- सालों से खंडहर में तब्दील है उपस्वास्थ्य केंद्र
- लोगों ने सामान डालकर कर रखा अतिक्रमण
जनवाणी संवाददाता |
सरधना: मेरठ जिले के अंतिम गांव पिठलोकर में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ रही हैं। यहां बना उप स्वास्थ्य केंद्र सालों से खंडहर हो रहा है। केंद्र का ताला खोलने वाला भी नसीब नहीं हो रहा है। केंद्र में झाड़ फूंस उग आई है। लोगों ने सामान डालकर अतिक्रमण कर रखा है।
ऐसे में ग्रामीणों को सरकारी स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल पा रही है। मरीजों को इलाज के लिए करीब 14 किमी का सफर तय करके सरधना का रुख करना पड़ता है। यदि स्वास्थ्य विभाग इस बिल्डिंग को आबाद कर दे तो ग्रामीणों को सरकारी सुविधा का लाभ मिल सकेगा।
पिठलोकर मेरठ जिले का अंतिम गांव है। जो सरूरपुर ब्लॉक में आता है। पुल पार करते ही मुजफ्फरनगर की सीमा शुरू हो जाती है। कहने को सरकार ग्रामीण क्षेत्र तक बेहतर स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के लिए मोटे बजट पास करती है। मगर ऐसे गांवों तक सेवा पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देती है। पिठलोकर में करीब एक दशक से उपस्वास्थ्य केंद्र बना हुआ है। नियमानुसार यहां एक चिकत्सिक, फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वॉय आदि पूरा स्टाफ तैनात होना चाहिए।
मगर यह केंद्र सालों से खंडहर बना हुआ है। इस केंद्र का ताला खोलने वाला कोई नहीं है। देखरेख के अभाव में यहां झाड़ फूंस उग आई है। लोगों ने सामान डालकर परिसर में अतिक्रमण कर लिया है। जिसके चलते ग्रामीणों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही है। मरीजों को इलाज के लिए करीब 14 किमी का सफर तय करके सरधना जाना पड़ता है। मगर स्वास्थ्य विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। यदि बिल्डिंग को आबाद किया जाए तो लाखों की बिल्डिंग का सदुपयोग हो सकेगा और ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं को लाभ मिल सकेगा।

