोफेशनल्स पैसेंजर और कार्गो के मूवमेंट और उनके हैंडिलिंग की जिम्मेदारियां निभाते हैं।
आवश्यक कौशल
मरीन इंजीनियरिंग के सेक्टर में कॅरियर की कामयाबी आसान नहीं होती है। कठिन मेहनत करनेवाले और अपार धैर्य रखने वाले उम्मीदवारों के लिए इस क्षेत्र में सफलता आसान हो जाती है। इसके अतिरिक्त इस विधा में कॅरियर बनाने के इच्छुक अभ्यर्थियों में निम्न कौशल का होना अनिवार्य माना जाता है-
उत्कृष्ट कम्यूनिकेशन स्किल, नेतृत्व का गुण, टीम के साथ काम करने की क्षमता, टाइम मैनेजमेंट में दक्षता, फास्ट प्रॉब्लम सोलविंग की क्षमता, आत्मविश्वास और साहस आदि।
अध्ययन के लिए मुख्य संस्थान
-इंटरनेशनल मरीन कम्यूनिकेशन सेंटर, मुंबई
-इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी, कोची
-मरीन इंजीनियरिंग एण्ड रिसर्च इंस्टिट्यूट, कोलकाता
-इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी, विशाखापटनम
-कॉलेज आॅफ इंजीनियरिंग, अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई
-कॉलेज आॅफ इंजीनियरिंग, आंध्रा यूनिवर्सिटी, विशाखापटनम
-इंटरनेशनल मैरीटाइम अकादेमी, चेन्नई
-मरीन इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट, मुंबई
-समुद्र इंस्टीट्यूट आॅफ मैरीटाइम स्टडीज, पुणे
-महाराष्ट्र अकादमी आॅफ नैवल एजुकेशन एंड टेÑनिंग, पुणे
-कोचीन यूनिवर्सिटी आॅफ साइंस एण्ड टेक्नॉलजी, कोची
-कोयम्बटूर मरीन कॉलेज, कोयम्बटूर
-इंटरनेशनल मैरीटाइम इंस्टीट्यूट, ग्रेटर नोएडा
-आरएल इंस्टीट्यूट आॅफ नॉटिकल साइंसेज, मदुरै
-दिल्ली मैरीटाइम अकादेमी, दिल्ली
मरीन इंजीनियरिंग में कॅरियर के इच्छुक अभ्यर्थी को फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमैटिक्स सब्जेक्ट ग्रुप के साथ बारहवीं पास करने के बाद मरीन इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री प्राप्त करनी होती है। इस बीटेक डिग्री में एडमिशन के लिए नेशनल या स्टेट लेवल के जॉइन्ट प्रवेश परीक्षा पास करना आवश्यक होता है।
यह चार वर्ष का अंडरगे्रजुएट डिग्री का कोर्स होता है, जिसमें दाखिला जेईई मेन, जेईई ऐडवान्स, (बिरला इंस्टिट्यूट आॅफ टेक्नॉलजी एण्ड साइंस) इत्यादि प्रवेश परीक्षाओं को क्वालिफाई करने के बाद प्राप्त होता है। इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के क्वालिफाई करने के बाद भी मरीन इंजीनियरिंग में दाखिला लिया जा सकता है जो इस स्ट्रीम में बीटेक की डिग्री प्रदान करता है। मरीन इंजीनियरिंग में एमटेक की डिग्री के लिए ग्रेजुएट ऐप्टिटूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग में क्वालिफाइ करना जरूरी होता है जो दो वर्ष की अवधि का कोर्स होता है।
कहां हैं अवसर
मरीन इंजीनियरिंग का क्षेत्र शिप और शिपिंग ट्रांसपोर्ट के अन्य साधनों के प्रोपल्जन सिस्टम, इंजन, पम्प इत्यादि के डिजाइनिंग, मरम्मती और रखरखाव से जुड़ा होता है। यही कारण है कि विज्ञान और तकनीकी के एडवासमेंट के साथ मरीन इंजीनियर, मरीन टेक्नोलॉजिस्ट, नैवल आर्किटेक्ट, साइट मैनेजर, कॉटन्ट्रैक्टर, सप्लायर और अन्य संबंधित टेक्निशयंस के रूप में मरीन इंजीनियरिंग में जॉब के अवसरों में भी बड़ी तेजी से वृद्धि हो रही है।
इस सत्य से इनकार करना आसान नहीं होगा कि मौजूद दौर में मरीन इंजीनियरिंग के प्रोफेशनल्स के लिए जॉब्स के अवसरों की कोई कमी नहीं है। पनडुब्बियों, जलपोतों के निर्माण से लेकर उनके मरम्मत और रखरखाव और विभिन्न प्रकार के सामुद्रिक अनुसंधानों और सूपरविजन के कार्यों में मरीन इंजीनियरिंग के प्रोफेशनल्स की अहम जिम्मेदारियाँ होती हैं।
शिपिंग, शिप मैन्यफैक्चरिंग, नेवी, कंसल्टन्सी फर्म, पॉवर सेक्टर, स्टील इंडस्ट्री इत्यादि सेक्टर्स में मरीन इंजीनियरिंग की विधा में गे्रजुएट और पोस्ट गे्रजुएट अभ्यर्थियों के लिए विभिन्न पदों पर जॉब्स के भरपूर अवसर उपलब्ध हैं। मरीन इंजीनियरिंग में विभिन्न कोर्स के बाद इंटर्नशिप करने से देश और विदेश में प्राइवेट और पब्लिक दोनों डोमेन के शिपिंग कंपनियों, इंजन प्रोडक्शन कंपनियों इत्यादि में आसानी से जॉब्स के बहुत सारे अवसरों के दरवाजे खुल जाते हैं।
नियोक्ता कौन होते हैं
मरीन इंजीनियरिंग में पब्लिक और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों में जॉब्स के अवसरों की कोई कमी नहीं है। आधुनिक होते डिफेंस सिस्टम और तेजी से विकसित होते जल मार्ग परिवहन के साधनों के फलस्वरूप मरीन इंजीनियरिंग के प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है।
भारत सरकार के डिफेंस विभाग के अतिरिक्त सभी बंदरगाहों में मरीन इंजीनियर के लिए जॉब्स के बहुत सारे अवसर उपलब्ध हैं। शिपिंग कॉर्पोरेशन आॅफ इंडिया, मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, अदानी पॉर्ट्स, एबीजी शिपयार्ड, हिंदुस्तान शिपयार्ड, के अतिरिक्त जीइ शिपिंग, अमेरिकन क्रूज लाइंस (यूएसए), एसएमईसी आॅटोमैशन प्राइवेट लिमिटेड, सीएमए सीजीएम, टीएमसी शिपिंग, आईटीटी शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड, हापाग लॉयड (जर्मनी), वॉर्टसिला (फिनलैंड), कोस्टल मरीन कंस्ट्रक्शन एंड इंजीनियरिंग, शेल, एंग्लो ईस्टर्न ग्रुप इत्यादि देश और विदेश की कंपनियां मरीन इंजीनियर्स को रीक्रूट करती हैं। पूरी दुनिया के कार्गो का दो तिहाई भाग से भी अधिक हिस्सा समुद्री मार्ग से होता है और यही कारण है कि आनेवाले वर्षों में मरीन इंजीनियरिंग का सेक्टर कॅरियर और जॉब्स की अपार संभावनाओं से भरा हुआ है।
-श्रीप्रकाश शर्मा



