- ललसाना मार्ग पर खोदा जाना था चार फीट, खोद दिया 25 फीट का तालाब
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सरकारी तालाब की मिट्टी से भूमाफिया की अवैध कालोनी का भराव कराया जा रहा है। केवल भूमाफिया ही नहीं गांव के प्रधान ने खेतों में तालाब की खुदाई से निकली मिट्टी से भराव करा लिया है। जिस ठेकेदार को तालाब की खुदाई का ठेका मिला है, उसने चार फीट के बजाय 25 फीट तक खुदाई कर डाली है। इसको लेकर आज दर्जनों ग्रामीण कलक्ट्रेट पहुंचे और डीएम को शिकायती पत्र देकर ठेकेदार व प्रधान के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई की मांग की।
कलक्ट्रेट पहुंचे बबलू प्रधान ने बताया कि सरकार की अमृत सरोवर योजना के तहत तालाब की खुदाई व सौंदर्यीकरण किया जाना है। इसके लिए जो ठेका छोड़ा गया है, उसमें चार फीट तक खुदाई का प्रावधान है, लेकिन बजाय चार फीट के वहां गांव प्रधान व ठेकेदार ने मिलकर 25 फीट तक की खुदाई कर डाली है। तालाब के नाम पर गांव में कुआं सरीखी खुदाई चल रही है।

कलक्ट्रेट पहुंचे गांव के बबलू, ब्रजवीर सिंह, संजीव चौधरी, पंकज कुमार, कैलाश सिंह, प्रदीप सिंह, कृपाल सिंह, सौराज, यूसुफ, ताराचंद, मोहित आदि ने बताया कि दिन रात गांव में तालाब की मिट्टी की खुदाई जारी है। जो मिट्टी निकाली जा रही है, उसको आसपास के भूमाफियाओं का जो अवैध कच्ची कालोनी काट रहे उनको बेचा जा रहा है। तमाम कच्ची कालोनियों में इसी तालाब से निकाली जा रही मिट्टी से भराव कराया जा रहा है।
प्रधान के खेत में भराव
डीएम से मिलने पहुंचे गांव वालों ने अधिकारियों को बताया कि इस सारे काम में गांव के प्रधान सबसे बडेÞ मददगार बने हुए हैं। गांव वालों का कहना है कि प्रधान ने अपने खेतों में भी इस तालाब की मिट्टी से भराव करा लिया है। इसके अलावा यहां से निकाली जा रही मिट्टी एक हजार रुपये प्रति ट्रॉली के हिसाब से बेची जा रही है। उन्होंने अधिकारियों से इस अवैध कमाई पर रोक लगाए जाने तथा कितनी मिट्टी अब तक बेची जा चुकी है। इसका भी हिसाब लिए जाने की मांग की है।
पहले भी हो चुका है हंगामा
ग्रामीणों ने बताया कि अवैध खुदाई को लेकर पहले हंगामा हो चुका है। जब हंगामा हुआ तो ठेकेदार वहां से अपनी जेसीबी व ट्रॉली लेकर भाग गया। ग्रामीण इस अवैध खुदाई को लेकर बेहद गुस्से में हैं। वहां शांतिभंग होने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने डीएम दीपक मीणा से कहा कि पहले जांच करा ली जाए उसके बाद कार्रवाई करायी जाए, लेकिन इस मामले में यदि प्रशासन के स्तर से देरी हुई तो हालात बेकाबू हो जाएंगे क्योंकि लोग गुस्से में हैं।
तालाब की मिट्टी की भारी मांग
दरअसल, तालाब की मिट्टी की भारी मांग इसलिए है, क्योंकि यह मिट्टी बहुत उपयोगी होती है। तालाब से निकाली जाने वाली मिट्टी चिकनी और टिकाऊ होती है। इसलिए यह महंगी भी होती है। भराव के काम में सबसे ज्यादा उपयुक्त तालाब की मिट्टी मानी जाती है।

