
दुनिया में बेघर लोगों पर रिपोर्ट जारी करने वाली ओईसीडी का कहना है कि सबसे ज्यादा बेघर लोगों वाले देशों की लिस्ट में पाकिस्तान पहले नंबर पर है। वहां करीब 80 लाख से ज्यादा लोग बिना घर के सड़कों पर रहने को मजबूर हैं। लिस्ट में सीरिया 53 लाख बेघर लोगों के साथ दूसरे नंबर पर है, जबकि बांग्लादेश 50 लाख बेघर लोगों के साथ तीसरे नंबर पर है। चीन 25.79 लाख बेघर लोगों के साथ 9वें स्थान पर है। वहीं 25 लाख बेघर लोगों के साथ नेपाल 10वें स्थान पर है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों का भी इस लिस्ट में होना यह दिखाता है कि आवास की समस्या एक वैश्विक चुनौती है। वहीं भारत की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा होने के बावजूद बेघर लोगों की संख्या 17.70 लाख तक ही सीमित है।
रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान में 80 लाख लोगों के बेघर होने की मुख्य वजह देश की आर्थिक अस्थिरता है। पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान गंभीर महंगाई और आर्थिक मंदी से जूझ रहा है। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही भयानक बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं ने हजारों घर तबाह कर दिए हैं। राजनीतिक अस्थिरता और आवास योजनाओं की कमी के कारण वहां के आम लोगों को छत मुहैया कराना नामुमकिन सा होता जा रहा है। पाकिस्तान में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी भी वहां के लोगों के विकास में बाधा बन रही है। वहां भुखमरी और महंगाई भी चरम पर है, जिसके चलते आम लोगों का जीवन कठिन होता जा रहा है।
पाकिस्तान में हालात दुनिया के मुकाबले बहुत विकट हैं, क्योंकि वहां हर तरह की अस्थिरता लोगों की तकलीफों में लगातार इजाफा कर रही है। अगर भारत की बात करें तो रिपोर्ट कहती है कि 17.70 लाख बेघर लोगों के साथ भारत दुनिया में 13वें स्थान पर है। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने राज्यसभा में बताया था कि देश में 17.73 लाख लोग बेघर हैं, जिनमें से 9.38 लाख शहरी क्षेत्रों में और 8.34 लाख ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। राज्यों की बात की जाए तो उत्तर प्रदेश में शहरी क्षेत्र में 1.80 लाख लोग बेघर हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में 1.11 लाख, पश्चिम बंगाल में 1.04 लाख और गुजरात में 84,822 लोग शहरी क्षेत्रों में बेघर हैं।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश में 1.48 लाख लोग, राजस्थान में 1.08 लाख लोग, महाराष्ट्र में 99,535 लोग और आंध्र प्रदेश में 69,354 लोग बेघर हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की बात की जाए तो उत्तर प्रदेश में बेघर लोगों की संख्या 3.29 लाख है। इसके बाद महाराष्ट्र में 2.10 लाख, राजस्थान में 1.81 लाख, पश्चिम बंगाल में 1.34 लाख, मध्य प्रदेश में 1.46 लाख, आंध्र प्रदेश में 1.45 लाख और गुजरात में 1.44 लाख लोग बेघर हैं।
अगर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की बात करें तो 2001 की जनगणना के अनुसार दिल्ली में 24,966 लोग बेघर थे। वहीं 2011 की जनगणना के अनुसार दिल्ली में 46,724 लोग बेघर थे। बेघर लोगों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों का दावा है कि दिल्ली में करीब 1.50 लाख से ज्यादा लोग बेघर हैं। इन संगठनों का कहना है कि दिल्ली की तमाम सड़कों, मोहल्लों, फ्लाईओवरों, गुरुद्वारों, बाजारों, रेलवे की खाली पड़ी जमीनों और पार्क-मैदानों में लाखों बेघर लोग रह रहे हैं। इनका दावा है कि दिल्ली का आंकड़ा और भी ज्यादा है, क्योंकि दिल्ली की बेघर आबादी के कई हिस्सों को नहीं गिना जा सका है। मसलन, दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों जैसे पुरानी दिल्ली में देर रात तक काम करने वाले बेघर व्यक्तियों की एक बड़ी संख्या की गिनती नहीं की जा सकती है।
भारत सहित दुनिया भर में बेघर लोग सड़कों पर, फ्लाईओवर के नीचे या फिर झुग्गियों में अपने दिन बिता रहे हैं। असल में बेघर लोग समाज के सबसे कमजोर वर्ग में से हैं, जिन्हें लगातार कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह एक गंभीर सामाजिक और मानवीय समस्या बनती जा रही है। बेघर लोगों की स्थिति अत्यंत दयनीय और असुरक्षित होती है, जहां उन्हें भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य सेवा और सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ता है, जिससे वे हिंसा, बीमारी (शारीरिक और मानसिक), कुपोषण और अत्यधिक मौसम के संपर्क में रहते हैं और अक्सर सामाजिक कलंक, शोषण और मानवाधिकारों के उल्लंघन का सामना करते हैं। आवास की कमी, गरीबी और नौकरी छूटना मुख्य कारण हैं। कोविड ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है।
बेघर लोगों को हृदय रोग, श्वसन संक्रमण और संक्रामक रोगों का खतरा अधिक होता है। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य और आघात की समस्याएं आम हैं। उनकी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मुश्किल होती है। सड़क पर रहने वाले लोग हिंसा, यौन शोषण और चोरी के शिकार होने की अधिक संभावना रखते हैं। महिलाएं और बच्चे विशेष रूप से असुरक्षित होते हैं। उन्हें निश्चित और सुरक्षित जगह नहीं मिलती, जिससे वे अत्यधिक ठंड या गर्मी जैसी मौसम की मार झेलते हैं और पानी-स्वच्छता का अभाव होता है। वे अक्सर गरीब, हाशिए पर होते हैं और उन्हें पहचान पत्र या अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता, जिससे वे गरीबी के दुष्चक्र में फंस जाते हैं। बेघर होना पर्याप्त आवास के मानवाधिकार का उल्लंघन है और राज्य की सहायता न कर पाने की विफलता को अमानवीय व्यवहार माना जा सकता है।
बेघर लोगों की मदद करने के लिए सबसे पहले तो सरकारों को आगे आना होगा। उन्हें बेघरों को घर बनाकर देने होंगे। किफायती आवास का निर्माण और संरक्षण बेघर होने की समस्या को रोकने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है। अधिक आवास इकाइयों का निर्माण आवश्यक है और वर्तमान आवास कम आय वाले परिवारों के लिए सुलभ बने रहने चाहिए। इसके साथ ही आम लोग भी बेघरों की मदद कर सकते हैं। बेघर लोगों को भोजन, कपड़े और स्वच्छता किट देना, आश्रयों में दान या स्वयं सेवा करना और बेघरपन से जुड़े प्रणालीगत मुद्दों के समाधान के लिए वकालत करना शामिल है। वहीं स्थानीय बेघर आश्रयों या सहायता समूहों को पैसे, कपड़े या अन्य आवश्यक सामान दान करें।
आश्रयों में रसोई में मदद करें, रखरखाव करें या प्रशासनिक कार्यों में हाथ बटाएं। अपने स्थानीय प्रतिनिधियों से संपर्क करें और बेघरपन को खत्म करने के लिए प्रणालीगत बदलावों का समर्थन करें। संभव हो तो अपने पुनर्चक्रण योग्य सामान उन लोगों को दें, जो आय के लिए उन पर निर्भर करते हैं। उनके साथ अच्छा व्यवहार करें। उनकी जरूरतों को समझने की कोशिश करें, क्योंकि हर व्यक्ति की जरूरतें अलग हो सकती हैं। वहीं स्थानीय सरकारी रैन बसेरों और योजनाओं के बारे में जानकारी रखें और जरूरतमंदों को बताएं। इस तरह हम छोटी व सामान्य मदद करके बेघर लोगों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने में मदद कर सकते हैं। हमारा छोटा सा सहयोग उनकी बड़ी जरूरतों को पूरा कर सकता है और हमें यह सहयोग करना ही चाहिए।

