Wednesday, March 18, 2026
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खाद्य पदार्थों में मिलावट आतंकवादी सरीखा

Nazariya 22


GEETA YADAVखाद्य पदार्थों की मिलावट का खेल बरसों पुराना है। किसी भी तरह से, किसी भी ऐसे पदार्थ को मिलाना, जो भोजन की गुणवत्ता को बदल देता है खाद्य मिलावट है। एफएसएसएआई की रिपोर्ट से ये साफ हो चुका है कि भारत में 13 फीसदी खाना गुणवत्ता के मानक स्तर से नीचे है। आज मिलावट का स्वरूप बदल चुका है। कोई भी खाद्य पदार्थ, इससे अछूता नहीं है। आईआईटी बॉम्बे की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, अब नमक भी सुरक्षित नहीं रहा। बड़ी-बड़ी कंपनियां नमक में प्लास्टिक मिलाती हैं। खाद्य पदार्थ फल, सब्जी, औषधि, पदार्थ, चॉकलेट आइसक्रीम, सौंदर्य प्रसाधन आदि में घातक कृत्रिम रसायन और कीटनाशक मिले हैं। नवजात शिशु दूध भी शुद्ध पी रहा है, इसकी कोई गारंटी नहीं है। यह मिलावटी उत्पाद हमारे जीवन में क्या-क्या उत्पात मचा सकते हैं, यह जानकर हमारी रूह कांप सकती है। अनेक मिलावटी सामग्रियों में से ज्यादातर पदार्थों में केमिकलों की मिलावट की जाती है। ये केमिकल मानव स्वास्थ्य पर अल्पकालीन से लेकर दीर्घकालीन प्रभाव तक छोड़ते हैं। खाद्य पदार्थों की मिलावट का बुरा प्रभाव डायरिया, पेट दर्द, मितली, उल्टी, आंखों की समस्या, सिर दर्द, कैंसर, खून की कमी, नींद न आना, लकवा और मस्तिष्क को क्षति, पेट के विकार, जोड़ों के दर्द, लिवर विकार, ड्राप्सी, आंत्रशोधीय समस्याओं, श्वसन संबंधी परेशानियों, कैंसर, कार्डियक अरेस्ट, ग्लूकोमा, गुर्दों में खराबी,पाचन तंत्र के विकारों आदि के रूप में सामने आते हैं। भारत की खाद्य सुरक्षा एवं मानक अथॉरिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश भर के बाजारों में बेची जा रही सब्जियों में से कम से कम 9.5 फीसदी खाने लायक नहीं पाई गई हैं। रासायनिक कीटनाशकों से हो रही खेती के कारण पंजाब में कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ी। कृषि वैज्ञानिक बताते हैं, कीड़े-मकौड़ों और बीमारियों की रोकथाम के लिए आजकल अनाज, फल, सब्जियों आदि पर अंधाधुंध पेस्टीसाइडों का प्रयोग किया जाता है, जिनमें से कई का असर पदार्थों को धोने पर भी नहीं जाता। ये बचे हुए पेस्टीसाइड शरीर के प्रमुख अंगों पर जहरीला असर डालते हैं। भारत में दूध में मिलावट एक चुनौती है। बीस फीसदी से ज्यादा दूध मिलावट करके तैयार किया जाता है। भारत में खुले मसालों की बिक्री अभी भी थमी नहीं है, जबकि 2018 में बने कानून के अनुसार ऐसा करना गैर कानूनी है। अनेक डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों में कृत्रिम फ्लेवर डाला जाता है। सौंदर्य प्रसाधनों में प्रिजर्वेटिव के हानिकारक प्रभावों से कोई नहीं बचा है।

बात दवाओं की करें, तो इसमें मिलावट कोई नया विषय नहीं। दवाओं की मिलावट अच्छे या बुरे स्वास्थ्य को नहीं, बल्कि जिंदगी और मौत को निर्धारित करती है। जीवन रक्षक दवाइयों के मामलों में दवा बदलने का मौका नहीं होता है, यहां मिलावट आपको सीधा मौत देती है। हाल ही में दिल्ली पुलिस ने कैंसर की नकली दवा बनाने वाले गैंग का भंडाफोड़ किया है। शोध बताते हैं, हम लोग मिलावटी खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल करते-करते उनके रूप-रंग को देखने के इतने आदी हो गए हैं कि असली चीजें देखने या प्रयोग करने पर नकली जैसी लगने लगती हैं। सबसे विकट स्थिति उपभोक्ता के सामने होती है, जो ज्यादातर मामलों में असली सामान की पहचान करने की सलाहियत नहीं रखते। यद्यपि मिलावट रोकने के लिए सरकार ने अनेक उपाय किए हैं। समय-समय पर कमजोर नियमों में सुधार भी किए जाते रहे हैं, फिर भी मिलावट का कहर कम नहीं हो पा रहा है।

इस बारे में अतिरिक्त आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण, राजस्थान, जयपुर के पंकज ओझा का कहना है, आमजन को शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाने के लिए विभाग की ओर से मिलावट की रोकथाम के लिए निरंतर अभियान चलाया जा रहा है। आप देख सकते हैं, त्योहारों का सीजन शुरू होने पर व्यापारियों के साथ ही विभाग भी चौकन्ना हो जाता है और छापेमारी की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। क्योंकि दुकानदारों द्वारा लंबे समय से रखे गए स्टॉक को त्योहारों पर उसकी मिठाइयां बनाकर खपाने की प्रवृत्ति होती है। त्योहार ऐसा मौका होता है, जब जनता द्वारा अधिक मिठाइयां खरीदी जाती हैं। इसलिए व्यापारियों की सोच भी यही होती है कि जनता त्योहार पर अवश्य ही उनसे मिठाइयां खरीदेगी। इसलिए लाभ कमाने के लालच में अधिक मिलावट की जाती है। खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर हम समय-समय पर व्यापारियों को जागरूक भी करते रहते हैं। आम आदमी मिलावट की जांच के लिए मोबाइल चल खाद्य प्रयोगशाला पर तुरंत जांच करवा सकता है। एक आम आदमी मिलावट से पूरी तरह तो नहीं बच सकता। लेकिन थोड़ी जागरूकता और सावधानी से कुछ हद तक इससे बचा जा सकता है।

अफसोस मिलावट रोकने के लिए प्रभावी कानून भी बनाए गए हैं। लेकिन मिलावट जैसा जघन्य कृत्य केवल कानूनों से नहीं थम सकता। इस पर प्रभावी रोक के लिए निमार्ताओं, खुदरा व्यापारियों, सरकार और उपभोक्ताओं को सामने आना होगा। जनता को जागरूक बनकर व्यापारियों को यह बताना होगा कि मिलावट जैसा आपराधिक कृत्य किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा। समाज को इस जुर्म के अपराधी व्यापारियों को बहिष्कृत भी करना होगा। इससे अन्य व्यापारियों को भी सीख मिलेगी। ध्यान रहे, मिलावट करने वाले या ऐसा सामान बेचने वालों के विरुद्ध हत्या के प्रयास जैसी सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई होनी बहुत जरूरी है, तभी सही मायनों में मिलावटखोरों पर नकेल कसी जा सकेगी।


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