जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को मुंबई में मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीसरी द्विमासिक बैठक के बाद प्रमुख नीतिगत दरों की घोषणा की। गवर्नर ने बताया कि रेपो रेट को 5.50% पर यथावत रखने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही मौद्रिक नीति का रुख ‘तटस्थ’ बना रहेगा। यह निर्णय भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। रेपो रेट में बदलाव नहीं होने से, ईएमआई या ब्याज दरों में कोई राहत नहीं मिलेगी।
रेपो रेट पर क्या कहा आरबीआई ने?
गवर्नर ने बताया कि रेपो रेट 5.5% पर बरकरार रहेगा। जून और अप्रैल में पहले ही कुल 100 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की जा चुकी है। अब तक फरवरी से रेपो दर में कुल तीन बार कटौती की गई थी- फरवरी और अप्रैल में 25-25 और जून में 50 बेसिस प्वाइंट्स की।
#WATCH | Monetary Policy Committee decides to keep the policy repo rate unchanged at 5.5%, neutral stance to continue, says RBI Governor Sanjay Malhotra.
— ANI (@ANI) August 6, 2025
(Video source: RBI/YouTube) pic.twitter.com/dZLo5WjFKj
विकास दर का अनुमान 6.5% पर स्थिर
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 के लिए विकास दर (GDP Growth) का अनुमान 6.5% पर स्थिर रखा है। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत आधार, उपयुक्त नीतिगत समर्थन और बेहतर मानसून के चलते स्थिर गति से आगे बढ़ रही है।
महंगाई का अनुमान घटाया गया
आरबीआई ने महंगाई दर के अनुमान को 3.7% से घटाकर 3.1% कर दिया है। खुदरा महंगाई (CPI) जून में गिरकर 2.1% पर पहुंच गई, जो कि पिछले छह वर्षों का निचला स्तर है। खाद्य वस्तुओं में गिरती कीमतों ने इस राहत में अहम भूमिका निभाई है।
खाद्य महंगाई (-)1.06% पर आ गई, जो मई में 0.99% थी। सब्ज़ियों, दालों, अनाज और दूध जैसी जरूरी वस्तुओं के सस्ते होने से आम आदमी को राहत मिली है।
त्योहारी सीजन में दिख सकती है तेजी
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि “अच्छे मानसून और आगामी त्योहारी सीजन से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। सरकार और रिजर्व बैंक की सकारात्मक नीतियां अर्थव्यवस्था को सहारा देंगी।”
बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत के अवसर
आरबीआई गवर्नर ने वैश्विक चुनौतियों और भूराजनीतिक अनिश्चितताओं का जिक्र करते हुए कहा कि “बदलते विश्व व्यवस्था में भारतीय अर्थव्यवस्था के पास अपार संभावनाएं हैं और यह अपनी अंतर्निहित मजबूती के बल पर आगे बढ़ रही है।”
एमपीसी में कौन-कौन शामिल रहा?
मौद्रिक नीति समिति के छह सदस्यों में संजय मल्होत्रा (गवर्नर, आरबीआई),पूनम गुप्ता (डिप्टी गवर्नर) , राजीव रंजन (कार्यकारी निदेशक), नागेश कुमार, सौगत भट्टाचार्य, और राम सिंह (सरकार द्वारा नामित बाहरी सदस्य) शामिल रहें।
क्यों अहम थी यह बैठक?
4 अगस्त को शुरू हुई इस बैठक में मौद्रिक नीति की दिशा और ब्याज दरों की समीक्षा की गई। गौरतलब है कि एमपीसी हर दो महीने में बैठक करती है और देश की मौद्रिक नीति की रूपरेखा तय करती है, जिससे आम आदमी से लेकर उद्योग जगत तक पर व्यापक असर पड़ता है।

