Wednesday, April 1, 2026
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Latest News: यूक्रेनी सेना ने पकड़ा भारतीय युवक, रूसी सेना के लिए लड़ने का आरोप, भारत सरकार की पुष्टि बाकी!

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: यूक्रेनी मीडिया में मंगलवार को एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यूक्रेन की सेना ने एक भारतीय नागरिक को हिरासत में लिया है, जो कथित तौर पर रूस की ओर से युद्ध में शामिल था। युवक की पहचान मजोती साहिल मोहम्मद (22 वर्ष) के रूप में की गई है, जो गुजरात के मोरबी जिले का निवासी बताया जा रहा है।

यूक्रेनी मीडिया का दावा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेनी सेना ने दावा किया है कि मजोती साहिल मोहम्मद को युद्ध क्षेत्र से हिरासत में लिया गया, जब वह रूसी सेना के साथ सक्रिय था। यूक्रेन का कहना है कि वह रूस की ओर से लड़ाई में शामिल था, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।

रूस पढ़ाई करने गया था, फिर पहुंचा जेल

यूक्रेनी मीडिया के अनुसार, साहिल मोहम्मद शिक्षा के उद्देश्य से रूस गया था, लेकिन वहां कथित रूप से ड्रग्स से जुड़े एक अपराध में दोषी पाए जाने के बाद रूसी अदालत द्वारा सात साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद, दावा किया जा रहा है कि उसे जेल से छुड़ाकर रूसी सेना में भर्ती किया गया, जैसा कि रूस द्वारा विदेशी कैदियों के साथ पहले भी किया गया है।

भारत सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल भारत सरकार या विदेश मंत्रालय की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। कीव स्थित भारतीय दूतावास को भी अब तक यूक्रेन सरकार से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार दावे की जांच कर रही है और स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी जाएगी।

रूस-यूक्रेन युद्ध में विदेशी लड़ाके

रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध में विदेशी नागरिकों की भागीदारी को लेकर पहले भी कई मामले सामने आए हैं। विशेष रूप से रूस द्वारा विदेशी कैदियों को सेना में शामिल करने की रणनीति पर अंतरराष्ट्रीय आलोचना होती रही है।

फिलहाल स्थिति?

युवक का नाम: मजोती साहिल मोहम्मद

उम्र: 22 वर्ष

मूल निवासी: मोरबी, गुजरात (भारत)

यूक्रेनी मीडिया का दावा: रूसी सेना के साथ युद्ध में शामिल

भारत सरकार: जांच जारी, आधिकारिक पुष्टि नहीं

भारतीय दूतावास (कीव): कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली

आगे की राह

अब निगाहें भारत सरकार की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि यह दावा सही पाया जाता है, तो यह मामला भारत और रूस के संबंधों में एक संवेदनशील मोड़ ला सकता है, खासकर विदेशी कैदियों के उपयोग और मानवाधिकारों के संदर्भ में।

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