Friday, March 20, 2026
- Advertisement -

जिहाद और सुप्रीम कोर्ट पर विवादित बयान, मदनी के बोल से मचा हंगामा

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने जिहाद, बाबरी मस्जिद, तलाक और न्यायपालिका को लेकर विवादित टिप्पणियां कीं। सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर भी सवाल उठाए।

अदालतों पर लगाए गंभीर आरोप

कार्यक्रम में बोलते हुए मदनी ने कहा कि हाल के वर्षों में अदालतों के कई निर्णय अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने दावा किया कि बाबरी मस्जिद और तीन तलाक जैसे मामलों में आए फैसले यह दर्शाते हैं कि “अदालत सरकार के दबाव में काम करती हुई दिखती है।” मदनी ने 1991 के प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि “ज्ञानवापी और अन्य धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में सुनवाई होना इस कानून की भावना के खिलाफ है।”

जिहाद को लेकर दिया बड़ा बयान

जिहाद शब्द के दुरुपयोग पर नाराज़गी जताते हुए मदनी ने कहा “आज जिहाद जैसे पवित्र शब्द को मीडिया और सरकार गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। इसे लव जिहाद, थूक जिहाद, जमीन जिहाद जैसे शब्दों के साथ जोड़ दिया गया है। जिहाद हमेशा पवित्र था और रहेगा।”

उन्होंने आगे कहा “जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा। मैं फिर दोहराता हूं, जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा।” हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत जैसे लोकतांत्रिक और सेक्युलर देश में जिहाद की बात करना “मौजूए बहस” नहीं है। उनके अनुसार मुसलमान संविधान के प्रति वफादार हैं और अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।

देश के सामाजिक माहौल पर टिप्पणी

मदनी ने दावा किया कि देश में समाज तीन हिस्सों में बंटा है 10% लोग मुसलमानों के पक्ष में, 30% उनके खिलाफ, और 60% लोग खामोश। उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे इस 60% खामोश तबके से संवाद स्थापित करें और अपनी बात रखें। मदनी का कहना है कि यदि यह खामोश बहुमत मुसलमानों के खिलाफ हो गया, तो देश के लिए “गंभीर स्थिति” पैदा हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट पर सीधा हमला

मौलाना महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट की गरिमा पर भी सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा “सुप्रीम कोर्ट तब तक ही सुप्रीम कहलाने का हकदार है, जब तक वह संविधान की हिफाजत करता है। अगर ऐसा नहीं होगा तो नैतिक तौर पर भी उसे सुप्रीम कहलाने का हक नहीं है।”

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

अब घबराने का समय आ गया है

हमारे देश में जनता के घबराने का असली कारण...

विनाश के बीच लुप्त होतीं संवेदनाएं

जब विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण के सहारे मानव सभ्यता...

ऊर्जा संकट से इकोनॉमी पर दबाव

वैश्विक अर्थव्यवस्था में जब भी ऊर्जा संकट गहराता है,...

Navratri Fasting Rules: नौ दिन के व्रत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, सेहत हो सकती है खराब

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...

Saharanpur News: राजीव उपाध्याय ‘यायावर’ को सर्वश्रेष्ठ शोध प्रस्तुति सम्मान

जनवाणी संवाददाता | सहारनपुर: चमनलाल महाविद्यालय में आयोजित 7वें उत्तराखण्ड...
spot_imgspot_img