- गुटखे और तंबाकू बांट रहे कैंसर की बीमारी
- जिला अस्पताल से दिल्ली भेजे जा रहे कैंसर रोगी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जिले में तेजी से मुंह व जीभ के कैंसर के रोगी बढ़ रहे हैं। इसकी वजह गुटखे, खैनी, पान मसाला और तंबाकू का सेवन करना है। जिला अस्पताल से हर माह करीब 100 कैंसर के संदिग्ध रोगियों को दिल्ली हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान चलाया जाता है, लेकिन लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
जिले में मुंह व जीभ के कैंसर के रोग तेजी से अपने पांव पसार रहा है। जिला अस्पताल के दंत रोग विभाग में रोजाना करीब 70-80 मरीज आते हैं। इनमें अधिकांश मरीज दांतों के होते हैं, जबकि कुछ मुंह और मसूड़ों के होते हैं, लेकिन रोजाना औसतन तीन मरीज मुंह व जीभ के कैंसर के संग्दिध मरीज आ रहे हैं। जिला अस्पताल में यूं तो कैंसर की जांच की व्यवस्था नहीं हैं, लेकिन मरीज को लक्षण होने को लेकर उन्हें जांच और उपचार के लिए दिल्ली भेजा जाता है। इसकी वजह चिकित्सक गुटखे, पान मसाला और तंबाकू का सेवन करना और धूम्रपान करना बताते हैं। तंबाकू के सेवन के साथ शराब पीना भी एक मुख्य वजह है।
ऐसे लोगों में यह रोग जानलेवा बन जाता है। मुंह व जीभ के कैंसर के संदिग्ध रोगियों को जिला अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा गुटखे, पान मसाला और तंबाकू का सेवन न करने के प्रति जागरूक किया जाता है, बल्कि उन्हें इससे छुटकारा दिलाने के लिए निकोटिक्स की गोलियां भी दी जाती है। गत 30 मार्च को नेशनल ओरल हेल्थ डे पर जिला अस्पताल में एक कार्यक्रम आयोजित करके लोगों को मुंह व जीभ के कैंसर के प्रति जागरूक किया गया था और लोगों से मुंह के कैंसर से बचने के लिए गुटखे, पान मसाला और तंबाकू का सेवन न करने की अपील की गई थी।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ दंत चिकित्सक डा. अमित माथुर का कहना है कि जिला अस्पताल में गत वर्ष तक हर माह करीब 60-65 मरीज मुंह या जीभ के कैंसर के लक्षण वाले आते थे, लेकिन अब हर माह ऐसे करीब 100 मरीज आ रहे हैं। जिला अस्पताल में जांच की व्यवस्था नहीं है, इसलिए उन्हें दिल्ली हायर सेंटर भेजा जाता है। पिछले करीब 100 मरीजों को कैंसर की जांच और उपचार के लिए हायर सेंटर भेजा गया। जिला अस्पताल द्वारा वर्ष में अनेक कार्यक्रम आयोजित करके लोगों को इस कैंसर के प्रति सचेत किया जाता है।
मुंह के कैंसर के लक्षण
- मुंह या जीभ पर सफेद छालों का होना और उपचार के बावजूद ठीक न होना।
- मुंह या जीभ में जख्म हो जाना।
- मुंह और जबाड़े का कम खुलना।
- मुंह से अक्सर खून का आना।
- मुंह से लगातार बदबूदार पानी निकलना।

