- महानगर के आउटर इलाकों स्थिति ज्यादा खराब बाहरी गाड़ियां निशाने पर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर में वाहन चेकिंग के नाम पर स्टॉफ जेब गरम करने के अलावा कुछ नहीं कर रहा। इस अवैध वसूली पर अंकुश लगाने में पुलिस अफसर भी बेबस नजर आते हैं। पूरे महानगर में चेकिंग के नाम पर केवल अवैध वसूली की जा रही है और कुछ नहीं। महानगर के आउटर एरिया का सबसे बुरा हाल है। वैसे चेकिंग करने वाले स्टॉफ के रडार पर बाहरी नंबर की गाड़ियां अधिक होती हैं। चेकिंग के नाम पर यह वसूली संगठित होकर की जा रही है। हालत कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यातायात नियंत्रण भूलकर केवल वाहनों से चेकिंग के नाम पर उगाही पर ही ध्यान है।
जिले में वाहनों की चेकिंग के नाम पर टैÑफिक स्टॉफ धड़ल्ले से अपनी जेब गर्म करने में जुटी है। अवैध वसूली पर किसी तरह का शिकंजा नहीं कसा जा रहा है। वाहन चालकों को ट्रैफिक नियम कायदों का पाठ पढ़ाने वाली ट्रैफिक पुलिस की अवैध वसूली का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। महानगर क्षेत्र के अलग अलग हिस्सों में वाहनों की चेकिंग और ट्रैफिक नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए खड़ी ट्रैफिक पुलिस की अवैध वसूली अभी भी बदस्तूर जारी है। ट्रैफिक एसआई से लेकर हेडकांस्टेबल और कांस्टेबल व ट्रैफिक होमगार्ड शहर में चेकिंग प्वाइंट पर खड़े होकर सुबह से ही दुपहिया वाहनों और चौपहिया वाहनों को चेक करने में जुट जाते हैं।
ऐसे होती है वसूली
दुपहिया वाहन चालकों को हेलमेट न लगाने और वाहन की आरसी न दिखाने तथा नंबर प्लेट पर आढ़े तिरछे नंबर लिखे जाने या तीन सवारी होने पर ट्रैफिक पुलिस के होमगार्ड उन्हें बीच सड़क पर आगे आकर हाथ देकर रोक लेते हैं। वाहन चालक को ट्रैफिक कांस्टेबल के पास ले जाता है। कांस्टेबल वाहन चालक से कागजात से लेकर ट्रैफिक नियमों की अवहेलना का हवाला देकर उनका एक हजार रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक का चालान करने की चेतावनी देता है। बस यहीं से शुरू हो जाता है अवैध वसूली का असली खेल। वाहन चालक पर ट्रैफिक पुलिस जिस तरह का चालान करने के लिए कहती है।
उसी तरह के चालान की एवज में उससे अवैध वसूली के रूप में रकम वसूली जाती है। रुपये लेते वक्त होमगार्ड या ट्रैफिक पुलिस चालक को यातायात बूथ में ले जाकर हाथ बंद मुट्ठी में नोट थाम लेते हैं। उसके बाद वाहन चालक आराम से अपने वाहन पर बैठकर निकल जाता है। यह अवैध वसूली का खेल शहर के बिजली बंबा ल ब्लॉक चौराहे का एक चेकिंग प्वाइंट पर नहीं खेला जाता। यह खेल ट्रैफिक पुलिस शहर के अलग अलग क्षेत्रों में हर रोज नये प्वाइंट बनाकर शुरू करती है। चेकिंग के नाम पर ट्रैफिक पुलिस सैकड़ों लोगों से रोज अवैध वसूली करती है। यही वजह है कि लोगों की जुबान पर एक ही बात रहती है कि ट्रैफिक पुलिस ने पकड़ लिया था, लेकिन रुपये लेकर छोड़ दिया।

