Tuesday, May 26, 2026
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‘धोखे’ की नींव पर तो खड़ा नहीं हो रहा आपका महल

  • दोयम दर्जे की र्इंट को पानी से लाल कर अव्वल में बेचा जा रहा
  • रेत में राख और पानी मिलाकर दे रहे धोखा

जनवाणी संवाददाता |

रोहटा: मेहनत की गाढ़ी कमाई से सपनों का महल बनाने की यदि सोच रहे हैं तो सावधान हो जाइए। जिस सपनों के महल को आप अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई से बना रहे हैं। दरअसल, कुछ लोग धोखे की नींव पर सपनों के महल को बनाने पर मजबूर कर रहे हैं। मकान बनाने में इस्तेमाल होने वाली दोयम दर्जे की र्इंट को पानी डालकर अव्वल दर्जे की साबित करके बेचा जा रहा है तो वहीं चिनाई में इस्तेमाल होने वाले रेत में भी जमकर राख और पानी मिलाया जा रहा है।

मकान बनाने के लिए सबसे पहले जरूरी र्इंट की होती है, लेकिन इसी र्इंट पर खड़े होने वाले सपनों के महल में जमकर धोखाधड़ी की जा रही है। भट्ठों से सस्ते दाम पर घटिया और दोयम दर्जे की र्इंट खरीद कर उसकी सप्लाई करने वाले कुछ स्वार्थी लोग इन पर घंटों तक पानी बहाकर इन्हें लाल रंग में तब्दील करते हैं और फिर शहर के भोले भाले और सीधे लोगों को अव्वल दर्जे की र्इंट के रेट के दाम में बेच देते हैं। र्इंट बेचने में इस धोखाधड़ी का शिकार आप भी हो सकते हैं। र्इंट की सप्लाई करने वाले यह काले कारोबारी इतने चालाक होते हैं कि आप भी धोखा खा जाएंगे।

बिल्कुल लाल दिखने वाली अव्वल दर्जे की र्इंट को आप पहचान से इनकार कर देंगे कि वह अव्वल दर्जे की र्इंट है या फिर दोयम दर्जे की, लेकिन पानी के बहाव ने उसे लाल रंग रूप देकर अव्वल बना दिया जाता है। जिससे आप आसानी से धोखा खा सकते हैं और इसी धोखे की नींव पर आपके सपनों का महल गलती से खड़ा हो सकता है, जो भविष्य में आपके लिए नींव में लगी खराब र्इंट के कारण गिर भी भी सकता है।

इसलिए र्इंट खरीदते समय सबसे पहले सूझबूझ और समझदारी की जरूरत है। इसके अलावा मकान बनाने में दूसरी चीज की सबसे ज्यादा जरूरत चिनाई में रेत की पड़ती है। रेत में भी जमकर कुछ लोग हेराफेरी करके राख और सस्ता क्वालिटी का नदी का रेत मिलाकर जमुना के अच्छे रेत के दामों में बेच रहे हैं। यही नहीं रेत में वजन बढ़ाने और उसे मिक्स करने के लिए इसमें भी जमकर पानी चलाया जाता है। जिससे आप देखकर ऊपर से यह पहचान पाना मुश्किल हो सकता है कि रेत जमुना का है या नही,या इसमें कोई मिलावट है।

जगह-जगह सजे हैं धोखे के स्टेशन

मेरठ-बड़ौत रोड पर खिवाई से लेकर बाइपास तक जगह-जगह पानी के स्टेशन लगे हुए हैं। जहां ट्यूबवेल के पाइप को ऊपर लगाकर र्इंट ढोने वाले डंपरों पर घंटे भर पानी चलाने की एवज में मोटी वसूली की जाती है। जिसका घंटे पानी चलाने के बाद र्इंट का रंग लाल हो जाता है और दोयम और घटिया किस्म की र्इंट भी पानी चलाने के बाद बिल्कुल लाल होने के कारण अव्वल दर्जे की नजर आती है।

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