Wednesday, March 25, 2026
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RBI ने Repo Rate को 5.5% पर बरकरार रखा, विकास दर पर Tariff का असर पड़ने की आशंका

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार को समाप्त हुई तीन दिवसीय बैठक के बाद बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक के बाद जानकारी देते हुए कहा कि देश में अनुकूल मानसून, नियंत्रित मुद्रास्फीति और मौद्रिक नरमी जैसे कारकों से आर्थिक वृद्धि की संभावना मजबूत बनी हुई है।

रेपो रेट स्थिर, नीति रुख ‘तटस्थ’

RBI Governor ने बताया कि एमपीसी ने सर्वसम्मति से नीतिगत दर (रेपो रेट) को 5.5% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही मौद्रिक नीति रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर अर्थव्यवस्था में लचीलापन बना रहे।

जीएसटी सुधारों से महंगाई पर सकारात्मक असर की उम्मीद

संजय मल्होत्रा ने कहा कि जीएसटी प्रणाली को युक्तिसंगत बनाना महंगाई पर नियंत्रण के लिए अहम साबित हो सकता है। उनके अनुसार, इससे न सिर्फ मुद्रास्फीति में कमी आएगी, बल्कि उपभोग और आर्थिक विकास को भी बल मिलेगा।

टैरिफ के प्रभाव से विकास दर में गिरावट की आशंका

आरबीआई गवर्नर ने चेताया कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में विकास दर पर टैरिफ से जुड़े वैश्विक घटनाक्रम का असर पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी और संरचनात्मक सुधार इस प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकते हैं।

रेमिटेंस से चालू खाता घाटा नियंत्रित रहने की उम्मीद

संजय मल्होत्रा ने बताया कि मजबूत प्रवासी भारतीय रेमिटेंस के चलते चालू खाता घाटा इस वर्ष टिकाऊ स्तर पर बना रहने की संभावना है। यह भारत की बाहरी स्थिरता के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत है।

फरवरी 2025 से अब तक 100 आधार अंकों की कटौती

आरबीआई ने फरवरी 2025 से अब तक रेपो दर में कुल 100 आधार अंकों की कटौती की है:

फरवरी और अप्रैल में 25-25 आधार अंकों की कटौती

जून में 50 आधार अंकों की कटौती

इन कटौतियों के पीछे मुख्य कारण कम होती खुदरा मुद्रास्फीति रही है।

खुदरा मुद्रास्फीति छह साल के निचले स्तर पर

सरकार ने आरबीआई को निर्देश दिया है कि सीपीआई आधारित खुदरा मुद्रास्फीति को 4% (±2%) के दायरे में बनाए रखा जाए। फरवरी 2025 से खुदरा महंगाई दर लगातार 4% से नीचे रही है। अगस्त 2025 में यह घटकर 2.07% पर पहुंच गई — जो पिछले 6 वर्षों का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी और अनुकूल आधार प्रभाव की वजह से आई है।

क्या है रेपो रेट?

रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है।
इसमें बदलाव का सीधा असर ब्याज दरों, लोन की EMI, और बाजार की तरलता पर पड़ता है।

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