जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति के तिरुमला मंदिर में प्रसादम लड्डू बनाने में मिलावटी घी के कथित मामले से जुड़ी भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका खारिज कर दी है। स्वामी ने आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा एसआईटी रिपोर्ट की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय समिति के गठन को चुनौती दी थी।
याचिका खारिज, कोई ठोस आधार नहीं
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय समिति की प्रशासनिक जांच आपराधिक प्रक्रिया से ओवरलैप नहीं करेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक जांच और चार्जशीट से संबंधित आपराधिक प्रक्रिया के दायरे अलग-अलग निर्धारित हैं, इसलिए दोनों की जांच में कोई टकराव नहीं होगा। इस तरह, दोनों प्रक्रियाएं समानांतर रूप से चल सकती हैं।
एसआईटी की जांच में क्या सामने आया?
एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ कि भगवान वेंकटेश्वर मंदिर के नाम पर बेचा गया घी असल में केमिकल से प्रोसेस किया पामोलिन तेल और अन्य पदार्थों से बना था। अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) आरोपियों द्वारा मिलावटी घी के व्यापार से कमाए गए पैसों की जांच कर रहा है। एजेंसी को संदेह है कि इस घोटाले में हवाला के जरिए पैसा ट्रांसफर किया गया और फंड का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है।
मामला क्या है?
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब सितंबर 2024 में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाए कि राज्य में वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार के दौरान तिरुपति लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी का उपयोग हुआ था। इस आरोप ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया।
जांच की स्थिति
टीटीडी (तिरुमला तिरुपति देवस्थानम) के चेयरमैन बी. आर. नायडू ने जनवरी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पूर्व सरकार के दौरान मंदिर को करीब 60 लाख किलो मिलावटी घी सप्लाई किया गया था, जिसकी कीमत लगभग 250 करोड़ रुपये थी। अब ईडी इस पूरे लेन-देन की गहन जांच कर रही है।

