- अभी तक देश के कई राज्यों में करीब 200 वन्य जीव को कर चुके हैं रेस्क्यू
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: वन्य जीव विशेषज्ञ डा. आरके सिंह 2016 की उस घड़ी को शायद ही कभी भूल पाएं, जब मेरठ कैंट क्षेत्र में एक तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया था। इस हमले में उनकी जान पर ही बन आई थी, लेकिन घायल होने के बावजूद उन्होंने डॉट लगाकर तेंदुए को बेहोश करने में सफलता पाई थी। हालांकि बाद में उन्हें अपने हाथ में कई टांके भी लगवाने पड़े थे। इन दिनों कंकरखेड़ा क्षेत्र में आया एक तेंदुआ चर्चा का विषय बना हुआ है। इस तेंदुए जी गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए जौनपुर से वन्य जीव विशेषज्ञ डा. आरके सिंह को बुलाया गया है।

डा. आरके सिंह अपने तीन दशक के सेवाकाल में करीब 200 वन्य जीवों को रेस्क्यू कर चुके हैं। उन्हें यूपी के अलावा हरियाणा और गुजरात आदि राज्यों में बुलाया जाता रहा है। अभी वे कंकरखेड़ा के आर्यनगर इलाके में दिखाई दिए तेंदुए को रेस्क्यू करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि तीन टीम लगाए जाने, पिंजरे और कैमरों की मदद लिए जाने के बावजूद अभी सफलता नहीं मिल सकी है। अभी तेंदुआ कहां है यह कहना मुश्किल है, लेकिन उसकी तलाश में विभाग की ओर से 8-10 दिन तो टीम अपने प्रयास में लगी ही रहने वाली है।

सबसे खास बात यह है कि डा. आरके सिंह पशुपालन विभाग में सेवारत है। इसके बावजूद उन्हें वन्य जीव विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है। इसके पीछे उनका बीकानेर राजस्थान में गुजरा बाल्यकाल रहा है। वे बताते हैं कि बीकानेर में उनके घर से थोड़े फासले पर ही एक चिड़ियाघर रहा है। वह अक्सर स्कूल से उसी चिड़ियाघर को देखने चले जाते थे। जहां चिड़ियों और जानवरों के बीच रहकर उनके स्वभाव को कब जानने लगे, पता ही नहीं चला। लायन-टाइगर जैसे जीवों को देखकर वह बचपन का रोमांस उन्हें वन्यजीवों के नजदीक खींचता चला गया।
हालांकि उन्हें पशु चिकित्सा के रूप में गवर्नमेंट जॉब मिली, लेकिन उनके वन्य जीवों के प्रति लगाव को देखते हुए उनकी सेवाएं ली जाने लगीं। कानपुर चिड़ियाघर में बुला लिया गया। लायन सफारी इटावा और गोरखपुर जू भी उन्होंने बनवाया है। करीब 200 वन्य जीवों को रेस्क्यू करने के अभियान के दौरान क्या कभी किसी खतरे का सामना करना पड़ा है। सवाल पर जवाब था कि सबसे खतरनाक रेस्क्यू आॅपरेशन मेरठ के ही कैंट क्षेत्र में वर्ष 2016 में हुआ। वह 14 अप्रैल की घटना डा. आरके सिंह जीवन भर नहीं भुला पाएंगे।

वह बताते हैं कि कैंट में एक तेंदुए का आतंक रहा। जिसको तलाश करने के लिए कई दिन तक अभियान चलाया गया। जब तेंदुआ सामने आया, तो उसको डॉट लगाने के लिए गन से शॉट लगाया गया। इसी बीच तेंदुआ हिंसक होकर उन पर झपट पड़ा। तेंदुए के हमले से उनका हाथ लहूलुहान हो गया। इस घटना के दौरान उनकी जान पर ही बन आई थी, लेकिन उन्होंने अपना हौसला नहीं खोया और घायल हाथ पर कपड़ा लपेटकर तत्काल दूसरी डॉट लगाते हुए तेंदुए को बेहोश करने में कामयाबी हासिल की।
इस हादसे में घायल होने के बाद उनके हाथ में कई टांके भी आए थे। इसके अलावा कई अन्य घटनाएं भी हुई, लेकिन बकौल डा. आरके सिंह तेंदुए के हमले की घटना उन्हें हमेशा याद रहेगी। इस घटना के बाद वर्ष 2021 में उनकी पोस्टिंग मेरठ में भी रह चुकी है जहां से वर्ष 2023 में उनका जौनपुर में तबादला हो चुका है। स्थिति यह है कि जहां कहीं भी किसी वन्य जीव की कोई सूचना मिलती है, वहीं डा. आरके सिंह को बुलाने का प्रयास किया जाता है।

