Monday, March 23, 2026
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विक्रम, वेताल, शोले और वोट

वेताल को कंधे पे लटका कर विक्रम चल पड़ा था। घाघ वे ताल कहां चूकने वाला था। उसने हवा में हाथ हिलाया और एक आई फोन उसकी मुठ्ठी में आ गया। वो विक्रम से बोला अब मैं भी हाईटेक हो गया हूं। ये लो आई फोन और इस पर फिल्म देखो शोले। विक्रम फिल्म देखने में जुट गया।

क्या लाए हो काशीराम। वोट हैं ठाकुर। ये आधी मुठ्ठी वोट लाए हो। बाकी क्या विपक्ष को दिलाने के लिए रख दिए हैं। जितने थे सब लाया हूं ठाकुर। जिस दिन एक छापा पड़ जाएगा न तो सब समझ में आ जाएगा। आओ लोकतंत्र! अभी भी जिदा हो। जा के तानाशाह से कह दो कि इस गांव के लोगों ने उसके सामने वोट लुटवाना बंद कर दिया है। कौन रोकेगा हमको? मैं और मेरे लोग। सुनो! लोकतंत्र ने डरपोकों की फौज बनाई है। सोच लो लोकतंत्र! तानाशाह को पता चला ना। तो…! मीडिया! जरा नजर उठा के देखो। तुम्हारे सर पे लोग नाच रहे है। सिर्फ दो! तुम्हारे लिए बहुत हैं।

तेरा क्या होगा विपक्ष? सरदार मैंने तोआपकी गलतियां बताई हैं। अब एफिडेविट दे। चुनाव कब है? कब है चुनाव? मीडिया तो कह रहा था दो हैं। कहां है तेरा दूसरा जोड़ीदार? अरे! ओ! जोड़ीदार बाहर आते हो कि ठोक दूं तेरे जोड़ीदार पे मानहानि का दावा। आओ…आओ। अब आए हैं लोग तंत्र के नीचे। केंचुआ के ताप से सिर्फ केंचुआ ही बचा सकता है। और इसके बदले थोड़े बहुत वोटों की चोरी करता है तो क्या गुनाह करता है। मैं तो कहता हूं कोई गुनाह नहीं करता। बहन बेटियों के सम्मान में हम हमेशा मैदान में। अब देखो कैसे ये एफिडेविट देंगे। हुकूमत मेरी, सिर इनका।

ये हाथ मुझे दे दे लोक तंत्र। बहुत जान है इन हाथों में। ये हाथ मेरे फैसलों को बदल देते हैं। ये हाथ मुझसे सवाल करते हैं। ये हाथ नहीं विपक्ष के रक्षक हैं। ये हाथ मुझे दे दे लोक तंत्र। कितने दिन वोट डालेंगे हम और कितने दिन वोट डालोगे तुम। जब तक ये दोनों इस देश में रहेंगे, अनाज के बदले वोट तो दे सकते हैं, लेकिन वोट के लिए प्राण नहीं दे सकते। जानते हो लोकतंत्र पे सबसे बड़ा बोझ क्या होता है, किसी को वोट नहीं डालने देना। वोट मेरा नहीं कटा है फिर भी मैं चाहूंगा कि ये वोट की यात्रा निकले। आगे तुम देश वाले जानो। कोई मुझे बूथ तक ले जाएगा।

लोक तंत्र तू क्या लड़ेगा मुझसे। तेरे तो दोनों हाथ मीडिया और संस्थाएं मैने पहले ही काट दिए है। तानाशाह को संविधान नहीं जनता कुचलती है। तेरे लिए तो मेरी जनता ही काफी है। विक्रम फिल्म में ऐसा खोया कि पॉपकॉर्न और कॉफी भी भूल गया फिर कैसे याद रहता कि उसको कुछ बोलना नहीं है। नीम बेहोशी में वेताल से उसने पूछ लिया, आज तुमने कोई सवाल नहीं पूछा। वेताल ने दुख भरी आवाज में कहा आज मेरा टेली प्रांप्टर बंद हो गया है। कैसे सवाल पूछता? पर तू फिर भी बोला और तू बोला। ले मैं ये चला। बेचारा विक्रम वोटर लिस्ट से कटे हुए नाम वाले वोटर की तरह बस फड़फड़ा के रह गया था। पता नहीं क्या करेगा?

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