Monday, May 11, 2026
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सैकड़ों करोड़ की संपत्ति प्राधिकरण ने कर दी खुर्द-बुर्द

  • कंकरखेड़ा बाइपास पर गड्ढे को भूला मेडा, पूरे शहर में कार्रवाई
  • यहां कैसे कुंभकर्णी नींद में है मेडा इंजीनियर ?

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ विकास प्राधिकरण की सैकड़ों करोड़ की सम्पत्ति खुद-बुर्द कर दी हैं। हम बात कर रहे हैं कंकरखेड़ा बाइपास पर स्थित गड्ढे की। ये प्राधिकरण की करोड़ों की सम्पत्ति हैं। इसकी दो बार नीलामी हुई, लेकिन किसी न किसी वजह से नीलामी टल गई। इस तरह से ये सम्पत्ति नीलाम नहीं हो सकी। दरअसल, करोड़ों की इस सम्पत्ति की चारों तरफ से अवैध कब्जे हो चुके हैं। क्लीनिक, स्कूल आदि व्यवसायिक प्रतिष्ठान इसमें बनकर तैयार हो गए हैं,

लेकिन इसके भू-भाग को मेडा इंजीनियर बचा नहीं सके। वर्तमान में भी इसमें व्यापक स्तर पर अवैध निर्माण चल रहा हैं, जिसे रोकना तो दूर कोई कार्रवाई इसमें नहीं की गई हैं। इस तरह से मेडा की करोड़ों की सम्पत्ति आंखों के सामने खुर्द-बुर्द हो रही हैं, इसको बचाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किये जा रहे हैं। यही वजह है कि जो चाहता हैं, वहीं अवैध कब्जा कर निर्माण शुरू कर देता हैं।

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मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) की कंकरखेड़ा बाइपास पर बेशकीमती जमीन गड्ढे में तब्दील हो गई हैं। लगता है इसे प्राधिकरण के अफसर भूल गए हैं। शहर के बीच में इस जमीन पर अब लोग अवैध कब्जे करके व्यापारिक प्रतिष्ठान का निर्माण कर रहे हैं। ये भी प्राधिकरण के इंजीनियरों को नहीं दिख रहा हैं। यही वजह है कि एक के बाद एक इस जमीन पर अवैध कब्जे होते जा रहे हैं। प्राधिकरण शहर भर में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चला रहा हैं, लेकिन अपनी जमीन पर हो रहे अवैध कब्जों और निर्माणों को लेकर लगता है वह नींद में हैं।

कुंभकर्णी नींद कब टूटेगी, जब निर्माण पूरे हो जाएंगे। कई लिंटर लोगों ने डाल लिये हैं, लेकिन ये प्राधिकरण के इंजीनियरों को नहीं दिख रहे हैं। दअरसल, कंकरखेड़ा बाइपास पर शहर से जब आप जाएंगे तो राइट हैंड पर एक बड़ा गड्ढा हैं। इसमें पानी भरा रहता हैं। वर्षों से इसे इसी तरह से देखते आ रहे हैं। इसका कुछ भाग आगे का हैं, जिसमें कुछ लोग अवैध निर्माण करते जा रहे हैं। बहुत सारे व्यापारिक प्रतिष्ठान बनकर तैयार हो गए हैं। इस जमीन के फ्रंट पर ही लोग कब्जे कर रहे हैं। इस पर मेडा के अफसर क्योंकि ध्यान नहीं दे रहे हैं? ये बड़ा सवाल हैं।

फ्रंट ही जमीन वेशकीमती होती है, जिस पर अवैध कब्जे हो गए हैं। यदि ये सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान अवैध हैं तो फिर इनका निर्माण कैसे होने दिया गया? जमीन मेडा की थी, तब तो अवैध निर्माण पर सख्ती के साथ रोक लगनी चाहिए थी। ये अवैध निर्माण किसकी शह पर हुआ? इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं? इन पर एफआईआर क्यों नहीं करायी गयी? ये तमाम सवाल प्राधिकरण के इंजीनियरों को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

शहर भर में अवैध निर्माण पर आचार संहिता के दौरान भी मेडा का बुलडोजर चल रहा हैं, फिर कंकरखेड़ा बाइपास पर स्थित मेडा की जमीन को लेकर क्यों चुप्पी हैं? ये चुप्पी बहुत कुछ कह रही हैं, जिसके लिए प्राधिकरण अफसरों को निरीक्षण कर कार्रवाई करनी चाहिए। एक माह के भीतर यहां पर एक प्रतिष्ठान का लिंटर डाल दिया गया। इस पर न तो सील की कार्रवाई हुई है और न ही नोटिस काटा गया हैं।

इसका मतलब साफ है कि प्राधिकरण इंजीनियर की सहमति से ही ये अवैध निर्माण लिंटर तक पहुंच गया हैं। इंजीनियर ने कार्रवाई की होती तो लिंटर नहीं डल पाता। आचार संहिता के दौरान बुलडोजर चलाने पर रोक थी, सील और एफआईआर करने पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं था। वो कार्रवाई क्यों नहीं की गई? ये बड़ा सवाल हैं।

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तोड़फोड़ करने पहुंची मेडा टीम का विरोध, टीम बैरंग लौटी

मेरठ: मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) की टीम को लोगों की भीड़ ने दौड़ा लिया। ये तब हुआ, जब मोदीपुरम स्थित उदयकुंज में अवैध निर्माण पर मेडा इंजीनियरों की टीम तोड़फोड़ करने के लिए गई थी। टीम बैरंग लौट आयी, लेकिन इंजीनियरों की तरफ से एक पल्लवपुरम थाने में तहरीर दी गई हैं, जिसमें कहा गया है कि विधिक कार्रवाई के दौरान मेडा इंजीनियरों के कार्य में बाधा उत्पन्न की गई। सात लोगों के खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई हैं। ये मामला है उदयकुंज कॉलोनी का। यहां पर मेडा की टीम सुबह पहुंची, जहां पर टीम तोड़फोड़ करती, उससे पहले ही लोगों की भीड़ ने विरोध कर दिया।

ज्यादा बवाल खड़ा नहीं हो जाए, इसके बाद मेडा की टीम बैरंग लौट गई। मेडा के जोनल अधिकारी अर्पित यादव के अनुसार मेडा की टीम को भगाने में मुख्य साजिशकर्ता अजय मलिक, संजय, हुकुम सिंह, महावीर, धर्मपाल, राजपाल, अनुराग के विरुद्ध थाना पल्लवपुरम थाने में तहरीर दी गयी है। जोनल अधिकारी अर्पित यादव ने बताया कि फिर से इसमें तोड़फोड़ की कार्रवाई की जाएगी तथा इसके लिए आवश्यक पुलिस बल की मांग एसएसपी से की गई हैं। फिर से ध्वस्तीकरण की तारीख भी लगा दी गई हैं।

इंजीनियरों की टीम पर पथराव

मेरठ: अजय मलिक की उदय सिटी गेट के पास पल्लवपुरम फेज-2 रुड़की रोड पर बिना मानचित्र स्वीकृत कराये लगभग 40 हजार वर्ग मीटर में भूतल पर डीपीसी डालकर 30 से 35 आरसीसी कॉलम खड़े कर व्यवसायिक निर्माण कार्य किया जा रहा था, जिस पर मेडा इंजीनियरों की टीम ने शनिवार को बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण कर दिया। निर्माणकर्ता अजय व अन्य अज्ञात व्यक्तियों ने सरकारी कार्य में बाधा डालने की, जिसमें टीम पर पथराव भी कर दिया। इसके बाद मेडा की टीम ने इधर-उधर दौड़कर जान बचाई।

मेडा की तरफ से पथराव व हमला करने का मामला पल्लवपुरम थाने में दर्ज कराया हैं। इसके अलावा बालेश्वर, महावीर, धर्मपाल, राजपाल, अनुराग व संजय आदि द्वारा खसरा संख्या 1474ए, 1476ए, 1477ए, 1478ए, 1480ए, 1481ए, 2905ए व 2907 ग्राम दुल्हैड़ा चौहान उदय विहार के पीछे निकट उदय सिटी पल्लवपुरम फेज-2 पर प्राधिकरण से बिना लेआउट स्वीकृत कराये बिना लगभग 25 हजार वर्ग मीटर अवैध कालोनी विकासित की जा रही थी। तोड़फोड़ का विरोध करने पर मेडा टीम पर पथराव कर दिया। टीम ने इधर-उधर दौड़कर अपनी जान बचाई।

आचार संहिता में लगाया यूनिपोल

मेरठ: चुनाव आचार संहिता में कानून का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। बड़ी बात ये है कि नगर निगम द्वारा होर्डिंग्स का ठेका न छोड़े जाने के बावजूद शहर में धड़ल्ले से जगह-जगह यूनिपोल व होर्डिंग्स लगाये जा रहे हैं। नगर निगम के अधिकारियों के पास तक शिकायत पहुंचती है, लेकिन ठेकेदार से सेटिंग के चलते वह इन शिकायतों को अनसुना कर देते हैं। पूरे प्रदेश में चुनाव आचार संहिता लगी हुई है। इसके बावजूद मेरठ के व्यस्ततम चौराहे बुढ़ाना गेट पुलिस चौकी के निकट शुक्रवार रात्रि में अवैध यूनीपोल लगा दिया गया।

यह यूनिपोल बुढ़ाना गेट से सत्यम सिनेमा को जाने वाले मार्ग पर बीचों बीच लगाया गया है। यूनिपोल रात्रि के अंधेरे में लगाया गया है। नगर निगम ने वर्तमान में होर्डिंग्स का ठेका नहीं छोड़ रखा है। मालूम हो कि चुनाव आचार संहिता की आड़ में इस तरह के कार्य पूरे नगर निगम क्षेत्र में धड़ल्ले से किया जा रहे हैं। नगर निगम अधिकारियों की मौन सहमति से यह कार्य अंजाम दिया जाता है। अति व्यस्तम बुढ़ाना गेट चौराहे पर इस तरह से रात के अंधेरे में लगाया गया यूनिपोल नगर निगम की पूरी कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाता है।

यह यूनिपोल इतनी जल्दबाजी में लगाए जाते हैं कि इनके लगाने के मानक को भी ध्यान नहीं रखा जाता। यही कारण है कि पहले भी मेरठ शहर में तेज आंधी बारिश में अनेक यूनिपोल गिर चुके हैं और एक की मौत और कई लोग घायल हो चुके हैं। शिकायत यूपी के मुख्यमंत्री के साथ-साथ मंडल आयुक्त मेरठ मंडल, जिलाधिकारी मेरठ तथा नगर आयुक्त नगर निगम मेरठ से की गई है।

बागपत रोड की स्ट्रीट लाइट भी खराब

मेरठ: बागपत रोड पर चार साल पहले स्ट्रीट लाइट का कार्य मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने कराया था। करीब तीन किलोमीटर की दूरी तक स्ट्रÑीट लाइट लगाई गयी थी। फिलहाल ये स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी हैं। हालांकि मेरठ विकास प्राधिकरण इस स्ट्रीट लाइट की लाइन को नगर निगम को हैंडओवर कर चुका हैं, लेकिन नगर निगम ने भी इस तरफ से आंखें बंद कर ली हैं। भाजपा का क्षेत्रीय कार्यालय भी बागपत रोड पर हैं।

भाजपा के बड़े नेताओं का यहां से आवागमन होता हैं, फिर भी नगर निगम के अधिकारियों में किसी तरह का डर-भय नहीं हैं, तभी तो खराब हो चुकी स्ट्रीट लाइटों को भी ठीक नहीं कराया जा रहा हैं। आखिर इसके जिम्मेदारों पर कब कार्रवाई होगी? हालात तो पूरे शहर में स्ट्रीट लाइटों के खराब हैं, लेकिन मेडा ने करोड़ों खर्च जनता स्ट्रीट लाइट की सुविधा उपलब्ध कराई थी, लेकिन उस सुविधा पर भी नगर निगम ने पानी फेर दिया हैं। मेरठ विकास प्राधिकरण के तत्कालीन उपाध्यक्ष राजेश पांडेय ने अपने कार्यकाल के दौरान चार वर्ष पहले बागपत रोड पर स्ट्रीट लाइट लगवाई थी।

करोड़ों रुपये इस पर खर्च मेडा ने किये थे, फिर भी स्ट्रीट लाइट को दुरुस्त नहीं रखा गया। प्राधिकरण के सहायक अभियंता राकेश महलवाल ने बताया कि बागपत रोड पर स्ट्रीट लाइट मेडा ने लगाई थी। चार वर्ष पहले लगाया गया था। इनको मेडा ने नगर निगम को एक वर्ष बाद ही हैंडओवर कर दिया था। मेडा अब इनकी देखरेख नहीं करता। देखरेख की जिम्मेदारी नगर निगम की हैं, वहीं इसमें जो लाइट खराब हो गई हैं, उन्हें ठीक करा सकता हैं। इसी तरह का बिजली बंबा बाइपास पर स्ट्रीट का मामला हैं। उसे भी नगर निगम के हैंडओवर किया जा चुका हैं। वहां भी स्ट्रीट लाइट नहीं जल रही हैं। लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

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