जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: महिलाओं में होने वाली हार्मोनल समस्याओं में सबसे आम मानी जाने वाली बीमारी PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) को लेकर अब विशेषज्ञों ने बड़ा बदलाव किया है। डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के अनुसार, यह समस्या केवल ओवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शरीर के हार्मोन और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी होती है। इसी वजह से अब इसे नया नाम “PMOS” यानी पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नया नाम इस बीमारी को ज्यादा सही और व्यापक तरीके से समझाने में मदद करेगा, जिससे समय पर पहचान और बेहतर इलाज संभव हो सकेगा।
क्यों बदला गया PCOS का नाम?
डॉक्टरों के मुताबिक “PCOS” नाम में शामिल “Cyst” शब्द लोगों में भ्रम पैदा करता है। आमतौर पर लोग मान लेते हैं कि इस बीमारी में हर महिला की ओवरी में सिस्ट या गांठें होती हैं, जबकि ऐसा जरूरी नहीं है।
कई महिलाओं में PCOS के लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड में किसी तरह की सिस्ट नहीं मिलती। ऐसे में विशेषज्ञ अब इसे केवल ओवरी की बीमारी मानने के बजाय पूरे शरीर के हार्मोनल और मेटाबॉलिक सिस्टम से जुड़ी समस्या के रूप में देख रहे हैं। इसी सोच के तहत इसका नया नाम “PMOS” रखा गया है।
सिर्फ ओवरी नहीं, पूरे शरीर पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि PMOS सिर्फ रिप्रोडक्टिव सिस्टम की बीमारी नहीं है। इसमें शरीर का मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल बैलेंस भी प्रभावित होता है।
इस बीमारी में इंसुलिन रेजिस्टेंस अहम भूमिका निभाता है, जिसके कारण शरीर में शुगर प्रोसेसिंग प्रभावित होने लगती है। इसके चलते वजन बढ़ना, थकान, हार्मोन असंतुलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ सकती हैं।
धीरे-धीरे यह स्थिति शरीर के कई हिस्सों और सिस्टम को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि डॉक्टर अब इसे केवल “ओवरी की समस्या” नहीं मान रहे हैं।
PMOS के प्रमुख लक्षण
PMOS के लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं। हालांकि कुछ सामान्य संकेत अक्सर देखने को मिलते हैं, जैसे
- पीरियड्स का अनियमित होना
- तेजी से वजन बढ़ना
- चेहरे या शरीर पर अनचाहे बाल आना
- मुंहासों की समस्या
- बाल झड़ना
- थकान और कमजोरी
- मूड स्विंग्स
विशेषज्ञों के अनुसार कई बार इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं, जिससे बीमारी की पहचान देर से हो पाती है। इसलिए शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
नया नाम क्यों है जरूरी?
डॉक्टरों का मानना है कि “PMOS” जैसा नया नाम इस बीमारी की वास्तविक प्रकृति को बेहतर तरीके से समझाने में मदद करेगा। इससे मरीजों में फैली गलतफहमियां कम होंगी और लोग इसे सिर्फ ओवरी की समस्या मानने के बजाय एक गंभीर मेटाबॉलिक डिसऑर्डर के रूप में समझ पाएंगे।
सही नामकरण से समय पर पहचान, बेहतर इलाज और प्रभावी मैनेजमेंट आसान हो सकता है। साथ ही महिलाओं में इस बीमारी को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी, जिससे वे अपनी सेहत के प्रति ज्यादा सतर्क रह सकेंगी।

