Tuesday, March 24, 2026
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कानून का राज कायम करने की जरूरत

SAMVAD

 


स्विट्जरलैंड की एक अदालत ने ब्रिटेन के सबसे अमीर भारतीयों में गिने जाने वाले भारतीय मूल के हिंदुजा परिवार के चार सदस्यों को अपने नौकरों के शोषण के मामले में दोषी करार देते हुए उन्हें चार से साढ़े चार वर्ष तक की कारागार की सजा सुनाई है। स्विस प्रशासन इस परिवार द्वारा अपने नौकरों का शोषण किए जाने पर गत 6 वर्षों से नजर रख रहा था। हिंदुजा परिवार के सदस्यों पर आरोप है कि उन्होंने अपने जेनेवा स्थित बंगले में काम करने के लिए भारत से कामगारों को बुलाया और उनका शोषण किया। इस परिवार पर मानव तस्करी के भी आरोप हैं। हिंदुजा परिवार ने अपने नौकरों के पासपोर्ट जब्त कर लिए थे और उन्हें न्यूनतम से भी कम मजदूरी दे रहे थे। साथ ही इन कामगारों के बाहर निकलने व कहीं आने-जाने पर भी हिंदुजा परिवार की ओर से पूरी रोक लगी हुई थी। सरकारी वकील के मुताबिक हिंदुजा परिवार अपने एक कुत्ते पर एक नौकरों से ज्यादा पैसे खर्चकरता था। कई नौकरों को बिना छुट्टी के पूरे सप्ताह काम करना होता था। उन्हें वेतन भी स्विस करेंसी यानी फ्रैंक्स में देने के बजाय भारतीय रुपये में दिया जाता था। यह अदालती फैसला आने के एक सप्ताह पहले हिंदुजा परिवार ने भारी रकम चुकाकर तीन पीड़ित कामगारों से अदालत के बाहर समझौता भी किया था। गौर तलब है कि मूल रूप से भारतीय, हिंदुजा परिवार का लगभग 47 बिलियन डॉलर का कारोबारी साम्राज्य है। हिंदुजा समूह का निवेश मुख्यत: कंस्ट्रक्शन, होटल, कपड़े, आॅटोमोबाइल, आॅयल, बैंकिंग और फाइनेंस जैसे क्षेत्र में है। ब्रिटेन में हिंदुजा परिवार की अनेक बहुमूल्य इमारतें भी हैं। जेनेवा के इस अदालती फैसले ने एक बात तो साबित कर ही दी है कि स्विट्जरलैंड में न केवल कानून का राज है बल्कि वहां का कानून इस बात की भी परवाह नहीं करता कि आरोपी कितना अमीर व कितना रसूखदार है। साथ ही यह भी कि शोषित व पीड़ित वर्ग का व्यक्ति कितना ही गरीब व असहाय क्यों न हो मानवाधिकारों का पक्षधर वहां का कानून उसके साथ है।

अब जरा इसी अदालती फैसले के सन्दर्भ में हम अपने देश के वास्तविक हालात का भी आंकलन करें। भारत सरकार द्वारा बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 के अनुच्छेद 24 के अनुसार कारखानों, खदानों एवं जोखिम भरे कार्यों में किसी बालक, जिसकी आयु 14 वर्ष से कम हो, नहीं लगाया जाएगा। हमारे देश में बाल संरक्षण कानून के अतिरिक्त विस्तृत श्रम कानून भी बने हुए हैं। इन कानूनों की पालना व इन्हें लागू करवाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बाकायदा विभाग हैं,विशेष अदालते हैं। गोया पूरी मशीनरी श्रम व बाल संरक्षण हेतु दिखाई देती है जिन पर सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च भी होते हैं। परंतु इन सब के बावजूद धरातलीय स्थिति क्या है, यह कौन नहीं जानता। मुख्य मार्ग के ढाबों से लेकर मंत्रियों, सांसदों विधायकों व अधिकारियों के घरों तक में श्रम व बाल संरक्षण कानून की धज्जियां उड़ती देखी जा सकती हैं। मजदूरों की तो बात छोड़िये अनेक निजी स्कूल्स तक में अध्यापकों व अध्यापिकाओं को वेतन कुछ दिया जाता है तो रजिस्टर में दस्तखत अधिक धनराशि लिखकर कराई जाती है। बंधुआ मजदूरी कानून बने होने के पर भी ठेकेदारी प्रथा के तहत बंधुआ मजदूर काम करते मिल जाएंगे जिन्हें ठेकेदार अपनी मनमानी रकम देकर उनसे 8 से 12 घंटे तक काम करवाता है। र्इंट के भट्ठों से लेकर सड़क व भवन निर्माण क्षेत्र में भी ऐसे तमाम मजदूर काम करते देखे जा सकते हैं।

अपने देश में ‘कानून का राज’ कितना कायम है यह देखने के लिएदर्जनों ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे, जबकि किसी जघन्य अपराधी ने सत्ता में आने के बाद अपने ही ऊपर चल रहे आपरधिक मुकददमों को ही वापस ले लिया। यह उदाहरण भी मिलेगा कि सत्ता के करीबी व्यक्ति पर चलने वाला दंगे, फसाद, रेप व हत्या तक का मुकदमा सरकार द्वारा वापस ले लिया गया। कई बार देश के बड़े बड़े कानूनविद यहां तक कि अनेक पूर्व न्यायाधीश यह कह चुके हैं कि देश की जेलें आमतौर पर ऐसे गरीब व असहाय लोगों से भरी पड़ी हैं, जो आर्थिक रूप से गरीब हैं और लंबी कानूनी लड़ाई लड़ पाने में असमर्थ हैं। भारत में अभी पिछले दिनों हुआ बहुचर्चित पुणे पोर्शे कार एक्सीडेंट मामला भी एक बड़ा उदाहरण है, जिसमें दो इंजीनियरों को कुचल दिया गया था। इस मामले में नाबालिग चालक ने दावा किया था कि दुर्घटना के समय उसका ड्राइवर कार चला रहा था। लेकिन जांच में उसका यह बयान झूठा निकला। यहां भी पैसे और रसूख के बल पर वह अपने ड्राइवर को पैसों के एवज में जेल भेजकर स्वयं को बचाना चाह रहा था। परंतु चूंकि मीडिया ने इस मामले को तूल दे दिया था और कार का रजिस्ट्रेशन भी नहीं था, उधर कुचले गए दो व्यक्ति भी इंजीनियर थे इसलिए जांच निष्पक्ष करनी पड़ी और रसूखदारों की साजिश धरी रह गई।

याद कीजिए फरवरी 2022 में जब सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने कहा था कि-‘जवाहर लाल नेहरू का भारत ऐसा बन गया है जहां मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लोकसभा में लगभग आधे सांसदों के खिलाफ रेप और हत्या के आरोप लंबित हैं। हालांकि यह भी कहा जाता है कि इनमें से कई आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।’ क्या पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश और दुनिया ने यह नहीं देखा कि किस तरह विपक्षी दलों के नेताओं यहां तक कि मुख्यमंत्रियों तक को भ्रष्टाचार के मामलों में निशाना बनाते हुये उन्हें जेल भेजा गया। अनेक नेताओं पर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा छापेमारियां की गई। परंतु जब वही अपराधी सत्ता की शरण में चला गया तो उसे मंत्री या सांसद बनाकर महिमामंडित किया गया?


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