Tuesday, April 28, 2026
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बच्चों की चार आदतें हो सकती हैं नुकसानदेह

BALWANI


बच्चे पौधे की तरह होते हैं, जिन्हें विचारों और संस्कारों से सींचकर हम एक अच्छा इंसान बनाते हैं। इस उम्र में बच्चे अगर किसी बुरी लत के शिकार हो जाएं, तो वो ताउम्र उनके व्यवहार की पहचान बन सकती है। इसलिए बच्चों की हर अच्छी-बुरी आदत का ख्याल रखना जरूरी है। इसी वजह से मॉमजंक्शन के इस आर्टिकल में हम बच्चों में लगने वाली बुरी आदतों के बारे में बता रहे हैं। साथ ही इस लेख के जरिए हम यह भी बताएंगे कि बच्चों की बुरी आदतों को माता-पिता किस तरह सुधार सकते हैं।

बच्चों का अंगूठा पीना
बहुत सारे बच्चों में अंगूठा चूसने की बुरी आदत होती है। शुरूआत में अंगूठा पीने से बच्चा खुद को सुरक्षित महसूस करता है, लेकिन आगे चलकर यह उसकी आदत बन जाती है। कई बच्चों को सोने से पहले अंगूठा चूसने की आदत होती है । हालांकि, वक्त के साथ यह आदत छूट जाती है, लेकिन कुछ बच्चों में यह आदत लंबे समय तक रह सकती है। अंगूठा चूसना वैसे तो चिंता का विषय नहीं है, लेकिन बच्चे के पक्के दांत आने के बाद यह गंभीर समस्या का कारण बन सकता है। दरअसल, अंगूठा चूसने से दांतों पर दबाव पड़ता है, जिससे दांत टेढ़े-मेढ़े और खराब हो सकते हैं।

अंगूठा चूसने की बुरी आदत को छुड़ाने के टिप्स
-एक बार बच्चे को अंगूठा लेने की लत लग जाए तो इसे छुड़ाना कोई आसान काम नहीं है। यदि बच्चा समझने योग्य है, तो उससे बात करें और समझाएं। उसे बताएं कि यह आदत क्यों बुरी है और इससे क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं।
बच्चे को इस आदत को छोड़ने के लिए उसे कुछ गिफ्ट देने का वादा करें। यदि बच्चे के अंगूठा लेने के पीछे का कारण स्ट्रेस है, तो यह जानने की कोशिश करें कि कौन सी बात उन्हें परेशान कर रही है। इसके अलावा, बच्चे को अलग-अलग तरीकों से अच्छा महसूस कराएं।
-बच्चे की इस आदत को छुड़वाने के लिए उन्हें प्यार से समझाना चाहिए। कई बार समझाने के बाद भी जब बच्चा नहीं सुनता तो माता-पिता डांट का सहारा लेते हैं, जो सही तरीका नहीं है। यदि बच्चा अंजाने में बार-बार अंगूठा चूस रहा है, तो उसे बताएं कि यह बुरी आदत है और इसके नुकसान के बारे में याद दिलाकर उसे ऐसा करने से रोकें।

नाखून चबाना
सिर्फ बच्चों में ही नहीं, बड़ों में भी नाखून चबाने की बुरी आदत होती है। अगर समय रहते बच्चों के इस आदत को नहीं रोका गया, तो बड़े होने के बाद भी उससे पीछा छुड़ाना मुश्किल हो सकता है। एक शोध के अनुसार, स्कूल जाने वाले करीब 10 साल की उम्र के 30 से 60 प्रतिशत बच्चों में नाखून चबाने की आदत होना सामान्य पाया गया है। वहीं, बच्चे के बड़े होने के साथ-साथ यह आदत भी कम हो सकती है। हालांकि, बच्चों की इस बुरी आदत का कारण अज्ञात है, लेकिन कुछ शोध के अनुसार, यह पाया गया है कि तनाव और चिंता के कारण बच्चे नाखून चबाने लग सकते हैं। ऐसे में नीचे बताए गए तरीके से इस आदत को छुड़ाया जा सकता है:

नाखून चबाने से रोकने के टिप्स
-कई बार बच्चों को पेरेंट्स, दोस्तों या स्कूल से जुड़ी किसी परिस्थितियों के कारण स्ट्रेस हो सकता है। इनमें शामिल है-बच्चे की दोस्त से लड़ाई, स्कूल का होमवर्क पूरा न होना या पेरेंट्स का लड़ाई करना। वहीं, हमने पहले ही जानकारी दी है कि नाखून चबाने का एक कारण तनाव भी है। ऐसे में यदि आपका बच्चा भी किसी तनाव के चलते नाखून चबाता है, तो सबसे पहले उसके तनाव का कारण जानने की कोशिश करें।
बच्चे के नाखून चबाने का कारण अगर तनाव नहीं है, तो बच्चे को किसी न किसी काम में व्यस्त रखें। इसके लिए बच्चे को ड्रॉइंग, पेपरक्राफ्ट, पेंटिंग करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
-खेलने के लिए हाथों में क्ले दे सकते हैं। बच्चे को क्ले से अलग-अलग चीजों को बनाने का टास्क दें। इससे बच्चे के हाथ व्यस्त रहेंगे।
– बच्चों के नाखून हमेशा छोटे रखें। अगर बच्चे की उम्र एक साल से ज्यादा है तो उनकी नाखून चबाने की आदत को रोकने के लिए उनके नाखून पर किसी कड़वी चीज को लगा सकते हैं। हालांकि, घर में मौजूद किसी भी कड़वी चीज का इस्तेमाल न करें। इसके लिए बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहतर हो सकता है।
-बड़े बच्चों को नाखून चबाने से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में समझाएं। बच्चों को बताएं कि दांतों से नाखून काटने से उन्हें कई बीमारियों के होने का जोखिम हो सकता है।
-बच्चे के नाखून चबाने की आदत को छोड़ने के लिए उनके प्रयास की सराहना करें। इसके लिए आप उन्हें कोई उपहार भी दे सकते हैं।

दांत पीसना या दांत किटकिटाना
कई बच्चों को दांत पीसने की बुरी आदत होती है। मेडिकल भाषा में इसे ब्रक्सिज्म कहा जाता है। आमतौर पर बच्चे जब गहरी नींद में होते हैं तब ऐसा कर सकते हैं। बच्चों के दांत पीसने का कारण तनाव या दांतों का ऊबड़-खाबड़ होना भी हो सकता है। ज्यादातर बच्चों का किशोरावस्था में आने के बाद यह परेशानी खुद-ब-खुद ठीक हो जाती है। वहीं, कुछ में बड़े होकर भी यह समस्या जारी रहती है। दांत पीसने के कारण दांत टूटना, सिरदर्द, दांतों में दर्द, आदि की परेशानी हो सकती है। गंभीर मामलों में दांत ढीले या फ्रैक्चर भी हो सकते हैं। ऐसे में इससे बचने के लिए बच्चे में इस आदत को वक्त रहते छुड़ाना जरूरी है।

दांत पीसने से रोकने के टिप्स
-बच्चों को दांत पीसने से रोकने से पहले इसका कारण जानने की कोशिश करें।
-अगर बच्चे के दांत पीसने का कारण तनाव है तो बच्चे से बात करें। उनके तनाव का कारण जानकर उनकी परेशानी दूर करने का प्रयास करें।
-इस आदत को छुड़ाने के लिए डॉक्टर या दंत रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना भी बेहतर विकल्प हो सकता है।
-बच्चे को सोने से पहले किताब पढ़ने के लिए दें या उन्हें कहानी सुनाकर उनका मन बहलाएं।

ज्यादा स्क्रीन टाइम
बच्चे वही करते हैं जो उनके पेरेंट्स करते हैं। जब पेरेंट्स टीवी, मोबाइल फोन, लैपटॉप आदि से चिपके रहते हों, तो उन्हें देखकर बच्चे भी यही आदत अपनाते हैं। कई बार माता-पिता अपना काम करते समय, बच्चे को फोन में वीडियो लगाकर दे देते हैं। इससे बच्चे का स्क्रीन टाइम ज्यादा होने लगता है और इससे उन पर इसका बुरा असर भी हो सकता है।बच्चों में

अधिक स्क्रीन टाइम की आदत को सुधारने के टिप्स
-बच्चे को गैजेट्स का इस्तेमाल सिर्फ पढ़ाई करने के लिए दें।
-बच्चों को मोबाइल या लैपटॉप की जगह खेलने के लिए बोर्ड गेम्स लाकर दें। चाहें तो खेलने के लिए कैरम बोर्ड या पजल्स दे सकते हैं। इसके अलावा, आउटडोर एक्टिविटी को बढ़ावा दें।
-बच्चों से बात करके उनके स्क्रीन टाइम को निर्धारित करें।
-माता-पिता बच्चों के साथ स्क्रीन टाइम स्पेंड करें। इससे पेरेंट्स बच्चों को गैजेट्स का गलत इस्तेमाल करने से भी रोक सकते हैं।
-बच्चों के लिए उनके पेरेंट्स रोल मॉडल होते हैं। ऐसे में बच्चे का स्क्रीन टाइम कम करने के लिए सबसे पहले माता-पिता को गैजेट्स का इस्तेमाल कम करने की जरूरत है।


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