- बिल्डरों के खाली मकानों पर किया जा रहा है बड़ा खेल
- निगम अफसरों की शह पर चल रहा वसूली का धंधा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए नगर निगम के अधिकारियों ने अब नया खेल खेला है। इस बार अधिकारियों ने खाली पड़े मकानों पर भी थोक के हिसाब से हाउस टैक्स लगा दिया है। बिल्डरों के खाली पड़े मकानों में हाउस टैक्स के नाम पर बड़ा खेल किया जा रहा है। नगर निगम अधिकारियों की शह पर चल रहे इस वसूली के धंधे में आम आदमी पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तो अनाप-शनाप बिल भेजकर वसूली हो रही है, वहीं ईमानदारी से बिल देने वाले उपभोक्ताओं के समक्ष समस्याएं खड़ी हो रही हैं। सोने पे सुहागा यह कि एक बार बिल भेजने के बाद फिर नगर निगम इसी रकम को बकाया में चढ़ाकर वसूलने का दबाव बनाता है।
नगर निगम अपनी शहरी सीमा में 2 लाख 75 हजार उपभोक्ताओं से हाउस टैक्स वसूलता है। नगर निगम ने शहरी सीमा को तीन क्षेत्रों में बांट रखा है। एक तो मुख्यालय जोन, दूसरी शास्त्री नगर जोन तथा तीसरा कंकरखेड़ा जोन है। इन तीनों जोनों में वसूली के लिए अलग-अलग लक्ष्य दिया जाता है। अधिकारियों ने अब अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए एक नया कारनामा अंजाम दिया है। हाउस टैक्स वसूलने के लिए इन अधिकारियों ने नगर निगम क्षेत्र में खाली पड़े 10 हजार ऐसे मकानों पर बकाया हाउस टैक्स के नोटिस जारी किये हैं। जिन 10 हजार मकानों में बिल्डरों के खाली पड़े फ्लैट और खाली मकान हैं, तथा इन मकानों की अभी बिक्री भी नहीं हो सकी है।
यह फ्लैट और मकान खाली पड़े हुए हैं। नगर निगम अधिकारियों ने इन मकानों के नाम से बकाया हाउस टैक्स के बिल जारी कर दिये हैं तथा अपने रजिस्टरों में बकाया की लंबी सूची दर्ज कर ली है कि बिल्डरों और मकान स्वामियों ने हाउस टैक्स जमा नहीं कराया है। जबकि हकीकत यह है कि इन मकानों में अभी तक कोई निवास भी नहीं कर रहा है, लेकिन नगर निगम ने अपने रिकार्ड में चढ़ा रखा है कि इन मकानों से हाउस टैक्स न वसूल हो पाने से सालाना 50 करोड़ से अधिक राजस्व का नुकसान हो रहा है। नगर निगम ने अपने बकाया बिलों को लंबित दिखाने के साथ-साथ एक नया खेल यह भी किया है कि भूखंड के क्षेत्रफल 50, 200, 400 वर्गमीटर या इससे अधिक होने पर 100, 1000, 5000 एवं 15000 रुपये जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है।
30 दिन के भीतर तय धनराशि जमा नहीं कराने की स्थिति में जुर्माने की धनराशि पर पांच प्रतिशत जुर्माना के साथ वसूलने का भी अधिकार निगम प्रशासन को है। इस वक्त नगर निगम क्षेत्र में 35,500 घरों से हाउस टैक्स (संपत्ति कर) वसूला जा रहा है। साढ़े 10 हजार ऐसे मकान हैं, जिनसे संपत्ति कर नहीं लिया जा रहा है। ऐसे मकानों का सर्वे कराकर उन पर टैक्स लगाया जाएगा, जिससे निगम की आय बढ़ाई जा सकेगी। इसी तरह लगभग 230 भवनों से नगर निगम व्यवसायिक कर वसूल रही है। हालांकि इनकी संख्या फिलहाल छह हजार से अधिक हो चुकी है। ऐसे मकानों का भी सर्वे कराकर संपत्ति कर वसूलने की तैयारी की जा रही है। नगर निगम को गृहकर के रुप में फिलहाल 6904 लाख रुपये की आय हो रही है। जबकि व्यवसायिक भवनों से भी आय हो रही है।
इस आय को तीन गुना तक करने की नगर निगम की तैयारी है। गृहकर के मुकाबले व्यवसायिक भवनों से तीन गुना शुल्क वसूला जाता है। कुल छह टीमें लगाई गई है, जो सर्वे का काम कर रहीं हैं। नगर निगम के कर निर्धारण अधिकारी नर सिंह राणा ने बताया कि कर विभाग से जुड़ी टीमें सर्वे में लगी हैं। जिन भवनों से व्यवसायिक कार्य संचालित हो रहे हैं, ऐसे भवन स्वामियों को नोटिस जारी किया गया है। रिहायशी मकानों के लिए भी सर्वे किया जा रहा है। कुछ पुराने भवन हैं, जिनका कर निर्धारण बहुत समय से नहीं हुआ है, ऐसे मकानों का दोबारा सर्वे किया जा रहा है। कर लगाने का उद्देश्य नगर निगम की आय बढ़ाना है। नगर निगम की आय बढ़ने पर नागरिक सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
नगर निगम क्षेत्र में 10 हजार से अधिक फ्लैट और भवन ऐसे हैं, जिनका हाउस टैक्स जमा नहीं हो रहा है। ऐसे फ्लैट और भवनों का अगले महीने से सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। सर्वे के बाद उनसे जुर्माने के साथ हाउस टैक्स वसूला जाएगा।
-हरिकांत अहलूवालिया, महापौर, नगर निगम, मेरठ।

