मशीनों के आसपास पांच-पांच फीट ऊंची उगी झाड़ियां
बिल्डिंग बनी, मशीनें पड़ी हैं लावारिस अवस्था में खुले आसमान के नीचे
रामबोल तोमर |
मेरठ: 256 करोड़ की बड़ी धनराशि से खरीदी गई विदेशी मशीन जंग खा रही है। आटोमेटिक मशीन खुले आकाश में वर्ष 2013 से पड़ी हैं। बिल्डिंग बनी हुई हैं, मगर मशीने खुले आसमान में लावारिस तरीके से पड़ी हैं।
मशीनों के पास पांच-पांच फीट ऊंची झाड़ियां उग आई हैं। इनके पास साफ-सफाई कराने की विभागीय अफसरों को फुर्सत नहीं हैं। सरकारी सिस्टम की लापरवाही का यह जीता जागता उदाहरण है।
सरकारी सिस्टम की लापरवाही से करोड़ों की विदेशी मशीन कबाड़ में तब्दील हो रही हैं, मगर अधिकारी आंखें मूंदे हुए हैं? आखिर इसके लिए जवाबदेही किसकी है? ऐसा भी नहीं है कि बिल्डिंग की कमी हैं, बिल्डिंग भी तैयार हैं।

जी हां! हम बात कर रहे हैं पराग दूग्ध संघ के गगोल स्थित दुग्ध प्रोजेक्ट की। वर्ष 2013 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वेस्ट यूपी के पशुपालकों के लिए पराग दूध प्लांट की क्षमता वृद्धि करने के लिए 256 करोड़ का तोहफा दिया था।
पराग दूध प्लांट जिस स्थान पर चल रहा है, उससे सटकर नया प्लांट बनाया जा रहा था। इसका शिलान्यास तत्कालीन सपा सरकार में कर दिया गया था। मशीन भी खरीद ली गई थी। सिर्फ मशीन को फिटिंग कर चालू किया जाना था।
यह काम भाजपा सरकार ने नहीं किया, बल्कि इसको लेकर राजनीति की गई। ये बिग प्रोजेक्ट चलाया गया होता तो वेस्ट यूपी के पशु पालक किसानों को दूध का मूल्य भी वाजिम मिलता तथा 51 दिनों तक दूध को पिजर्व करने की इस प्लांट में क्षमता थी। हजारों लोगों को इस प्लांट से रोजगार भी मुहैया कराया जा सकता था, लेकिन 256 करोड़ की बड़ी धनराशि बर्बाद कर दी गई?
आखिर इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन हैं? क्या खराब हो गई मशीनों के लिए जवाबदेह अफसरों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस धनराशि की रिकवरी करेंगे? ये मामला एक-दो रुपये का तो है नहीं, 256 करोड़ का हैं। यह जनता की गाढ़ी कमाई को खुले आकाश में लुटाने की आखिर इज्जात किसने दी? दूग्ध संघ की राजनीति करने वाले भी प्लांट को लेकर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?
वेस्ट यूपी का दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में वर्चस्व है। वर्ष 2013 में 256 करोड़ का तोहफा पराग दुग्ध संघ को दिया था। यह धनराशि पराग दुग्ध डेरी प्लांट की क्षमता दोगुनी करने के लिए की बड़ी धनराशि पराग दुग्ध प्लांट को दी गई थी। इसकी क्षमता पांच लाख लीटर दुग्ध की प्रोसेसिंग करने की होने वाली थी, मगर विदेशी मशीन खुले आकाश के नीचे डाल दी गई।
ये आटोमेटिक मशीने आईडीएमसी फ्रांस की कंपनी की मशीन है। फ्रांस से खरीदकर मशीन लाई गई थी। इस स्तर की देश में एक भी मशीन नहीं है। 256 करोड का प्रोजेक्ट था, जो कबाड़ में तब्दील हो गया है। पांच लाख लीटर दूध का यह प्रोजेक्ट था। यह दूध प्रोसोसिंग करने का प्लांट तैयार होना था। प्रयोग में आने वाली मशीनें फ्रांस से मंगाई गई थी। दूध की नामचीन प्राइवेट कंपनियों के पास भी फ्रांस की मशीने नहीं हैं।
आईडीएमसी कंपनी अपने आप में वर्ल्ड की बड़ी कंपनी है, जिसके द्वारा यह प्लांट लगाकर पराग को दिया जाना था। अखिलेश यादव की सरकार जाने के बाद प्रदेश में भाजपा सरकार ने कमान संभाली तो यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। तब से यह प्रोजेक्ट जंग खा रहा है।
किसानों और मजदूरों को बड़ा नुकसान इस प्रोजेक्ट के बंद होने से हुआ है। क्योकि एक हजार से ज्यादा मजदूरों को इससे रोजगार मिलता, वहीं वेस्ट यूपी के पशुपालक किसानों को इसका लाभ मिलता। औने-पौने दाम में प्राइवेट कंपनी दूध किसान से खरीद रही है, फिर यूपी सरकार पराग के माध्यम से अच्छे दामों पर दूध खरीदा जा सकता था, लेकिन उन पशु पालक किसानों की उम्मीदों पर सरकारी सिस्टम ने पानी फेर दिया।
यह प्रोजेक्ट सिसक रहा है, दम घूम घूट रहा है। अब इसे आॅक्सीजन कौन देगा? यह बड़ा सवाल है। किसानों व पशु पालकों की बात तो बहुत की जाती हैं, मगर उनके उत्थान की दिशा में कौन काम करेगा? क्या इस तरह से किसानों का उत्थान किया जा सकता हैं। दूध विकास के लिए आये 256 करोड़ के प्रोजेक्ट का पानी में बहा दिया गया है। तमाम जनप्रतिनिधि यहां आंखें मूंदे हुए हैं।
प्रोजेक्ट के लिए लाई गयी विदेशी मशीनों को खराब स्थिति में पहुंचाने वाले अफसरों के गले में घंटी कौन बांधेगा? भाजपा के सांसद राजेन्द्र अग्रवाल व क्षेत्रीय विधायक डा. सोमेन्द्र तोमर क्या इसकी पहल कर पाएंगे या फिर इसी तरह से प्रोजेक्ट के लिए लाई गयी मशीन खुले आकाश के नीचे पड़ी रहेगी।
बिग प्रोजेक्ट बर्बाद हो गया सुनकर दु:ख होता है: मंजूरपूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर ने कहा कि वेस्ट यूपी के लिए यह बिग प्रोजेक्ट था। वेस्ट यूपी में पशु पालक किसानों के लिए दूध का बिजनेस अतिरिक्त आमदनी का स्रोत हैं,जिसके लिए ही तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 256 करोड़ रुपये जारी किये थे। करीब 100 करोड़ की धनराशि से फ्रांस से मशीन खरीदवाकर मंगवाई गयी थी, लेकिन दुर्भाग्य देखिये कि जैसे ही प्रदेश से अखिलेश यादव की सरकार गई, तभी भाजपा ने इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया। क्योंकि यह प्रोजेक्ट किसानों से जुड़ा हुआ था। इसी वजह से प्रोजेक्ट को भाजपा ने बंद कर दिया। 100 करोड़ से खरीदी गई मशीन का उपयोग तो किया जा सकता था, वो कबाड़ हो गई है। इस प्रोजेक्ट को स्वीकृत कराने में उनकी भूमिका रही हैं। सीएम से बात करके यह प्रोजेक्ट लाये थे, मगर प्रोजेक्ट की ऐसी दुर्दशा होगी, यह कल्पना भी नहीं की थी। |
सीएम से करेंगे बात: सोमेंद्रमेरठ दक्षिण भाजपा विधायक डा. सोमेंद्र तोमर का कहना है कि प्रोजेक्ट तो अच्छा हैं, मगर बंद कैसे हुआ। इसके बारे में बात की जाएगी। दोषी अफसरों की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की जाएगी, ताकि पशुपालक किसानों को लाभान्वित करने के लिए यह प्रोजेक्ट चालू कराया जाएगा। वेस्ट यूपी में इस तरह के प्रोजेक्ट की बेहद आवश्यकता है। क्योंकि प्राइवेट कंपनियों के पास तो बड़े-बड़े प्लांट हैं, मगर पराग के पास भी डबल क्षमता वाला प्लांट होगा। |
प्रोजेक्ट पर भाजपा सरकार ने लगाई रोक: इंद्रेश गुर्जरपूर्व चेयरमैन, पराग दुग्ध संघ इंद्रेश गुर्जर का कहना है कि 256 करोड़ का यह प्रोजेक्ट जंग खा रहा है। यह प्रोजेक्ट प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वीकृत किया था, लेकिन भाजपा सरकार ने आते ही इस प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी। तब से यह करोड़ों की मशीन जंग खा रही है। भाजपा ने एक तरह से जनता की गाढ़ी कमाई बर्बाद कर दी। |

