Tuesday, May 26, 2026
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Mock Drill In UP: उत्तर प्रदेश के 19 जिलों में होगा मॉक ड्रिल,तीन श्रेणी में बांटे गए शहर, डीजीपी प्रशांत कुमार ने दिए ये निर्देश

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है। वहीं, इसके मद्देनजर गृह मंत्रालय ने कल यानि 7 मई 2025 को देशभर में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल करने का आदेश दे दिया है। बताया जा रहा है, यह ड्रिल देश के करीब 244 जिलों में आयोजित की जाएगी। इसमें आम ना​गरिकों, छात्रों और सिविल डिफेंस से जुड़े लोगों को युद्ध जैसी परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

PM मोदी संग NSA अजीत डोभाल की बैठक

जिसके बाद केंद्र सरकार की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस दौरान पीएमओ दफ्तर में वीडियो कांफ्रेंसिंग के ​जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संग एनएसए अजीत डोभाल की बैठक करीब आधे घंटे तक हुई। इस बैठक में कईं मुख्य सचिव शामिल रहे। इस बैठक में हवाई हमलों, सायरन और ब्लैकआउट पर चर्चा हुई।

DGP प्रशांत कुमार ने बताया?

इस दौरान उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि राज्य के 19 जिलों में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल अभ्यास को कराया जाएगा। जिसमें जिलों को तीन श्रेणी में बांटा गया है। जिसमें एक श्रेणी में 1 जिला,दूसरी श्रेणी में 16 जिले और वहीं तीसरी श्रेणी में 2 जिले शमिल है। चलिए इसके बारे में और कुछ जानते हैं..

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रशांत कुमार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है, जिसमें उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों में आगामी मॉक ड्रिल्स (Mock Drills) के आयोजन की बात की है। इन मॉक ड्रिल्स का उद्देश्य नागरिकों और सुरक्षा बलों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार करना और उनकी प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाना है।

मुख्य बिंदु (Main Points)

  • संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान: DGP ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और वहां पर मॉक ड्रिल्स आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।
  • सुरक्षा बलों की तैयारी: इन मॉक ड्रिल्स के माध्यम से सुरक्षा बलों को विभिन्न आपातकालीन परिस्थितियों में उनकी भूमिका और प्रतिक्रिया की प्रक्रिया से अवगत कराया जाएगा।
  • नागरिकों की जागरूकता: नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों में उनकी भूमिका और सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक किया जाएगा।

क्यों किया जाता है Blackout?

ब्लैकआउट (Blackout) एक सुरक्षा अभ्यास होता है जिसे विशेष परिस्थितियों में किया जाता है, खासतौर पर जब:

1. हवाई हमले या युद्ध जैसी स्थिति की तैयारी के लिए

  • जब कोई देश युद्ध या हवाई हमले की आशंका को लेकर सतर्क होता है, तो शहरों में बिजली की आपूर्ति को पूरी तरह बंद कर दिया जाता है ताकि दुश्मन विमान रात के समय रोशनी देखकर लक्ष्य न बना सकें।
  • यह एक रणनीतिक उपाय है जिससे दुश्मन को भ्रमित किया जा सके।

2. नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण (Civil Defence Mock Drill)

  • लोगों को सिखाने के लिए कि किसी आपदा (जैसे युद्ध, आतंकी हमला, हवाई हमला) के समय कैसे व्यवहार करना चाहिए।
  • सायरन बजाकर संकेत दिए जाते हैं और लोगों को अंधेरे में रहने, खिड़कियां बंद रखने और बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है।

3. आपदा प्रबंधन की तैयारी

  • यह देखा जाता है कि आपात स्थिति में बिजली कटने पर अस्पताल, फायर ब्रिगेड, पुलिस आदि सेवाएं कितनी तेजी से बैकअप पर काम करने लगती हैं।
  • संचार, परिवहन और आपात सेवाओं की कार्यप्रणाली की जांच होती है।

4. जनता को जागरूक करना

  • लोगों को यह समझाना कि अगर वास्तव में कोई संकट आता है, तो उन्हें क्या करना चाहिए।
  • कुल मिलाकर, ब्लैकआउट एक पूर्व-सावधानी भरा कदम होता है, जिससे आपातकाल में जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।
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