Saturday, March 7, 2026
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बेसहाराओं की मदद करेगा ‘खिदमत बैंक’

  • शहर में शीघ्र ही खुलेगा रोटी बैंक भी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गरीबों की मदद का जज्बा लिए शहर के कुछ ‘फरिश्ते’ निकल पड़े हैं उनकी मदद करने के लिए। गरीबों को हर जरुरत का सामान वैसे तो कई लोग अक्सर डोनेट करते रहते हैं लेकिन अब यह परम्परा व्यवस्थित तरीके से शहर में चलेगी। इसके लिए बाकायदा शहर के बीचो बीच एक बैंक खोला गया है

और इसका नाम भी ‘खिदमत बैंक’ रखा गया है। इसके अलावा दो जून की रोटी के लिए जद्दोजहद करने वालों के लिए भी शहर में शीघ्र ही एक ‘रोटी बैंक’ खुलने जा रहा है। दरअसल सोशल एण्ड जस्टिस फाउंडेशन के प्रयासों से हापुड़ रोड स्थित इंदिरा चौक पर खिदमत बैंक की स्थापना की गई है।

इसमें कोई भी व्यक्ति अपने घर का पुराना सामान जैसे कपड़े, कम्बल, पुराने जूते, पुरानी किताबें या फिर जरुरत का कोई भी सामान जमा करा सकता है। बैंक संचालाकों ने शहर के लोगों से यह भी अपील की है कि जो कोई भी व्यक्ति कोई कपड़ा बैंक में जमा करना चाहे तो वो इस बात का ख्याल रखे कि कपड़ा साफ एवं धुला हुआ होना चाहिए। बैंक से जुड़े रियासत एडवोकेट के अनुसार फिर कोई भी जरुरतमंद इस बैंक से अपनी जरुरत का कोई भी सामान नि:शुल्क ले सकता है।

सोमवार को इस बैंक का उद्घाटन बुद्धिजीवियों एवं उलेमाओं द्वारा किया दिया। उद्घाटन समारोह मे मिल्ली काउंसिल के अध्यक्ष कारीर शफीकुर्रहमान कासमी, नायाब शहर काजी जैनुल राशेदीन, फाउंडेशन के अध्यक्ष मुफ्ती मुरसलीन, डॉ. शुऐब एडवोकेट, रियासत अली खां एडवोकेट, डॉ. फारुख हुसैन, कारी आबिद , मौलाना आजिम, डॉ. अब्दुल माजिद, राशिद एडवोकेट, डॉ. शमशुद्दीन व मो. शुऐब मुख्य रूप से मौजूद थे।

‘रोटी बैंक’ भरेगा भूखों का पेट

खिदमत बैंक की स्थापना के बाद संस्था ने रोटी बैंक पर भी काम करना शुरु कर दिया है। संस्था के पदाधिकारियों के अनुसार कोई भी व्यक्ति रोटियां व खाने का अन्य सामान ‘रोटी बैंक’ में जमा करा सकता है। इसके बाद कोई भी जरुरतमंद व्यक्ति यहां से नि:शुल्क खाना हासिल कर सकता है।

उलेमाओं ने की मदरसों में ‘संविधान’ पढ़ाने की मांग

हर मुसलमान को संविधान की जानकारी हो तथा मदरसों में भी संविधान की पढ़ाई शुरु होनी चाहिए। हर मुसलमान को यह सीखना चाहिए कि जंग ए आजादी में उलेमाओं का क्या रोल रहा। आॅल इण्डिया मुस्लिम जमात की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई। ग्रांड मुफ्ती हाउस में आयोजित इस बैठक में उलेमाओं ने कहा कि हमारे पास एक मजबूत संविधान है और इसकी कई विशेषताएं हैं। इन विशेषताआें से हर मुसलमान को भी वाकिफ होना चाहिए।

बैठक में मुुसलमानों का आह्वान किया गया कि वो अपने अपने घरों में संविधान की किताब रखें। इस किताब को पढ़ें और संविधान के बारे में घर के अन्य सदस्यों को भी बताएं। यह भी आह्वान किया गया कि मदरसों के बच्चों को भी संविधान का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। बैठक में इस बात को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई कि देश में लोकतंत्र की स्थापना के प्रति भारतीय मुसलमानों की प्रतिबद्धता के बारे में गलत जानकारी दी जाती है। उलेमाओं ने कहा कि देश को आजादी दिलाने के लिए हिन्दु और मुसलमानों ने मिलकर लड़ाई लड़ी।

इस अवसर पर जमात के अध्यक्ष मुफ्ती शाहबुद्दीन, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष हाफिज नूर अहमद अजहरी, इस्लामिया इंटर कॉलेज के हाजी नाजिम बेग, हाजियापुर मस्जिद के मुख्य इमाम मौलाना सूफी मुजाहिद हुसैन कादरी, इस्लामिक रिर्सच सेंटर के मौलाना अबसार रजा, मुफ्ती सिराजुद्दीन कादरी, मौलाना रजी अहमद, कारी तसलीम, मौलाना शहादत खां, इकबाल अंसारी एडवोकेट, अब्दुल हसीब खां, सैयद तैयब चिश्ती, साहिल रजा कादरी, वसीम मियां, शाहिद खान, मौलाना मुजाहिद, इश्तियाक अहमद व जोहेब अंसारी मुख्य रूप से मौजूद थे।

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