- डीएम की अध्यक्षता में संपन्न हुई बर्ड फ्लू नियंत्रण के संबंध में बैठक
- 12 रैपिड रेस्पांस टीम कार्यरत, पशु अस्पताल में बना कंट्रोल रूम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: बर्ड फ्लू एक हाईली पैथोजेनिक वायरस है। जनपद में इसके नियंत्रण के लिए जनपदीय ऐक्शन प्लॉन तैयार किया जा चुका है। 12 रैपिड रेस्पान्स टीम कार्यरत है तथा राजकीय पशु चिकित्सालय सदर में एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। जोकि 24 घंटे संचालित है। बचत भवन में बर्ड फ्लू (एवीयन फ्लू वायरस) के प्रभावी नियंत्रण के संबध्ां में बैठक की अध्यक्षता डीएम ने की। उन्होंने विकास खंड स्तर पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कार्य योजना बनाने के लिए निर्देशित किया तथा ग्रामों में मुनादी कराने के लिए कहा गया है।
डीएम के. बालाजी ने कहा कि सभी पोल्ट्री फार्म बॉयो-सिक्योरिटी गाइडलाइन का अनुपालन सुनिश्चित करें। पक्षियों की मृत्यु की सूचना तत्काल जिला प्रषासन को दें। उन्होंने डीपीआरओ को निर्देशित किया कि वह ग्रामों में इस बात की मुनादी कराये कि अगर बिना कारण कोई पक्षी मर रहा है तो उसकी सूचना जिला प्रशासन या कंट्रोल रूम को अवश्य दे।
हर पोल्ट्री फार्म पर पक्षियों, अंडे व उनके फीड को सूचीबद्ध किया जाये। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. अनिल कंसल ने कहा कि बर्ड फ्लू के नियंत्रण के लिए सभी विभागों को दायित्व दिये गये हैं। जिसमें सर्वेक्षण व अन्य कार्य पशुपालन विभाग को, जिला पंचायत राज विभाग के माध्यम से पोल्ट्री फार्मों को ग्राम विकास अधिकारियों द्वारा सूचीबद्ध करना, विकास खंड स्तर पर पक्षियों की बिक्री केन्द्रों को सूचीबद्ध करने का कार्य खाद्य एवं प्रसंस्करण विभाग को दिया गया है। स्वास्थ्य, वन आदि विभागों को भी दायित्व दिये गये हैं।
जनपद में छोटे व बडे मिलाकर 62 पोल्ट्री फार्म है। जनपद में बर्ड फ्लू नियंत्रण के लिए राजकीय पशु चिकित्सालय सदर में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। जिसका मोबाइल नंबर 9412662803 है। यह कंट्रोल रूम 24 घंटे संचालित है। बर्ड फ्लू के नियंत्रण के लिए नोडल अधिकारी बनाये गये डा. रजनीश ने पावर पाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुतीकरण देते हुये कहा कि बर्ड फ्लू माइग्रेटेड पक्षी के द्वारा फैलता है। आमजन द्वारा जो सतर्कता कोरोना के लिए बरती गयी है। जैसे मास्क पहनना, नियमित अंतराल पर हाथ धोना व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना, वैसी ही सतर्कता बर्ड फ्लू के लिए बरतनी है।
बर्ड फ्लू: वन विभाग ने ग्रामीणों को किया जागरूक
प्रदेश में बर्ड फ्लू के बढ़ते प्रकोप से वन्यजीवों को सुरक्षित रखने के लिए सोमवार को वन विभाग की टीम ने आरक्षित जंगल के वेटलैंड स्थलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने वेटलैंड के समीप पड़ने वाले गांव के लोगों को भी बर्ड फ्लू के प्रति जागरूक कर संदिग्ध दिखाई देने वाले पक्षियों की सूचना वन विभाग और पशुचिकित्सा विभाग को देने की बात की।
बता दें कि प्रदेश में कोरोना के साथ-साथ बर्ड फ्लू भी अपने पैर पसारता नजर आ रहा है। जिसका अधिकांश असर विदेशी पक्षियों में देखने को मिल रहा है। इसके चलते सोमवार को वन विभाग के डिप्टी रेंजर विनोद कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने सेंचुरी में मौजूद वेटलैंड स्थलों का निरीक्षण के लिए पहुंची। बर्ड फ्लू की बढ़ते प्रकोप को देखते हुए वन विभाग की टीम ने सेंचुरी में मृत या संदिग्ध स्थिति में पक्षी या फिर चिड़िया की तलाश की।
घंटों अभियान चला गया परंतु सेंचुरी में कहीं भी मृतक पक्षी या संदिग्ध स्थिति में कोई चिड़िया या पक्षी नजर नहीं आया। उसके बाद वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने सेंचुरी में मौजूद भीमकुंड गांव में लोगों को भी जागरूक किया और लोगों से आग्रह किया कि इस समय देश के कई राज्यों में बर्ड फ्लू की आशंका बढ़ती जा रही है। तदोपरांत वेटलैंड के समीप स्थित भीमकुंड गांव में एक गोष्ठी का आयोजन किया।
जिसमें वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने ग्रामीणों से मृत पक्षी चिड़िया या प्रवासी पक्षी सहित संदिग्ध स्थिति में बैठा नजर आए तो वन विभाग के अधिकारी और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को सूचना दें सूचना के लिए ग्रामीणों को नंबर भी दिए गए।
भीमकुंड गंगा पुल के समीप बने वेटलैंड में हजारों प्रवासी पक्षियों ने डेरा डाल रखा है सैकड़ों प्रजाति के प्रवासी पक्षी भोजन की तलाश में प्रतिवर्ष सेंचुरी में आते हैं। गत वर्षों में यह बर्ड फ्लू की आशंका यहां पर नहीं देखी गई। इस वर्ष सेंचुरी में भी वन विभाग के अधिकारियों को अलर्ट किया गया है।

