Friday, March 6, 2026
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“नक्सलियों को दो दशक तक जिंदा रखने वाला फैसला”: शाह का ‘इंडिया’ गठबंधन पर हमला

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन द्वारा चुने गए उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को लेकर बड़ा बयान दिया है। शाह ने आरोप लगाया कि जस्टिस रेड्डी ने सलवा जुडूम को असंवैधानिक ठहराने वाले फैसले में अहम भूमिका निभाई, जिसके चलते नक्सलवाद दो दशक और जिंदा रहा।

शाह ने एएनआई को दिए एक विशेष इंटरव्यू में कहा, “सलवा जुडूम उन आदिवासियों का संगठन था, जो शिक्षा, सड़क और स्वास्थ्य चाहते थे। यह उनके आत्मरक्षा का माध्यम था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने न सिर्फ इस समूह को खत्म कर दिया, बल्कि नक्सलियों को भी दोबारा ताकत दी।”

राहुल गांधी को देना चाहिए जवाब: शाह

शाह ने सीधे तौर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को घेरते हुए सवाल उठाया कि “ऐसे व्यक्ति को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार क्यों बनाया गया, जिसकी विचारधारा वामपंथी सोच से सहानुभूति रखती है?” उन्होंने कहा, “राहुल गांधी को जवाब देना चाहिए कि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को क्यों चुना, जिसकी वजह से सलवा जुडूम जैसा नागरिक सुरक्षा बल खत्म हुआ।”

सलवा जुडूम पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला – एक फ्लैशबैक

जुलाई 2011 में, जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी और जस्टिस एस.एस. निज्जर की पीठ ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में चल रहे सलवा जुडूम को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार दिया था। उस समय राज्य में भाजपा की सरकार थी और रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। कोर्ट ने कहा था कि यह कदम राज्य की सांविधानिक जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने जैसा है, जिसमें नागरिकों को प्रशिक्षित पुलिस बल से सुरक्षा देना अनिवार्य है। शाह ने आरोप लगाया कि इस फैसले के बाद वहां तैनात सीआरपीएफ और सुरक्षा बलों को रातों-रात हटाना पड़ा, जिससे कई इलाकों में नक्सली हमले बढ़ गए।

एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन का समर्थन

गृह मंत्री शाह ने एनडीए द्वारा महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद के लिए नामित किए जाने को “स्वाभाविक निर्णय” बताया। उन्होंने कहा,
“जब राष्ट्रपति पूर्व भारत से हैं और प्रधानमंत्री उत्तर और पश्चिम से, तो उपराष्ट्रपति का पद दक्षिण भारत के किसी व्यक्ति को मिलना स्वाभाविक है।”

‘2026 के चुनाव से कोई लेना-देना नहीं’

शाह ने उन अटकलों को खारिज कर दिया कि यह चयन तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले भी राज्य में चुनाव लड़ चुकी है और जीत दर्ज की है।

“सीपी राधाकृष्णन का लंबा राजनीतिक अनुभव है। वह दो बार सांसद रह चुके हैं, तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं और विभिन्न राज्यों के राज्यपाल के रूप में सेवा दे चुके हैं। उनकी छवि साफ-सुथरी और परिपक्व नेता की है।”

‘आरएसएस से जुड़ाव कोई माइनस प्वाइंट नहीं’

जब उनसे पूछा गया कि क्या राधाकृष्णन को आरएसएस से जुड़ाव के चलते चुना गया, तो शाह ने कहा “प्रधानमंत्री मोदी, मैं, वाजपेयी जी और आडवाणी जी – सभी संघ से जुड़े रहे हैं। क्या लोगों ने हमें इसलिए नहीं चुना? क्या यह कोई माइनस प्वाइंट है?”

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